पिथोरा ओडिसा सारंगढ़/ 120 करोड़ की खैर लकड़ी तस्करी का खुलासा, माफिया मनीष अग्रवाल के मामले में खुलासा हिमाचल प्रदेश सहित 8 शेल कंपनियां और 10 से ज्यादा म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल 2 गिरफ्तार
फर्जी इनवॉयस से अवैध कारोबार को कागजों में वैध दिखाने की कोशिश, मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने से 81 लाख रुपये जब्त; उड़ीसा से दो फर्म संचालक गिरफ्तार महासमुंद, 15 सितंबर 2026। खैर लकड़ी तस्करी के एक बड़े संगठित गिरोह पर महासमुंद पुलिस ने शिकंजा कसते हुए बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस की तकनीकी विवेचना में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के सिंडीकेट द्वारा पिछले दो साल के भीतर उड़ीसा से लेकर हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की तस्करी किए जाने के प्रमाण मिले हैं। इस गैरकानूनी कारोबार को कागजों में वैध दिखाने के लिए कुल 8 शेल कंपनियों का उपयोग कर फर्जी इनवॉयसिंग तैयार की जाती थी। वहीं अवैध कारोबार से मिलने वाली भारी-भरकम रकम के लेनदेन, भुगतान और लेयरिंग के लिए 10 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किए जाने का खुलासा हुआ है।
जिला पुलिस महासमुंद द्वारा अवैध गतिविधियों, वनोपज के अवैध परिवहन और धोखाधड़ी करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के आवेदन पर खैर लकड़ी कुल 23,350 किलोग्राम के अवैध परिवहन के लिए प्रयुक्त एनटीपीएस (NTPS) एनओसी (NOC) में शातिर तरीके से कूटरचना कर उसका असल रूप में उपयोग करने तथा शासन को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाने के मामले में थाना पिथौरा में अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया गया है।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2), 3(5), 111, आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 42(1), सहपठित धारा 41(2) (ख) (घ) एवं धारा 52(1) के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध लगातार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
प्रकरण की विवेचना के दौरान महासमुंद पुलिस ने विगत 7 सितंबर को मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने की तलाशी लेकर 81 लाख रुपये जब्त किए थे। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी विवेचना के माध्यम से मामले की कड़ियों को आपस में जोड़ना शुरू किया। जांच में यह मामला एक विशाल अंतरराज्यीय एवं संगठित गिरोह के रूप में सामने आया। पुलिस के अनुसार, आरोपी मनीष अग्रवाल और उसके संगठित गिरोह द्वारा पिछले दो वर्षों के भीतर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उड़ीसा से लेकर हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की अवैध तस्करी की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि अवैध कारोबार को कागजों में वैध रूप देने के शातिर उद्देश्य से फेक इनवॉयसिंग के लिए 8 शेल कंपनियां बनाई गई थीं। इसके अलावा अवैध टर्नओवर से प्राप्त भारी-भरकम रकम के लेनदेन, भुगतान और उसकी लेयरिंग के लिए 10 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों का अवैध रूप से उपयोग किया जा रहा था। पुख्ता तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महासमुंद पुलिस ने उड़ीसा से इन फर्जी कंपनियों का संचालन करने वाले तथा इस नेटवर्क को फेक इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो आरोपियों को 14 सितंबर 2026 को विधिवत गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
01. पारितोष मिश्रा, पिता श्री सुरेंद्र मिश्रा, उम्र 47 वर्ष, संचालक पीयूष इंटरप्राइजेज, वर्तमान पता—क्र. 4, प्लाट नंबर 373, रफाजाल, सालेभाटा, बोलांगीर, जिला बोलांगीर (उड़ीसा)।
02. अखिलेश सिंघल, पिता स्व. चंद्रप्रकाश सिंघल, उम्र 52 वर्ष, संचालक सिंघल इंटरप्राइजेज संबलपुर, निवासी—फार्म रोड, दिल्ली शॉ मिल के पास, बड़ाबाजार दुर्गा मंदिर के पास संबलपुर, थाना संबलपुर, जिला संबलपुर (उड़ीसा)।
महासमुंद पुलिस के अनुसार, प्रकरण में संलिप्त अन्य सह-आरोपियों की धरपकड़, वित्तीय ट्रेल की गहन जांच और साक्ष्य संकलन के लिए पुलिस पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रही है। वहीं महासमुंद पुलिस, वन विभाग और वित्तीय एजेंसियों के समन्वय से इस संगठित गिरोह द्वारा अर्जित की गई अवैध संपत्तियों की कुर्की/राजसात की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी है



