महासमुंद : जिंदगी के बाद भी काम आएगी ये देह, आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक दंपत्ति ने लिया देहदान का संकल्प
महासमुंद, 03 अक्टूबर 2026। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव में सेवा संकल्प अभियान के तहत रक्तदान, अंगदान एवं देहदान शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान आदिवासी विकास विभाग के अधीक्षक दंपत्ति निलेश खांडे और उनकी पत्नी चित्ररेखा तारक ने मरणोपरांत अपना शरीर दान करने का संकल्प पत्र भरकर समाज के सामने प्रेरणादायक मिसाल पेश की।
दंपत्ति के इस निर्णय से यह संदेश गया कि मानव जीवन समाप्त होने के बाद भी शरीर का उपयोग चिकित्सा शिक्षा, शोध और मानवता की सेवा में किया जा सकता है। उनका यह कदम युवाओं और समाज के अन्य लोगों को देहदान के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी समाज को समर्पण
निलेश खांडे और चित्ररेखा तारक की पहचान कर्मठ एवं बच्चों के प्रति समर्पित अधिकारियों के रूप में है। वे विभागीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के साथ छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के प्रति भी संवेदनशीलता और स्नेह के लिए जाने जाते हैं।
दंपत्ति ने इससे पहले भी नेत्रदान का संकल्प जीवन दीप समिति जांजगीर के समक्ष लिया है। इसके अलावा निलेश खांडे अब तक 47 बार और चित्ररेखा तारक 6 बार रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों की मदद कर चुके हैं।
प्रशासन ने की सराहना
दंपत्ति के इस परोपकारी निर्णय की प्रशासनिक अमले ने भी सराहना की है। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह, आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शिल्पा साय सहित अन्य जिला अधिकारियों ने उनके इस कदम को मानवता के लिए सराहनीय बताया।
निलेश खांडे और चित्ररेखा तारक का यह संकल्प समाज में देहदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने तथा इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने में प्रेरणादायक साबित हो सकता है। उनका निर्णय अन्य लोगों को भी देहदान जैसे महादान के लिए आगे आने की प्रेरणा देता है।



