सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात, रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था व कुम्हारी टोल प्लाज़ा पर रखीं अहम माँगें

 

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से की मुलाकात, रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था व कुम्हारी टोल प्लाज़ा पर रखीं अहम माँगें

नई दिल्ली, 30 जुलाई 2025 — रायपुर के सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी से नई दिल्ली में सौजन्य मुलाकात कर राजधानी रायपुर की अधोसंरचना और यातायात व्यवस्था से जुड़ी कई ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा की।

मुलाकात के दौरान श्री अग्रवाल ने निम्नलिखित प्रमुख माँगें रखीं:

🔹 कुम्हारी टोल प्लाज़ा को तत्काल बंद किया जाए, क्योंकि इसकी संचालन अवधि समाप्त हो चुकी है, फिर भी यह वर्षों से अवैध रूप से चल रहा है, जिससे आम जनता को आर्थिक और मानसिक परेशानियाँ हो रही हैं।

🔹 रिंग रोड नं. 01 (NH-53) के सर्विस रोड को 5 मीटर से बढ़ाकर 11 मीटर करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि रायपुर शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में ट्रैफिक जाम से निजात मिल सके।

🔹 रायपुर में प्रस्तावित तीन फ्लाईओवरों के अलावा तेलीबांधा से ज़ोरा तक चौथे फ्लाईओवर के निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित किया गया, जिससे शहर में तेज़ और सुगम यातायात सुनिश्चित हो सके।

🔹 एनएच-30 पर स्थित शदानी दरबार व कमल विहार चौक में ग्रेड सेपरेटर निर्माण और एनएच-30 एक्सप्रेस वे को NHAI के अधीन लाने की माँग रखी गई।

🔹 भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-विशाखापट्टनम हाईवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में हो रही देरी पर चिंता जताई गई और इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जाँच की माँग की गई।

इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक और नागरिक सुविधाओं के अनुकूल बनाना मेरी प्राथमिकता है। मुझे विश्वास है कि नितिन गडकरी जी इन जनहितकारी प्रस्तावों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेंगे।”

इस मुलाकात को रायपुर की विकास योजनाओं को गति देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

महासमुंद में ‘आओ सखी सावन में’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन, महिलाओं ने पारंपरिक परिधान में दिखाया उत्साह छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग सदस्य सरला कोसरिया रहीं मुख्य अतिथि

महासमुंद में ‘आओ सखी सावन में’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन, महिलाओं ने पारंपरिक परिधान में दिखाया उत्साह
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग सदस्य सरला कोसरिया रहीं मुख्य अतिथि

महासमुंद, 30 जुलाई 2025 – नगर पालिका टाउन हॉल महासमुंद में बुधवार को “आओ सखी सावन में” कार्यक्रम का रंगारंग और भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “अपराजिता क्लब महासमुंद” एवं “द एसोसिएशन ऑफ WE क्लब्स ऑफ इंडिया” के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में नगर की सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर उत्साहपूर्वक भाग लिया और सावन के इस पर्व को संस्कृति और सजीवता से सराबोर कर दिया।

इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं गायत्री परिवार की समाजसेवी सरला कोसरिया रहीं। उन्होंने महिलाओं को सावन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि, “इस तरह के आयोजनों से हमारी परंपरा और लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायता मिलती है और महिलाओं को आत्मबल और सहभागिता का अनुभव होता है।”

कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने झूला झूलने, लोकगीत गाने, पारंपरिक नृत्य और खेलकूद जैसी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। विशेष रूप से आदिवासी परिधानों में सजी महिलाओं की प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

“WE क्लब्स ऑफ इंडिया” की महिलाओं ने इस अवसर पर सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने वाले संदेश भी दिए। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

पूरा आयोजन महिला सशक्तिकरण, संस्कृति संरक्षण और आपसी सौहार्द का प्रतीक बनकर उभरा।

महासमुंद/शिक्षा स्थायी समिति की समीक्षा बैठक सम्पन्न

महासमुंद/शिक्षा स्थायी समिति की समीक्षा बैठक सम्पन्न

महासमुंद,/ जिला पंचायत महासमुंद के सभापति एवं शिक्षा स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में आज स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में श्री ठाकुर ने कहा कि सभी बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु जनप्रतिनिधियों, पालकों एवं शिक्षकों को सामूहिक रूप से कार्य करना होगा। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पुरानी और आधुनिक तकनीकी का समन्वय कर नवाचार अपनाना आवश्यक है।

बैठक में शिक्षा समिति की सदस्य श्रीमती देवकी पुरुषोत्तम दीवान एवं श्रीमती सीमा लोकेश नायक विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

ज्वाइन डायरेक्टर रायपुर श्री संजीव श्रीवास्तव ने भी बैठक में शिरकत की और पुस्तक वितरण की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी बच्चों को शत-प्रतिशत पुस्तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार लहरे ने वर्ष 2025-26 के अंतर्गत पुस्तक वितरण, गणवेश वितरण, सरस्वती साइकिल योजना, मध्यान्ह भोजन, किचन गार्डन, जर्जर भवनों की मरम्मत एवं मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक स्कूल का व्यक्तिगत मूल्यांकन करते हुए सभी प्राचार्य और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

श्री लहरे ने यह भी निर्देशित किया कि अति जर्जर भवनों में कक्षा संचालन तत्काल बंद किया जाए तथा मरम्मत हेतु शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने अपार आईडी से संबंधित अद्यतन स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी के सभी विद्यार्थियों का आधार अपडेट कराना सुनिश्चित किया जाए, जिससे अपार आईडी जनरेट कर आगे की प्रक्रिया की जा सके।

मिशन लाइफ के तहत “एक पेड़ मां के नाम” योजना में एंट्री बढ़ाने हेतु भी प्राचार्य और अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक को डीएमसी श्री रेखराज शर्मा ने भी संबोधित किया एवं मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित सोशल ऑडिट और विद्यालयों की मानिटरिंग व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की बात कही। उन्होंने समय-सारणी, पाठ्यक्रम एवं विद्यार्थी विकास सूचकांक पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में सहायक संचालक श्री सतीश नायर, श्री नंदकिशोर सिन्हा, डीपीओ श्री कमल नारायण चन्द्राकर, खेल अधिकारी श्रीमती अंजली बरमाल, समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बीआरसीसी एवं हाई स्कूल/हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यगण उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ : राज्यपाल के रूप में श्री रमेन डेका के कार्यकाल को एक वर्ष पूर्ण हुए’ राज्यपाल ने सभी जिलों का किया दौरा

छत्तीसगढ़ : राज्यपाल के रूप में श्री रमेन डेका के कार्यकाल को एक वर्ष पूर्ण हुए’ राज्यपाल ने सभी जिलों का किया दौरा

राज्यपाल श्री रमेन डेका का छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के रूप में  एक वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो गया। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया है। वे प्रदेश के जनजातीय समुदायों, महिलाओं, बुजुर्गाे, युवाओं, माताओं, बच्चों, दिव्यांगों सहित सभी वर्गाे की बेहतरी और कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। छत्तीसगढ़ वासियों का अत्यंत सरल, सहज व्यवहार उन्हें प्रेरणा देता हैै। वे जितने सरल और सहज हैं उतने ही जनता से जुड़े हुए भी हैं। छत्तीसगढ़ की संस्कृति एवं परंपराएं उन्हें उनके गृह प्रदेश असम की याद दिलाती है और वे इसे लेकर गर्व महसूस करते है।

श्री डेका ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के रूप में केवल औपचारिक भूमिकाओं तक सीमित न रहकर, राज्य के हर जिले में जाकर वहां की धरातलीय परिस्थितियों को स्वयं देखा, सुना और समझा। प्रदेश के सभी 33 जिलों का दौरा उन्होंने कर लिया है। गांव, कस्बे में जाकर लोगांे से सीधे बात की खास कर उन लोगों से जो सरकार की योजनाओं से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि योजनाएं सिर्फ कागजों पर है या लोगांे के जीवन में असर कर रही है। उन्होंने महिला समूहों लखपति दीदियों, विद्यार्थियों, किसानों से बात-चीत की और उन्हें प्रेरणा देने के साथ-साथ उनकी समस्याओें का समाधान भी सुझाया।

राज्यपाल श्री डेका की प्राथमिकता रही है कि यह पता लगाया जाए कि सरकारी योजनाएं जरूरतमंद तक पहुंच रही या नहीं। वे खुद प्रधानमंत्री आवास योजना से बने घरों में गए, हितग्राहियों से बातचीत की, टी.बी. मरीजों को फुड बास्केट प्रदान किया। स्व-सहायता समूह की महिलाओं के कार्याे को देखा और उनकी सराहना की।

प्रधानमंत्री टी.बी. मुक्त भारत अभियान के तहत देश एवं प्रदेश को टी.बी. मुक्त करने के लक्ष्य की दिशा में राज्यपाल का विशेष ध्यान है। वे  टी.बी. मरीजों को गोद लेकर उन्हें आर्थिक सहायता और पौष्टिक आहार दे रहे हैं और समाज के लोगों को इस पुनित कार्य में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं।

राज्यपाल श्री डेका जहां भी गये ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधे लगाकर यह संदेश दिया कि पेड़ लगाना केवल पर्यावरण नहीं, भावना से जुड़ा कर्तव्य है। उन्होंने जल संरक्षण, भू-जल स्तर बढ़ाने, अमृत सरोवर योजना के क्रियान्वयन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक किया और इन्हें जन आंदोलन का रूप देने की कोशिश की।

श्री डेका का कहना है कि चाहे टी.बी. उन्मूलन हो, नशा मुक्ति, स्वच्छता या सड़क सुरक्षा, सभी अभियानों की सफलता तभी संभव है जब समाज इसकी जिम्मेदारी ले। उनका यह प्रयास है कि सरकारी योजनाएं केवल शासन की न रहें, जनता की बनें।

बतौर कुलाधिपति राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह आयोजित करने पर जोर दिया, जिससे विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ता है और वे आत्मऩिर्भरता की राह पर आगे बढ़ते हैं। विगत एक वर्ष में राज्यपाल 4 शासकीय एवं 5 निजी विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उनका कहना है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालयों की भी बड़ी भूमिका है। उनके द्वारा 5 शासकीय और 6 निजी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियां की गई। उन्होंने दो बार राज्य के विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठकें ली और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने पर  विशेष बल दिया। राज्यपाल के एक वर्ष के कार्यकाल में शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित 100 अध्यादेशों एवं नियुक्तियों का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष पद पर प्रो. विजय कुमार गोयल की नियुक्ति की गई।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय अधिनियम में उनके द्वारा संशोधन कराया गया। प्रधानमंत्री के विकसित भारत एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रदेश के विश्वविद्यालयों में सफल क्रियान्वयन के लिए उन्होंने विश्वविद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। सहायक प्राध्यापकों को समय पर प्रमोशन देने पर बल दिया ताकि प्रोफेसर पद पर 10 साल का अनुभव होने के बाद छत्तीसगढ़ के प्रोफेसरों को कुलपति बनने का भी अवसर मिले। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने तथा शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राध्यापकों और छात्रों के बीच बेहतर तालमेल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर बल दिया।

अपने एक वर्ष के कार्यकाल में राज्यपाल श्री डेका ने कई अभिनव पहल किए। राज्य के तीन गांवों को गोद लेकर उन गांवों में केन्द्र और राज्य सरकार की विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। उनके द्वारा गोद लिए गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा,  कृषि, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, विरासत एवं संस्कृति के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में शोध एवं अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए श्री डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में श्रीमंत शंकर देव अनुसंधान पीठ की स्थापना की गई है। इसके अलावा राज्यपाल श्री डेका के निर्देश पर सभी स्वशासी महाविद्यालयों में परीक्षा नियंत्रक के पद भी प्रस्तावित किए गए हैं।

श्री डेका ने रेडक्रॉस सोसायटी को एक सशक्त और पारदर्शी संस्था बनाने का संकल्प लिया। उनकी प्रेरणादायी पहल पर पहली बार छत्तीसगढ़ रेडक्रॉस सोसायटी के पदाधिकारियों का चुनाव सम्पन्न हुआ। इससे रेडक्रॉस को जन-जन तक पहंुचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। उनकी पहल पर पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती पर राजभवन में रक्त दान शिविर एवं स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। टी.बी. रोग के प्रति जागरूकता फैलाने की उद्देश्य से स्क्रीनिंग कैम्प भी लगाया गया।

श्री डेका के पहल पर 10 वीं एवं 12 वीं बोर्ड परीक्षाओं में सर्वाेच्च अंक लेकर प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को राजभवन की ओर से पांच-पांच हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गईं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर शुरू हुए एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत देश के अलग-अलग राज्यों का स्थापना दिवस राज्यपाल श्री डेका के मार्गदर्शन में राजभवन में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया इससे देश की एकता, अखण्डता, विविधता और भाईचारे का संदेश मजबूत हुआ।

राज्यपाल श्री डेका ने एक वर्ष में अपने स्वेच्छानुदान मद से 584 संस्थाओं को 1 करोड़ 22 लाख 41 हजार रूपये से अधिक की राशि आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की।

राज्यपाल श्री डेका की हर एक पहल का उद्देश्य यह रहा कि शासकीय योजनाएं शासन की नहीं बल्कि जनता के लिए हितग्राही बनें। अपने इस एक वर्ष के कार्यकाल को वे संतुष्टिपूर्ण मानते हैं और सतत सक्रिय रहते हुए सदैव जनता के हित के लिए लोककल्याणकारी कार्य करना चाहते हैं।

 

रायपुर : छत्तीसगढ़ के किसानों, उद्यमियों और निर्यातकों को अब मिलेगा वैश्विक बाजार का सीधा लाभ रायपुर में खुलेगा APEDA का क्षेत्रीय कार्यालय

रायपुर : छत्तीसगढ़ के किसानों, उद्यमियों और निर्यातकों को अब मिलेगा वैश्विक बाजार का सीधा लाभ रायपुर में खुलेगा APEDA का क्षेत्रीय कार्यालय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से कृषि निर्यात को मिलेगा नया प्रोत्साहन, राज्य बनेगा एक्सपोर्ट हब

रायपुर,कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात को प्रोत्साहन देने की दिशा में छत्तीसगढ़ को एक बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों एवं उद्योग विभाग की सक्रिय पहल के फलस्वरूप भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने रायपुर में APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की स्वीकृति प्रदान की है।

इस क्षेत्रीय कार्यालय के प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ के किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों को अनेक लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। अब उन्हें ट्रेनिंग, प्रमाणन, पैकेजिंग, मानकीकरण और निर्यात संबंधी सेवाओं के लिए अन्य राज्यों के कार्यालयों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

स्थानीय स्तर पर मिलेगी वैश्विक गुणवत्ता की सुविधा

राज्य में APEDA  कार्यालय की स्थापना से अब फाइटो-सेनेटरी प्रमाणपत्र, गुणवत्ता प्रमाणन, लैब टेस्टिंग, और निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाएं यहीं पूरी की जा सकेंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि किसानों और निर्यातकों की लागत में भी कमी आएगी।

छत्तीसगढ़ के उत्पादों को मिलेगी ब्रांडिंग और वैश्विक पहचान

APEDA  कार्यालय से फल, सब्ज़ियाँ, चावल, GI टैग वाले उत्पाद, मिलेट्स और अन्य कृषि उत्पादों का सीधे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में निर्यात आसान होगा। इससे उत्पादों को उचित दाम, व्यापारियों को नए बाज़ार, और राज्य को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।

किसानों की आय और ज्ञान दोनों में वृद्धि

निर्यात से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, नई तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग की जानकारी और प्रशिक्षण उन्हें स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा।

निर्यात बुनियादी ढांचे को मिलेगा प्रोत्साहन

APEDA न केवल प्रमाणन और ब्रांड प्रमोशन में सहयोग करता है, बल्कि निर्यात बुनियादी ढांचे के निर्माण और रख-रखाव में भी सहायता करता है। इससे राज्य में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस जैसे सुविधाओं का विकास होगा, जिससे कृषि व्यापार को नई गति मिलेगी।

विशेष योजनाएं और सब्सिडी का लाभ राज्य को मिलेगा

APEDA  द्वारा चलाए जा रहे एक्सपोर्ट प्रमोशन, स्किल डेवलपमेंट और सब्सिडी योजनाओं का लाभ अब छत्तीसगढ़ के किसान, स्टार्टअप और MSMEs को सहजता से मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस ऐतिहासिक पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों और उत्पादकों को अब वैश्विक बाजार से जोड़ने का मजबूत माध्यम मिल गया है। यह कार्यालय न केवल कृषि निर्यात को प्रोत्साहन देगा, बल्कि राज्य की आर्थिक समृद्धि की दिशा में भी एक निर्णायक कदम सिद्ध होगा। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को ‘वोकल फॉर लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में एक अग्रणी राज्य बनाएगी और समृद्ध कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोलेगी।

 

महासमुंद/बाल श्रम के विरुद्ध जिले में श्रम विभाग की पहल ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से बाल श्रम निषेध संबंधी कानूनों दी जा रही जानकारी

महासमुंद/बाल श्रम के विरुद्ध जिले में श्रम विभाग की पहल ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से बाल श्रम निषेध संबंधी कानूनों दी जा रही जानकारी

महासमुंद, छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा बाल श्रम के उन्मूलन हेतु व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिले में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आमजन को बाल श्रम निषेध संबंधी कानूनों की जानकारी दी जा रही है। इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नियोजन को पूर्णतः रोकना और 14 से 18 वर्ष की उम्र के किशोरों को खतरनाक क्षेत्र में कार्यों से दूर रखना है।

श्रम पदाधिकारी श्री डी. एन पात्र ने बताया कि बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का किसी भी प्रकार के कार्य में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष के किशोरों का 107 अधिसूचित कार्यों एवं स्थलों में नियोजन गैरकानूनी है। इनमें मुख्य रूप से कारखाना, होटल, ढाबा एवं रेस्टोरेंट, घरेलू कार्य, ईंट भट्ठा, खपरेल निर्माण, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, गैरेज, भवन एवं अन्य निर्माण कार्य, विस्फोटक पदार्थ, पटाखा निर्माण/बिक्री, बीड़ी-तंबाकू उद्योग, अगरबत्ती निर्माण, कृषि कार्य जिसमें मशीनों का उपयोग हो, खाद्य सामग्री निर्माण, पत्थर खदान, कोयला खदान (भूमिगत/जलमग्न) आदि कार्य शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति अथवा संस्थान उपरोक्त नियमों का उल्लंघन करते हुए बालक अथवा किशोर को कार्यरत पाता है, तो उसे न्यूनतम 06 माह से 02 वर्ष तक के कारावास या 20 हजार से 50 हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। साथ ही अधिनियम के तहत प्रत्येक संस्थान में बाल श्रम निषेध सूचना को प्रदर्शित करना अनिवार्य है। श्रम विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी स्थान पर बाल श्रमिक कार्यरत दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल श्रम विभाग के टोल फ्री नम्बर 1800-233-2197 पर दर्ज कराएं, जिससे बच्चों को उनके अधिकार और सुरक्षित भविष्य मिल सके।

 

महासमुंद/संकल्प से सफलता तक : महिला समूह ने बदली परिवार की जीवन की दिशा

महासमुंद/संकल्प से सफलता तक : महिला समूह ने बदली परिवार की जीवन की दिशा

महासमुंद / जिला मुख्यालय महासमुंद के वार्ड क्रमांक 11 की रहने वाली एक साधारण लेकिन संकल्पित महिला ने दिखाया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो और अवसर का सही उपयोग किया जाए, तो कोई भी परिवार आत्मनिर्भर बन सकता है।

राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की सीओ श्रीमती प्रेमशीला ने बताया कि गरीब परिवारों की 10 महिलाओं का यह स्वयं सहायता समूह छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहा था। शासन की योजनाओं के तहत इन्हें बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण दिलवाया गया ताकि वे अपने व्यवसाय को सशक्त बना सकें। इन्हीं में से एक महिला सदस्य श्रीमती गंगा बाई निर्मलकर ने यह ऋण लेकर अपने परिवार की स्थिति बदलने का प्रयास किया।

उनके पति श्री दूजराम निर्मलकर मूलतः ड्राई क्लीनर का कार्य करते थे। और वो खुद अपने पति का हाथ बटाती थी। उनके पति पुराने टू-व्हीलर से वे घर-घर जाकर कपड़े एकत्र करते थे, जो बरसात और धूल के कारण खराब हो जाते थे। इससे उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और ग्राहक भी असंतुष्ट रहते थे। इस स्थिति को बदलने के लिए उनकी पत्नी श्रीमती गंगा बाई निर्मलकर ने महिला समूह के माध्यम से बैंक से मिले ऋण का उपयोग कर एक इलेक्ट्रॉनिक ई-रिक्शा खरीदा और घर-घर जाकर प्रेस के कपड़े उसी ई-रिक्शा से एकत्र करने लगे। जिससे न सिर्फ कपड़ों की सुरक्षा होती है बल्कि कार्यक्षमता भी बढ़ी है। ई-रिक्शा से समय बचने पर श्री दूजराम स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने, शिक्षकों को पहुंचाने जैसे सवारी कार्य भी करने लगे हैं, जिससे उनकी आय में इज़ाफा हुआ है। आज वे हर महीने 5 से 6 हजार रुपए तक की आय कर लेते हैं। वहीं, उनकी पत्नी प्रेस और ड्रायक्लीन के काम से 7-8 हजार रुपए तक कमा रही हैं। इस दंपति ने मिलकर यह सिद्ध किया है कि सही मार्गदर्शन, समूह की शक्ति और शासन की योजनाओं का लाभ लेकर एक गरीब परिवार भी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकता है। वे न केवल अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

समूह के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, स्वास्थ्य बीमा, अटल पेंशन योजना जैसी योजनाओं का भी लाभ मिला है। नियमित बचत, समय पर लोन की वापसी, बैंक से संवाद, और अन्य वित्तीय गतिविधियों में अब वे कुशल हो चुके हैं। दूजराम निर्मलकर का कहना है कि आज मेरी पत्नी ने महिला समूह से जुड़कर बैंक से ऋण लिया और हमारे परिवार की स्थिति को सशक्त किया। हर महिला ऐसा ही प्रयास करे, समूह से जुड़ें, और अपने जीवन में परिवर्तन लाएं यही सच्ची आत्मनिर्भरता है।

छत्तीसगढ़: पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में बड़ा एक्शन, PWD के 5 अधिकारी गिरफ्तार, पूछताछ जारी

छत्तीसगढ़: पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में बड़ा एक्शन, PWD के 5 अधिकारी गिरफ्तार, पूछताछ जारी

छत्तीसगढ़ बीजापुर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को जांच कर रही टीम ने बड़ा एक्शन लेते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार गए अधिकारियों में दो रिटायर्ड कार्यपालन अभियंता (EE), एक वर्तमान EE, एक SDO और एक सब-इंजीनियर शामिल हैं। सभी को दो दिन की न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है और पूछताछ जारी है।

आज गिरफ्तार :-

1. डी.आर. साहू (सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता)

2. वी.के. चौहान (सेवानिवृत्त कार्यपालन अभियंता)

3. एच.एन. पात्र – तत्कालीन कार्यपालन अभियंता

4. प्रमोद सिंह कंवर – SDO बीजापुर

5. संतोष दास – उप अभियंता, जगदलपुर

रिमांड पर :

1. सुरेश चंद्राकर

अग्रिम जमानत पर :

1. बी. एल ध्रुव – तत्कालीन कार्यपालन अभियंता

2. आर.के. सिन्हा – SDO

3. जी.एस. कोडोपी – उप अभियंता

बंद पड़े सेप्टिक टैंक से मिली थी लाश:

1 जनवरी 2025 को मुकेश चंद्राकर अपने घर से निकले और फिर वापस नहीं लौटे। 3 जनवरी को उनकी लाश एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक से बरामद हुई। इस जघन्य हत्याकांड के मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार किया था।

हत्या की वजह : मुकेश चंद्राकर एक स्वतंत्र पत्रकार थे, जो बीजापुर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए सड़क निर्माण में हुए भ्रष्टाचार का लगातार खुलासा कर रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने वीडियो पोर्टल पर घटिया सड़क निर्माण कार्य को उजागर किया था। बताया जाता है कि इन रिपोर्टों से नाराज होकर ठेकेदार सुरेश चंद्राकर जो खुद मुकेश का रिश्तेदार भी था उसने उनकी हत्या की साजिश रची थी

महासमुंद/पालक-शिक्षक बैठक 06 अगस्त को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु स्कूल-पालक समन्वय पर विशेष जोर

महासमुंद/पालक-शिक्षक बैठक 06 अगस्त को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु स्कूल-पालक समन्वय पर विशेष जोर

महासमुंद, छत्तीसगढ़ शासन की मंशानुरूप तथा कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशन में जिले के समस्त शासकीय विद्यालयों में प्रथम बैठक बुधवार 06 अगस्त 2025 को प्रातः 11ः00 बजे से पालक-शिक्षक बैठक का आयोजन किया जाएगा। बैठक का उद्देश्य पालकों को बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, दैनिक गतिविधियों एवं समस्याओं से अवगत कराना। बच्चों को पढ़ाई के प्रति सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना। ड्रॉप आउट दर को कम करने हेतु पालकों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना। बच्चों को परीक्षा तनाव से मुक्त करने हेतु काउंसलिंग किया जाना है। विद्यालय स्तर पर द्वितीय बैठक तिमाही परीक्षा पश्चात 10 दिवस के भीतर एवं तृतीय बैठक छःमाही परीक्षा पश्चात 10 दिवस के भीतर आयोजित की जाएगी।

बैठक में शिक्षकों द्वारा पालकों को शासन द्वारा संचालित विद्यार्थी हितग्राही योजनाओं, शैक्षणिक कार्यक्रमों, और शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी, ताकि पालक एवं विद्यार्थी इन योजनाओं का अधिकतम लाभ ले सकें। साथ ही प्रमुख विषयों जैसे घर का वातावरण व छात्र की दिनचर्या, बच्चों की नैतिक सीख एवं निष्कर्ष, बच्चा बोलेगा बेझिझक – संवाद पर बल, अकादमिक प्रगति एवं परीक्षा प्रदर्शन, बस्ता रहित शनिवार की गतिविधियां, स्वास्थ्य परीक्षण एवं पोषण संबंधी जानकारी, जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र की स्थिति, न्योता भोज कार्यक्रम, छात्रवृत्ति एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी, पॉक्सो एक्ट 2012 का प्रचार-प्रसार एवं डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म जैसे दीक्षा एप, ई-जादुई पिटारा, डिजिटल लाइब्रेरी का उपयोग पर चर्चा की जाएगी।

पीटीएम के लिए जिला स्तरीय, विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी की ड्यूटी प्रत्येक संकुलवार लगाई गई है। सभी अधिकारी आबंटित पीटीएम बैठक में शामिल होंगे तथा मॉनिटरिंग करेंगे। साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा टीम द्वारा भी मॉनिटरिंग की जाएगी।

 

महासमुंद कलेक्टर ने ली जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक

महासमुंद कलेक्टर ने ली जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक

महासमुंद कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक आयोजित हुआ। इस बैठक में बाल श्रम (निषेध और नियमन) के लिए किए गए कार्यों की जानकारी ली गई।

कलेक्टर श्री लंगेह ने सभी सदस्यों और स्वयंसेवी संस्थाओं को निर्देशित किया कि वे समन्वय स्थापित कर प्रतिमाह बालक और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) नियम 2017 की धारा 2 बी (2) के तहत संयुक्त निरीक्षण की कार्रवाई करें। कलेक्टर ने ऐसे बच्चों की जानकारी, जो एक माह से विद्यालय में अनुपस्थित हैं, श्रम विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। जिसमें एक माह में शाला से अनुपस्थित बाल एवं किशोर की संख्या निरंक है। कलेक्टर ने कहा कि चिन्हांकित बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत औपचारिक प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 4 के तहत उचित आयु वर्ग की औपचारिक शालाओं में प्रवेश दिया जाएगा। कलेक्टर ने संयुक्त टीम को बाल श्रम के संबंध में होटल, ढाबों और औद्योगिक संस्थानों में सतत निरीक्षण करने तथा कमी पाए जाने पर संस्थानों के विरूद्ध अधिनियम के प्रावधान अनुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए है।

जिला स्तरीय टास्क फोर्स के नोडल अधिकारी श्री डी.एन. पात्र ने बताया कि समिति के माध्यम से संयुक्त टीम द्वारा 12 जून से 30 जून तक बाल श्रमिक/अपशिष्ट संग्राहक, भिक्षावृत्ति, मादक द्रव्यों के शिकार बच्चों के सर्वेक्षण, रेस्क्यू/पुनर्वास के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान जिला स्तरीय टास्क फोर्स के सदस्यों द्वारा 6 संस्थानों का निरीक्षण किया गया। इसी प्रकार 02 जून से 10 जून तक एक सप्ताह का विशेष अभियान चलाकर संयुक्त टीम द्वारा 12 संस्थानों का निरीक्षण किया गया।

जिसमें 03 संस्थानों को बाल श्रम निषेध सूचना पटल प्रदर्शित नहीं किए जाने पर नोटिस जारी किया गया। बैठक में टास्क फोर्स के सदस्य मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री एस. आलोक, अपर कलेक्टर श्री रवि कुमार साहू, जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार लहरे, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री टिकवेन्द्र जटवार, श्रम पदाधिकारी श्री डी.एन. पात्र, जिला अग्रणी बैंक मैनेजर श्री अभय पारे सहित अन्य जिला अधिकारी उपस्थित थे।