
विशेष लेख: रेल नेटवर्क के विस्तार से बदल रही छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति, प्रदेश में 51 हजार 80 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी
नए रेल कॉरिडोर से माल ढुलाई, औद्योगिक कनेक्टिविटी और आदिवासी अंचलों के विकास को मिलेगी गति
रायपुर, 19 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में आधारभूत रेल अधोसंरचना का तेजी से विकास हो रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचने की उम्मीद है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित रेलवे स्टेशनों के विकास से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बेहतर प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, स्वच्छ परिसर, आधुनिक यात्री सुविधाएं तथा उन्नत अधोसंरचना से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण रेल सेवाएं उपलब्ध होंगी।
संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर धनंजय राठौर के अनुसार, देश के प्रमुख औद्योगिक और खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क का विस्तार अब राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की जरूरतों से जुड़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। छत्तीसगढ़ मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र है। ऐसे में मजबूत रेल नेटवर्क प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगा।
रेलवे के विकास से उद्योगों की परिवहन लागत कम होगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे तथा युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। प्रदेश में नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण तथा आधुनिक रेलवे सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिल रही है। यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा।
केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के रेलवे बजट का आवंटन बढ़ाकर 7,470 करोड़ रुपये कर दिया है, जबकि वर्ष 2009-14 के दौरान औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना आवंटित किए जाते थे। इस तरह वार्षिक औसत आवंटन में करीब 24 गुना वृद्धि हुई है।
इस निवेश का प्रमुख उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करना, खनिज और औद्योगिक माल की आवाजाही बढ़ाना तथा उन क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाना है, जहां अब तक कनेक्टिविटी सीमित रही है।
राष्ट्रीय माल ढुलाई को मिलेगा वैकल्पिक रेल मार्ग
छत्तीसगढ़ की रेल रणनीति में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। करीब 278 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में मंजूरी दी थी। उस समय इस परियोजना की लागत 8,741 करोड़ रुपये अनुमानित थी। बाद में इसमें संशोधन किया गया और इसकी अनुमानित लागत 7,854 करोड़ रुपये कर दी गई।
इस परियोजना का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों को बाईपास करते हुए मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल लाइन बिछाना है। इस कॉरिडोर से कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन का दबाव कम करने और बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध कराने की योजना है।
इससे कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों के लिए माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होने से औद्योगिक इकाइयों को बाजारों तथा बंदरगाहों तक अपने उत्पाद पहुंचाने में भी आसानी होगी।
बस्तर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
रेल नेटवर्क के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी है। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जिसकी लंबाई 140 किलोमीटर है, उसके लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है।
वहीं, किरंदुल-कोत्तागुडेम रेल लाइन, जिसकी लंबाई 180 किलोमीटर है, तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) की 490 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना का सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है।
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक 77 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इस रेलखंड पर यात्री रेल सेवा प्रारंभ होने से हजारों ग्रामीण पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़े हैं। परियोजना के अगले चरण में रावघाट तक रेल संपर्क विकसित करने का काम चल रहा है।
परियोजना पूरी होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़ जाएंगी। इससे उद्योगों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
वहीं, कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
कटघोरा से डोंगरगढ़ तक नए रेल संपर्क की योजना
प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन की लंबाई करीब 295 किलोमीटर है। यह रेल मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है।
इस परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना है। इसके लिए स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करने का प्रस्ताव है।
इस रेल लाइन का महत्व उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने में है, जहां वर्तमान में रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। इस परियोजना से यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही, संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के नए अवसरों के सृजन में भी मदद मिल सकती है।
उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए भी नई रेल परियोजनाएं
उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए भी कई नई रेल परियोजनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
इनमें सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर रेल कॉरिडोर, जिसकी लंबाई 244 किलोमीटर है, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल कॉरिडोर, जिसकी लंबाई 301 किलोमीटर है, तथा अंबिकापुर-बरवाडीह रेल कॉरिडोर, जिसकी लंबाई 200 किलोमीटर है, शामिल हैं।
इन परियोजनाओं को रेल मंत्रालय द्वारा शीघ्र मंजूरी दिए जाने की संभावना जताई गई है। अगस्त 2026 में इन प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लेने और सर्वेक्षण की प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया था।
इन रेल परियोजनाओं के विकसित होने से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी। इससे व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही, दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को आवागमन के बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे।
रेलवे स्टेशनों का हो रहा आधुनिकीकरण
छत्तीसगढ़ में नई रेल लाइनों के निर्माण के साथ-साथ मौजूदा रेल नेटवर्क और रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को करीब 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाना और स्टेशन परिसरों को अधिक व्यवस्थित करना है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है। इसका प्रत्यक्ष लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है।
अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चांपा, बालोद एवं सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण प्रदेश में रेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का सशक्त आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों के उन्नयन से व्यापार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। इससे लोगों के लिए आवागमन अधिक सुगम होगा और रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रेल नेटवर्क के विस्तार से विकास को मिलेगी नई दिशा
छत्तीसगढ़ में चल रही रेल परियोजनाएं प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, खनिज संसाधनों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। नई रेल लाइनों, रेल कॉरिडोर, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण से परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
रेल नेटवर्क का विस्तार होने से उद्योगों को माल परिवहन के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, किसानों को अपने उत्पाद बाजारों तक पहुंचाने में सहूलियत होगी और यात्रियों को सुरक्षित तथा सुविधाजनक यात्रा के विकल्प उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही, आदिवासी अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों को रेल संपर्क से जोड़ने पर वहां आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
इस प्रकार, छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का विस्तार केवल परिवहन सुविधाओं के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




