सारंगढ़-बिलाईगढ़ /सौ रुपए की बचत से लिखी सफलता की इबारत
छत्तीसगढ़ की अहिल्या निषाद बनीं ‘लखपति दीदी’, होटल चलाकर हर महीने कमा रही हैं 24 हजार रुपए
कहानी एक बदलाव की: संघर्ष से स्वावलंबन तक का सफर
रायपुर, 10 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ (अ) की रहने वाली श्रीमती अहिल्या निषाद ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से सफलता की एक नई इबारत लिखी है। कभी परिवार की सीमित आमदनी और आर्थिक तंगी के कारण घर का खर्च चलाना तथा बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना और स्वयं सहायता समूह के सहयोग से आज वे अपना होटल संचालित कर प्रतिमाह 15 हजार से 24 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
बिहान योजना और लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर बदली तकदीर
अहिल्या निषाद के जीवन में वास्तविक बदलाव 15 मार्च 2018 को आया, जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना के तहत लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से हर महीने मात्र 100 रुपए की बचत करना शुरू किया।
छोटी-छोटी बचत से शुरू हुई उनकी यह पहल धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय अनुशासन सीखने के साथ-साथ अपनी आजीविका शुरू करने का अवसर भी मिला।
समूह के सहयोग से अहिल्या निषाद ने बैंक से एक लाख रुपए का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने अपने गांव की मुख्य सड़क पर ‘निषाद होटल’ के नाम से नाश्ते की दुकान शुरू की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन से अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
पति के सहयोग और मेहनत से बढ़ा व्यवसाय
अहिल्या निषाद के इस सफर में उनके पति श्री किर्तीलाल निषाद ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। पति के सहयोग और अपनी अटूट मेहनत के बल पर उन्होंने होटल के व्यवसाय को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया।
आज उनके होटल से प्रतिदिन लगभग 500 से 800 रुपए तक की आमदनी हो रही है। इस तरह उनकी मासिक आय लगभग 15 हजार से 24 हजार रुपए तक पहुंच गई है। एक समय परिवार की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन आज वे अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
बच्चों की शिक्षा और परिवार के भविष्य को मिला सहारा
होटल से होने वाली नियमित आमदनी ने अहिल्या निषाद के परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है। अब वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अपने बच्चों की पढ़ाई और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी योगदान दे पा रही हैं।
उनकी सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने के साथ-साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
आज अहिल्या निषाद अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। अपनी मेहनत, बचत की आदत और स्वरोजगार के माध्यम से उन्होंने ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान हासिल की है।
बिहान योजना के प्रति जताया आभार
अपनी सफलता से खुश श्रीमती अहिल्या निषाद बिहान योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि वे इस योजना को दिल से धन्यवाद देती हैं। इसी योजना और स्वयं सहायता समूह से मिले सहयोग की बदौलत आज वे आत्मनिर्भर बन पाई हैं और अपने परिवार को बेहतर जीवन देने में सक्षम हुई हैं।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल बनीं अहिल्या
अहिल्या निषाद की यह प्रेरक कहानी ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति और बिहान योजना के माध्यम से आजीविका संवर्धन की सफलता का जीवंत प्रमाण है।
महज 100 रुपए की मासिक बचत से शुरू हुआ उनका सफर आज एक सफल व्यवसाय और नियमित आमदनी तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी बताती है कि छोटी-सी बचत, सही मार्गदर्शन, बैंक ऋण का उपयोग और निरंतर मेहनत जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
अहिल्या निषाद की सफलता न केवल उनके परिवार के लिए खुशहाली लेकर आई है, बल्कि क्षेत्र की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।



