सेवा की कहानी : राष्ट्रीय बागवानी मिशन से गेंदे की खेती को मिला बढ़ावा, कुमारी चंद्राकर ने प्रति एकड़ कमाए 2 लाख 7 हजार रुपए
रायपुर, 07 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा ने देश में कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में नई प्रेरणा दी है। विकसित भारत के संकल्प के साथ किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें पारंपरिक खेती के साथ-साथ अधिक लाभकारी फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी दिशा में महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम भदरसी की कृषक कुमारी चंद्राकर ने उद्यानिकी फसलों को अपनाकर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से गेंदे की खेती कर उन्होंने प्रति एकड़ लगभग 2 लाख 7 हजार रुपए की शुद्ध आय अर्जित की है।
कृषक कुमारी चंद्राकर के पास कुल 0.64 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। परंपरागत रूप से धान की खेती में अधिक लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन को देखते हुए उन्होंने उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया। वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत पुष्प क्षेत्र विस्तार घटक योजना से गेंदे की खेती को अपनाया। योजना के तहत 0.64 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदे की फसल के लिए उन्हें 12 हजार 800 रुपए का अनुदान डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हुआ।
कुमारी चंद्राकर ने गेंदे की खेती में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया। उन्होंने ड्रिप सिंचाई और कृषि यंत्रों को अपनाते हुए वैज्ञानिक एवं बेहतर प्रबंधन के साथ फसल तैयार की। आधुनिक तकनीक और उचित देखभाल से उन्हें गेंदे की खेती से प्रति एकड़ लगभग 2 लाख 7 हजार रुपए की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इससे उन्हें पारंपरिक धान की खेती की तुलना में उद्यानिकी फसलों की आर्थिक उपयोगिता का अनुभव हुआ।
गेंदे की खेती के साथ कुमारी चंद्राकर वर्षभर विभिन्न उद्यानिकी फसलों का उत्पादन भी कर रही हैं। वे धनिया, प्याज, बैंगन, मूली और भाजी जैसी सब्जियों की खेती करती हैं। विविध फसलों को अपनाने से उन्हें कृषि कार्य में अतिरिक्त आय के अवसर मिल रहे हैं और उनकी खेती अधिक लाभकारी बन रही है।
कुमारी चंद्राकर की सफलता अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है। उनकी सब्जी एवं फूलों की खेती को देखकर रिश्तेदारों तथा आसपास के अन्य किसानों में भी उद्यानिकी फसलों को अपनाने के प्रति रुचि बढ़ी है। आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधा और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने यह साबित किया है कि पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय के बेहतर अवसर तैयार कर सकते हैं।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत मिले सहयोग और अनुदान का लाभ उठाकर कुमारी चंद्राकर ने न केवल गेंदे की खेती को सफल बनाया, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी यह पहल कृषि में नवाचार, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।



