
बसना/ स्कूल के रस्सी के झूले पर खेलते समय बच्चे की मौत, शिक्षकों की लापरवाही के आरोप; स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जिसकीमहासमुंद/बसना। छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर स्वामी आत्मानंद स्कूलों सहित विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा, खेलकूद और सर्वांगीण विकास के अवसर उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उड़ेला के आश्रित ग्राम मूड़ी़डीह में स्कूल परिसर में रस्सी के झूले पर खेलते समय एक बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। मृतक बच्चे की पहचान तरुण चौहान के रूप में बताई गई है। जो 4 थी कक्षा में पढ़ता था घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने शिक्षकों पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है।
आखिर खेलते-खेलते कैसे चली गई बच्चे की जान? ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, मूड़ी़डीह के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे स्कूल खुलने से पहले ही परिसर में पहुंच जाते थे और वहां खेलते थे। इसी दौरान स्कूल परिसर में एक पेड़ पर बांधी गई रस्सी के झूले पर खेलते समय तरुण चौहान की मौत हो गई। बताया गया कि घटना के वक्त वहां कुछ अन्य बच्चे भी मौजूद थे। घटना के बाद बच्चों ने इसकी जानकारी स्कूल में कार्यरत रसोइया और मृतक के परिजनों को दी। इसके बाद बच्चे की मां मौके पर पहुंचीं और बच्चे को रस्सी से बाहर निकाला। बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, घटना की परिस्थितियों और मौत के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
महाजनपद न्यूज़ की टीम पहुंची गांव, जुटाई जानकारी घटना की जानकारी मिलने के बाद महाजनपद न्यूज़ की टीम गांव पहुंची और यह जानने का प्रयास किया कि प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे की मौत किन परिस्थितियों में हुई। गांव पहुंचने पर टीम की मुलाकात स्कूल में कार्यरत रसोइया और स्वीपर से हुई। उनसे बातचीत के दौरान स्कूल खुलने से पहले बच्चों के परिसर में पहुंचने और वहां खेलने की जानकारी सामने आई।
ग्रामीणों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि स्कूल परिसर में बच्चों के खेलने के लिए रस्सी का झूला शिक्षकों द्वारा लगाया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि झूला किसने लगाया था, उसकी सुरक्षा की जांच की गई थी या नहीं और क्या बच्चों के लिए वहां खेलना सुरक्षित था? इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
स्कूल खुलने से पहले बच्चों को मिल जाती थी चाबी, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात स्कूल खुलने से पहले बच्चों के परिसर में पहुंचने को लेकर सामने आई है। स्वीपर से मिली जानकारी के अनुसार, बच्चे घर से चाबी लेकर स्कूल पहुंच जाते थे और स्कूल खुलने से पहले ही परिसर में खेलने लगते थे। यदि बच्चे नियमित रूप से स्कूल खुलने से पहले परिसर में पहुंचते थे, तो उनकी सुरक्षा और निगरानी के लिए क्या व्यवस्था थी? स्कूल परिसर में बच्चों की मौजूदगी के दौरान जिम्मेदारी किसकी थी? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब संबंधित विभाग और प्रशासन को देना चाहिए।
स्कूल परिसर में पेड़ पर रस्सी बांधकर झूला बनाया गया था। यदि यह व्यवस्था बच्चों के खेलने के लिए की गई थी, तो उसकी मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी था। हालांकि, झूला किसने लगाया और उसकी सुरक्षा को लेकर पहले कोई शिकायत या चेतावनी दी गई थी या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
खेलकूद और विकास की बात, लेकिन बच्चों की सुरक्षा का क्या? सरकार सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर जोर देती है। खेलकूद भी बच्चों के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन खेल के साधन सुरक्षित होना और बच्चों की निगरानी सुनिश्चित करना उतना ही आवश्यक है।
मूड़ी़डीह की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में उपलब्ध खेल सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि स्कूल परिसर में बच्चे स्कूल खुलने से पहले पहुंच रहे थे और वहां खेल रहे थे, तो इस व्यवस्था की जानकारी संबंधित जिम्मेदार लोगों को थी या नहीं, इसकी जांच जरूरी है। एक बच्चे की मौत के बाद अब यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
शिक्षकों पर ग्रामीणों के आरोप, जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी घटना के बाद कुछ ग्रामीणों ने शिक्षकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाए हैं। हालांकि, केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यह जांच का विषय है कि रस्सी का झूला किसने लगाया, बच्चों को स्कूल खुलने से पहले परिसर में प्रवेश कैसे मिला, चाबी किसकी अनुमति से दी जाती थी और घटना के समय निगरानी की क्या व्यवस्था थी।
प्रशासन और शिक्षा विभाग को मामले की निष्पक्ष जांच कर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बद्री विशाल से संपर्क का प्रयास, नहीं मिल सका पक्ष मामले में बद्री विशाल से जानकारी लेने और उनका पक्ष जानने के लिए कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। फोन की घंटी बजती रही, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे बातचीत नहीं हो सकी और न ही उनका दोबारा फोन आया। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।
फिलहाल, मूड़ी़डीह में बच्चे की मौत से गांव में शोक का माहौल है। परिजनों के दुख के बीच स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, बच्चों की निगरानी और संभावित लापरवाही को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और प्रशासन मामले में क्या कदम उठाते हैं तथा जांच के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
महाजनपद न्यूज़ | Mahajanpadnews.com




