
सरायपाली: ATS सेंटर की उड़ रही धज्जियां; RTO एजेंटों की ‘मनमानी’, बिना गाड़ी और फिजिकल वेरिफिकेशन के ही बंट रहे फिटनेस सर्टिफिकेट ?
सरायपाली (महासमुंद)। परिवहन विभाग द्वारा सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) व्यवस्था सरायपाली में मजाक बनकर रह गई है। सरायपाली और आसपास के क्षेत्रों में आरटीओ (RTO) एजेंटों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि नियमों को ताक पर रखकर बिना फिजिकल वेरिफिकेशन और बिना गाड़ी को एटीएस (ATS) सेंटर ले जाए ही फिटनेस सर्टिफिकेट बांटे जा रहे हैं।
डिजिटल इंडिया और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने का दावा करने वाले इस सिस्टम में कुछ दलालों और एजेंटों ने सेंध लगा दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एजेंट मोटी रकम लेकर घर बैठे ही अनफिट और कंडम वाहनों को भी ‘फिट’ घोषित कर रहे हैं।
नियमों का खुला उल्लंघन: तकनीक को भी दे रहे चकमा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नियमों के मुताबिक, कमर्शियल और अन्य भारी वाहनों का सस्पेंशन, ब्रेक, प्रदूषण, हेडलाइट और स्पीड आदि की जांच आधुनिक मशीनों से बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ATS सेंटर पर होना अनिवार्य है। इसके बाद सिस्टम से ऑनलाइन रिपोर्ट ऑटोमेटिक जनरेट होती है। लेकिन सरायपाली क्षेत्र में एजेंटों की सेटिंग के खेल ने इस पूरी पारदर्शी व्यवस्था को खोखला कर दिया है। वाहन को सेंटर पर लाए बिना और बिना किसी भौतिक निरीक्षण (Physical Verification) के फिटनेस रिपोर्ट पास की जा रही है।
सड़कों पर दौड़ रहे ‘यमदूत’, हादसे बढ़ने का खतरा बिना जांच के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने का यह खेल सीधे तौर पर आम जनता की जान से खिलवाड़ है। अगर अनफिट बसें, ट्रक या अन्य कमर्शियल वाहन बिना मैकेनिकल जांच के सड़कों पर दौड़ेंगे, तो कभी भी भीषण सड़क हादसे हो सकते हैं। सरायपाली में हो रहे इस फर्जीवाड़े ने परिवहन विभाग की सुस्ती और मॉनिटरिंग सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच और FIR की उठ रही मांग देश के कई राज्यों में ऐसे फर्जी फिटनेस सेंटरों और सेंटरों पर गाड़ियां न ले जाने वाले दलालों के खिलाफ परिवहन विभाग सख्त कार्रवाई और FIR दर्ज करा रहा है। सरायपाली के स्थानीय नागरिकों और जागरूक वाहन स्वामियों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए, सीसीटीवी फुटेज और ऑनलाइन लॉग्स खंगाले जाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
परिवहन विभाग के आला अधिकारियों को इस ‘फिटनेस घोटाले’ पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए, वरना सरायपाली की सड़कों पर बिना जांच के पास हुए यह वाहन किसी बड़ी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं।




