झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। इसमें कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। करीब 13 साल चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज दर्ज किए गए। जज ने अपने फैसले में कहा है कि आदेश की पुष्टि हाईकोर्ट करेगा। 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दलील में सजा कम करने की मांग की थी।
प्रमिला मोडियम – मिलिट्री कंपनी नंबर-2 के कैडरों के साथ झीरम पहुंची और हमले में शामिल हुई। घायलों पर हमला करने और हथियार लूटने का भी आरोप । चैतू लेकाम – PLGA का सेक्शन कमांडर। पिड़िया से झीरम पहुंचा और हमले में शामिल हुआ। FSL और अन्य सबूतों से बरामद विस्फोटकों का हमले से संबंध मिला। सुमित्रा पुनेम मोडियम – अन्य कैडरों के साथ झीरम पहुंची और हमले में शामिल हुई। मुक्का मंडावी – हथियार के साथ हमले में शामिल हुआ और पुलिसकर्मियों के हथियार लूटे। बरामद विस्फोटक घटनास्थल से मिले सामान से मेल खाए। कवासी कोसा – झीरम हमले में शामिल हुआ और पुलिसकर्मियों के हथियार लूटे। आयता मरकाम – कोलेंग और कंडानार से चावल व अन्य लॉजिस्टिक सामग्री जुटाई और उसे झीरम पहुंचाने की व्यवस्था की।
मड़कामी देवा – दरभा डिवीजन कमेटी का सदस्य। हमले के लिए लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने में भी। जोगा मड़कम – झीरम हमले में शामिल हुआ और पुलिसकर्मियों के हथियार लूटे। बंजामी सन्ना – दरभा डिवीजन कमेटी की सदस्य। हमले के लिए चावल और अन्य लॉजिस्टिक सामग्री जुटाई। फंड के लिए वसूली करने का भी आरोप । महादेव नाग – धारा 164 CRPC के तहत दर्ज बयान में घटनास्थल पर मौजूदगी और हमले में उसकी भूमिका का उल्लेख है।



