सरायपाली 40 दिवसीय गायत्री मंत्र जप अनुष्ठान की 5 कुंडीय यज्ञ के साथ पूर्णाहुति
92 साधकों ने मिलकर किया 1 करोड़ 5 लाख 80 हजार गायत्री महामंत्र का जप
सरायपाली। गायत्री शक्ति पीठ सरायपाली में श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में 40 दिवसीय गायत्री महामंत्र जप अनुष्ठान की भावपूर्ण पूर्णाहुति 5 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के साथ सम्पन्न हुई। अनुष्ठान में सरायपाली क्षेत्र के 92 गायत्री परिवार के भाई-बहनों ने सहभागी बनकर कुल 1 करोड़ 5 लाख 80 हजार गायत्री महामंत्र जप का संकल्प पूर्ण किया।
यह 40 दिवसीय साधना केवल मंत्र जप तक सीमित नहीं रही, बल्कि आत्मसंयम, अनुशासन, साधना और आत्मशुद्धि का प्रेरणादायी आध्यात्मिक अभियान बनी। सभी साधकों ने पूरे 40 दिनों तक प्रतिदिन 30 मिनट ध्यान तथा 30 माला गायत्री महामंत्र का जप करते हुए नियमित साधना की। सरायपाली क्षेत्र के अखिल विश्व गायत्री परिवार के सदस्यों एवं साधकों द्वारा आयोजित यह 40 दिवसीय जप अनुष्ठान लगातार 20वें वर्ष आयोजित किया गया।
तप, त्याग और अनुशासन के साथ साधना
अनुष्ठान के दौरान साधकों ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न प्रकार के संयम का पालन किया। कुछ साधकों ने बिना नमक का भोजन ग्रहण किया, तो कुछ ने शक्कर एवं मीठे पदार्थों का त्याग किया। वहीं अनेक साधकों ने एक समय भोजन करते हुए अपनी साधना को पूर्ण किया। तप, त्याग और अनुशासन के साथ की गई इस साधना से साधकों में आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ।
जप पूर्णाहुति के अवसर पर साधकों ने 108 गायत्री महामंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की आहुतियां यज्ञ में अर्पित कीं। इस 40 दिवसीय संकल्प साधना को परम वंदनीया भगवती देवी शर्मा जी तथा अखंड दीप के शताब्दी समारोह को समर्पित किया गया।
समाज एवं राष्ट्र कल्याण का लिया संकल्प
पूर्णाहुति के अवसर पर साधकों ने परम पूज्य गुरुदेव एवं मां गायत्री के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए प्रार्थना की कि साधना से प्राप्त आध्यात्मिक ऊर्जा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण में हो। साधकों ने मां गायत्री से जीवन में शांति, सद्बुद्धि, आत्मबल, संयम एवं सकारात्मक चिंतन के विकास की कामना की।
गायत्री परिवार का मूल उद्देश्य केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण के माध्यम से श्रेष्ठ एवं संस्कारवान समाज की स्थापना करना है। इसी भावना के साथ 40 दिवसीय अनुष्ठान को पूर्ण किया गया।
इस अवसर पर साधकों ने संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में सदाचार, सेवा, संयम, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को और अधिक मजबूती से अपनाएंगे तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य करेंगे।
गायत्री महामंत्र की साधना से जागृत आध्यात्मिक ऊर्जा प्रत्येक साधक के जीवन में निरंतर प्रकाश बनकर रहे तथा सरायपाली सहित पूरे समाज में सेवा, संस्कार और सद्भाव की नई ज्योति प्रज्वलित हो—इसी मंगल भावना के साथ अनुष्ठान की पूर्णाहुति सम्पन्न हुई।



