लोकतंत्र को मजबूत करने भारत निर्वाचन आयोग की बड़ी पहल – IIIDEM में प्रारंभ हुआ अब तक का सबसे बड़ा प्रशिक्षण बैच :छत्तीसगढ़ के 96 अधिकारी हुए शामिल

लोकतंत्र को मजबूत करने भारत निर्वाचन आयोग की बड़ी पहल – IIIDEM में प्रारंभ हुआ अब तक का सबसे बड़ा प्रशिक्षण बैच :छत्तीसगढ़ के 96 अधिकारी हुए शामिल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने दी विधिक प्रावधानों की जानकारी, पारदर्शिता व दक्षता को बताया चुनावी सफलता की कुंजी

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की आठवीं श्रृंखला का शुभारंभ आज नई दिल्ली स्थित भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन संस्थान में हुआ। इस प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ के 96 निर्वाचन अधिकारी सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से आए बूथ लेवल अधिकारी, बीएलओ सुपरवाइज़र्स, ईआरओ तथा डीईओ को संबोधित किया। उन्होंने निर्वाचन व्यवस्था को पारदर्शी, सुसंगत और विधिसम्मत बनाए रखने में इन अधिकारियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उल्लेखनीय है कि यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशिक्षण बैच है, जिसमें कुल 373 प्रतिभागी शामिल हैं, जिनमें से उत्तर प्रदेश से 118, मध्यप्रदेश से 130, छत्तीसगढ़ से 96 और हरियाणा से 29 अधिकारी हैं। इस श्रृंखला के माध्यम से आयोग दो माह में अब तक 3,720 से अधिक मैदानी चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण दे चुका है।

अपने संबोधन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 एवं 1951, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1960, निर्वाचन संचालन नियम 1961 तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों की जानकारी को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करेगा कि चुनाव की समस्त प्रक्रिया विधिक प्रावधानों के अनुरूप संपन्न हों।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने प्रतिभागियों को अवगत कराया कि प्रशिक्षण के दौरान वे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 24() (जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर के समक्ष प्रथम अपील) और धारा 24(इ) (राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष द्वितीय अपील) की प्रक्रिया से भी परिचित रहें। उन्होंने बीएलओ व पर्यवेक्षकों को सलाह दी कि वे क्षेत्रीय सत्यापन के समय इन प्रावधानों की जानकारी मतदाताओं को भी दें।

उल्लेखनीय है कि 6 से 10 जनवरी 2025 के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के बाद छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से किसी प्रकार की अपील प्राप्त नहीं हुई, जो क्षेत्रीय अधिकारियों के सतर्क, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से दक्ष होने का प्रमाण है।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मतदाता पंजीकरण, फॉर्म प्रबंधन और चुनाव प्रक्रियाओं के व्यावहारिक पक्ष को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत प्रतिभागियों को ईवीएम, वीवीपैट और मॉक पोल से संबंधित तकनीकी पहलुओं पर विशेष सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईटी टूल्स के उपयोग पर भी विशेष बल दिया गया है। इससे अधिकारी डिजिटल प्रक्रिया, डेटा प्रबंधन और निर्वाचन प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता प्राप्त कर सकेंगे, जिससे भविष्य के चुनाव अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाए जा सकेंगे।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण श्रृंखला लोकतंत्र की मजबूती में एक और ठोस कदम है, जिसमें छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह सुनिश्चित करता है कि आने वाले चुनावों में भी निर्वाचन कार्य में नियोजित अधिकारी एवं कर्मचारी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के उच्चतम मानकों का पालन करेंगे।

बाढ़ नियंत्रण हाई पावर कमेटी की बैठक सम्पन्न

बाढ़ नियंत्रण हाई पावर कमेटी की बैठक सम्पन्न

छत्तीसगढ़ में बाढ़ आदि नैसर्गिक विपत्तियों से निपटने हेतु गठित उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्रीमती ऋचा शर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में बरसात के मौसम में राज्य के जिलों के विभिन्न स्थानों पर बाढ़ आने पर उससे निपटने की तैयारियों के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। बाढ़ के दौरान विभिन्न स्थानों पर राहत शिविरों की व्यवस्था सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों द्वारा किए जाने वाली कार्यवाही एवं तैयारियों के संबंध में व्यापक चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि राज्य के सभी जिलों के कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को आगामी मानसून 2025 में प्राकृतिक आपदा से बचाव एवं राहत एवं राहत व्यवस्था करने के संबंध में भारत सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए है।

बैठक में राज्य एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में माह जून में मानसून सक्रिय होने की संभावना है। इसलिए सभी जिलों में वर्षा की जानकारी संकलित की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना भी की गई है। इसका दूरभाष क्रमांक 0771-2223471 एवं फैक्स क्रमांक 0771-2223472 है। इसके अतिरिक्त बाढ़ नियंत्रण कक्ष से 0771-2221242 दूरभाष पर भी सम्पर्क किया जा सकता है। इसके अलावा जिला स्तर पर भी बाढ़ नियंत्रण कक्षों की स्थापना की गई है। बैठक में बताया गया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पहुंचविहीन क्षेत्रों में खाद्य सामग्री, नमक, केरोसिन, जीवन रक्षक दवाईयां, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा दलों का गठन सहित अन्य जरूरी सामग्री अभी से संग्रहित करने के निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दे दिए गए है। बरसात के दिनों में पेयजल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई एवं वहां पर ब्लिचिंग पावडर की व्यवस्था करने के निर्देश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दिए गए है। इसी प्रकार से ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर ली जाए। जहां प्रतिवर्ष प्रायः बाढ़ आती ही है। इन क्षेत्रों में सतत् निगरानी रखने एवं अवश्यकता पड़ने पर वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके ठहरने के लिए राहत शिविर आदि की समूचित योजना बनाने के निर्देश दिए गए है। बाढ़ से बचाव संबंधित उपकरणों की मरम्मत करने और जिन जिलों में मोटरबोट उपलब्ध है उनकी जानकारी शीघ्र ही राहत कार्यालय को दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा के अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करने कहा गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों को नगरीय क्षेत्रों में तमाम नालियों की साफ-सफाई बरसात के दिनों में निरंतर कराये जाने कहा गया है। नगरीय निकायों के अधिकारियों को अभी से ही शहरों की नालियों की साफ-सफाई करने कहा गया है।

श्रीमती शर्मा ने कहा है कि नगरीय क्षेत्रों में जर्जर भवनों की निगरानी लगातार की जाए। इन भवनों में निवासरत लोगों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर बसाए जाने की भी व्यवस्था की जाए। ऐसे जिले जहां बड़ी नदियां बहती है वहां पर जल स्तर पर बराबर नजर रखी जाए। जल स्तर के खतरे के निशान पर पहुंचने की संभावना होने पर इसकी पूर्व सूचना राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष तथा निचले जिलों को लगातार देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसी तरह से बड़े जलाशयों पर कंट्रोल रूम स्थापित कर जल स्तर की जानकारी समय-समय पर शासन को उपलब्ध करायी जाए। बांधों का जल स्तर बढ़ने पर जल निकासी हेतु निचले जिलों एवं सीमावर्ती राज्यों को 12 घण्टे पूर्व सूचना दिए जाने के निर्देश दिए गए है। प्रदेश में कमजोर हो चुके पुल-पुलियों एवं ईमारतों की पहचान कर मरम्मत कर ली जाए। साथ ही बाढ़ के समय दुर्घटना जन्य स्थलों पर सूचना फलक और बेरियर आदि की व्यवस्था करने कहा गया है।

उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्री अविनाश चम्पावत, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, आयुक्त मनरेगा श्री तारण प्रकाश सिन्हा सहित गृह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक निर्माण, वित्त विभाग, जल संसाधन, ऊर्जा, जनसम्पर्क, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, नगरीय प्रशासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा, रेल्वे, दूरदर्शन, रेडक्रास सोसायटी, मौसम विज्ञान एवं भारत दूरसंचार निगम के अधिकारी शामिल हुए।

मिनीमाता महतारी जतन योजना : बच्चे को जन्म देने के 90 दिनों के भीतर अनुराधा को श्रम विभाग से मातृत्व लाभ के रूप में उसके खाते में 20 हजार रुपये प्राप्त हुए

मिनीमाता महतारी जतन योजना : बच्चे को जन्म देने के 90 दिनों के भीतर अनुराधा को श्रम विभाग से मातृत्व लाभ के रूप में उसके खाते में 20 हजार रुपये प्राप्त हुए

 जब अनुराधा की शादी हुई, तो उसने और उसके पति ने रायपुर के पचपेड़ी नाका के पास एक संकरी गली में किराए के एक कमरे में एक साथ नई ज़िंदगी शुरू की। आगे आने वाली चुनौतियों के बावजूद, अनुराधा ने बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने का दृढ़ संकल्प लिया। वह विषम परिस्थितियों से जूझ रही थी, लेकिन उसने एक निर्माण श्रमिक के रूप में नौकरी की, जबकि उसके पति ने एक ड्राइवर के रूप में जीविका अर्जित की। कुछ ही समय बाद, उन्होंने अपने पहले बच्च के रूप में, एक बेटी का स्वागत किया। पैसे की तंगी थी, लेकिन धीरे-धीरे, अनुराधा ने सोचा, ये सब ठीक हो जाएंगी। लेकिन जीवन ने अप्रत्याशित रूप से निर्णायक मोड़ लिया। उसके पति की बुरी लत के कारण परिवार की आय में योगदान देना बंद कर दिया। अनुराधा को अपने बढ़ते परिवार का ख्याल रखना पड़ा। अनुराधा ने कहा, जब मैं फिर से गर्भवती हुई, तो मैंने अपनी गर्भावस्था के आठ महीने तक काम किया। उसके पास अपने परिवार के लिए जीविकोपार्जन के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

अपनी दूसरी गर्भावस्था के दौरान, अनुराधा को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली मातृत्व सहायता के बारे में पता चला। जन्म देने के 90 दिनों के भीतर, अनुराधा को श्रम विभाग से मातृत्व लाभ के रूप में उसके खाते में 20,000 रुपये प्राप्त हुए। इस सहायता के साथ, अनुराधा ने अपनी माँ के घर शरण ली, जहाँ उसे अपने जीवन के इस नए अध्याय के लिए आराम और प्यार मिला।

अनुराधा जैसे अनौपचारिक निर्माण श्रमिकों के लिए, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मातृत्व लाभ तक पहुँच महत्वपूर्ण हो सकती है। महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और माता-पिता दोनों को अपने काम और देखभाल की ज़िम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में मदद करने के लिए सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में मातृत्व लाभ को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

छत्तीसगढ़ में सीएम हेल्पलाइन और श्रम संसाधन केंद्र की स्थापना इस संयुक्त दृष्टिकोण की दिशा में एक कदम है। यह लैंगिक दृष्टिकोण से सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को डिजाइन करने, कवरेज में अंतराल को दूर करने और हाशिए पर पड़े समूहों की जरूरतों का समर्थन करने के महत्व पर जोर देता है।

प्रसवोत्तर देखभाल से लेकर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और स्वयं तथा शिशु के लिए पौष्टिक आहार सुनिश्चित करने मिनीमाता महतारी जतन के अंतर्गत सहायता प्रदान की गई ।

बस्तर के हर कोने तक पहुंचाएंगे विकास का उजाला: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  

बस्तर के हर कोने तक पहुंचाएंगे विकास का उजाला: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

हमने ईमानदारी से काम किया, इसलिए जनता के बीच रख रहे हैं सरकार का रिपोर्ट कार्ड  सुशासन तिहार में योजनाओं की ज़मीनी हकीकत जानने मुख्यमंत्री पहुंचे जनता के बीच

सुकमा में 500 करोड़ रूपए से अधिक लागत के विकास कार्यों की घोषणा की सुकमा-दंतेवाड़ा मार्ग के निर्माण हेतु 230 करोड़ रुपए की घोषणा

मुख्यमंत्री ने पीएम आवास हितग्राहियों को सौंपी खुशियों की चाबी बस्तर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजते हुए विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब बस्तर के कोने कोने का विकास होगा और विकास के रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज सुशासन तिहार अंतर्गत सुकमा जिले के तोंगपाल में आयोजित समाधान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान सुकमा जिले में 500 करोड़ रूपए से अधिक लागत के विकास कार्यों की घोषणा की और 16 करोड़ से अधिक की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। इस अवसर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज सस्थाओं के जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ.बसव राजु एस. भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार के अंतिम चरण में आप लोगों के बीच पहुंचकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। यहां का वातावरण बड़ा सुंदर है और महुआ की सुंदर छांव शीतलता दे रही है। उन्होंने परंपरागत रूप से स्वागत करने पर सभी का आभार जताया। श्री साय ने कहा कि बस्तर से बदलाव की बुलंद आवाज ने माओवादियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। बस्तर में माओवाद अब अंतिम सांसे गिन रहा है। नक्सलगढ़ के रूप जाना जाने वाले सुकमा में स्कूलों की घंटियां बज रही हैं, बच्चे निर्भीक होकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। श्री साय ने कहा कि प्रदेशव्यापी इस अभियान का उद्देश्य योजनाओं की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन करना है। आज देखने आया हूं कि प्रधानमंत्री आवास योजना का कार्य आपके गांव में सुचारू रूप से चल रहा है या नहीं, महतारी वंदन योजना की राशि माताओं-बहनों को समय पर मिल रही है या नहीं। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान वे मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष रूप जानकारी ले रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन चरण में आयोजित सुशासन तिहार अपने उद्देश्य में सफल हुआ है। प्रशासन ने कड़ी मेहनत कर आपकी समस्याओं का समाधान किया है। श्री साय ने कहा कि ऐसा काम वही सरकार कर सकती है जिसकी नीति और नियत साफ है। हमने ईमानदारी से काम किया है, इसीलिए जनता के बीच जाकर अपना रिपोर्ट कार्ड रख रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। हमने पूरे प्रदेश में पीएम आवास के माध्यम से लोगों के लिए पक्का मकान स्वीकृत कर उनके गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार सुनिश्चित किया है। पहले ही कैबिनेट में हमने 18 लाख आवास स्वीकृत किया था, यह काम लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि हम किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान, 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मूल्य पर खरीद रहे हैं। धान के दो वर्षों के बकाया बोनस की राशि भी किसानों को दी जा चुकी है।  रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेशवासियों को धार्मिक स्थलों की यात्रा करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेंदूपता संग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए परिश्रमिक की दर प्रति मानक बोरा 5000 रुपए की दर स्वीकृत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाएं पंचायत भवन में ही मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए अटल डिजिटल सुविधा केंद्र प्रारंभ किया गया है। अगले एक वर्ष में यह सुविधा सभी पंचायतों में शुरू होगी।

योजनाओं की जानी हकीकत

मुख्यमंत्री श्री साय ने तोंगपाल समाधान शिविर में पहुंचे ग्रामीणों से संवाद कर योजनाओं का फीडबैक लिया। तोंगपाल की त्रिवेणी रावटे ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्हें प्रति माह महतारी वंदन योजना की राशि मिल रही है। बच्चों के पालन पोषण में इस राशि के उपयोग की उन्होंने जानकारी दी। इसी तरह श्रीमती वेदमती कश्यप ने बताया कि हमारी समूह की दीदियां गणवेश सिलाई का काम करती हैं। तीन एकलव्य स्कूल के बच्चों की गणवेश सिलाई से उन्हें सालाना डेढ़ लाख रूपए से अधिक की कमाई हो रही है। शिविर में पहुंचे अन्य लोगों ने भी अपनी मांगे रखी और योजनाओं से मिल रहे लाभ की जानकारी दी।

किस्टाराम- कोंटा मार्ग पर दौड़ेगी ‘‘प्रतिज्ञा हक्कुम मेल‘‘

बस्तर अंचल के कभी संवेदनशील क्षेत्र रहे किस्टाराम- कोंटा मार्ग पर अब ‘‘प्रतिज्ञा हक्कुम मेल‘‘ बस दौड़ेगी। दुरस्थ क्षेत्रों में बेहतर आवगमन सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तोंगापाल के समाधान शिविर में मरईगुड़ा के प्रतिज्ञा महिला क्लस्टर संगठन को हुक्कुम मेल बस की चाबी सौंपी। इससे अंचल के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी।

पीएम आवास हितग्राहियों को सौंपी खुशियों की चाबी

मुख्यमंत्री श्री साय ने तोंगपाल के समाधान शिविर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को खुशियों की चाबी देकर उनके सपनों के घर की सौगात दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 4 हितग्राहियों को आवास के पहली किस्त के चेक भी बांटे।  साथ ही पूरे हो चुके आवास के 4 हितग्राहियों को उनके नए घर की चाबी सौंपी।

खेलो इंडिया पहल के 10 खिलाड़ियों को मिले खेल किट

शिविर में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खेलो इंडिया योजना के अंतर्गत 10 खिलाड़ियों को खेल सामग्री (किट) प्रदान किए। इनमें 8 महिला फुटबॉल खिलाड़ी और 2 हाकी खिलाड़ी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि खेलो इंडिया एकेडमी रायपुर और सुकमा में जिले की 8 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों का चयन हुआ है।

मुख्यमंत्री ने सुशासन शिविर में की बड़ी घोषणाएं

सुकमा दंतेवाड़ा मार्ग हेतु 230 करोड़ रूपए, .झीरम व्यापवर्तन योजना हेतु 32 करोड़ 50 लाख, कावराकोपा में पुलिया निर्माण हेतु 35 लाख, जैमर में पुलिया निर्माण 35 लाख, हमीरगढ़ में सामाजिक भवन 30 लाख, टहकवाडा में एक पुल- पुलिया 35 लाख, तोंगपाल में समूह के लिए प्रशिक्षण केंद्र 25 लाख, मारेंगा में सी सी सड़क हेतु 16 लाख, एलेननार में पंचायत भवन 25 लाख और पुलिया हेतु 3.50 लाख, धोबनपाल देवगुड़ी में बाउंड्री वाल हेतु 10 लाख, सीतापाल के स्कूल में बाउंड्री वाल हेतु 8 लाख, वारदेरास  में पुलिया हेतु 16 लाख रूपए की घोषणा की।

 

जल जीवन मिशन में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई

जल जीवन मिशन में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई

70 ठेकेदारों को नोटिस, जल्द कार्य पूर्ण नहीं करने पर होगी कड़ी कार्रवाई  राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली योजना जल जीवन मिशन के तहत कार्यों में हो रही लापरवाही अब ठेकेदारों पर भारी पड़ने लगी है।                                                                      लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने मुंगेली जिले में समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं करने वाले 70 ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द अधूरे कार्य पूरे नहीं किए गए, तो संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय सख्ती की यह कार्रवाई जल जीवन मिशन के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक के हालिया मुंगेली प्रवास के बाद सामने आई है। दौरे के दौरान उन्होंने कलेक्टर श्री कुंदन कुमार के साथ जिले के विभिन्न गांवों में मिशन के अंतर्गत चल रहे पेयजल परियोजनाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण में यह पाया गया कि कई योजनाएं तय समय-सीमा से पीछे चल रही हैं और कार्यों में ठेकेदारों की लापरवाही व उदासीनता प्रमुख कारण बनकर उभरी है। श्री हक ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों को समय पर शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। ऐसे में कार्यों की गति तेज की जाए और लापरवाह ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया जाए।

 

वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने बस्तर क्षेत्रवासियों को दी 1.16 करोड़ रूपए की सौगात, 

वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने बस्तर क्षेत्रवासियों को दी 1.16 करोड़ रूपए की सौगात,

विभिन्न निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन विकास में सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो, सेवा सहकार से जुड़ें मत्स्य पालन के क्षेत्र में बढ़ रहा बस्तर

नक्सल मुक्त बस्तर केवल सरकार नहीं प्रत्येक बस्तरवासियों का सपना

वनमंत्री श्री केदार कश्यप अपने बस्तर प्रवास के दौरान नारायणपुर विधानसभा के बस्तर क्षेत्र में कई कार्यक्रमों में सम्मिलित हुए। वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने सुधापाल एवं गोंदियापाल में आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि बस्तर का विकास केवल भाजपा शासन में ही संभव है और यह विकास आज होता दिखाई दे रहा है। बस्तर के विकास के लिये जो सपना यहाँ का आम व्यक्ति देखता है उस सपने को साकार करने का काम प्रधानमंत्री मोदी जी कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी जी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर विकास के मार्ग में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। बस्तर में यातायात के माध्यमों का विस्तार हो रहा है। रावघाट रेल परियोजना के लिये हजारों करोड़ों रूपये का राशि स्वीकृति कर इस कार्य को गति देने का कार्य प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार ने किया है।

सुधापाल और गोंदियापाल में वनमंत्री ने किया करोड़ों के विकास कार्यों का भूमिपूजन-लोकार्पण

वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने आज सुधापाल में मिनि स्टेडियम निर्माण कार्य, प्राथमिक अजजा बालक आश्रम तिरथा,प्राथमिक अजजा बालक आश्रम रतेंगा में 1-1 नग हाई मास्क लाईट स्थापना, नवीन रतेंगा में सीसी रोड निर्माण कार्य माता मंदिर से पुजारी पारा 300 मीटर ग्राम बडे बर्दाेगा, अटल निर्माण वर्ष के तहत छोटे बढ़ेंगा में आदर्श ऑगनबाड़ी केन्द्र की स्थापना 01 नग, पाथरी में भलकु तरई से डोकरागुड़ी तक 200 मीटर सीसी सड़क निर्माण इसी तरह गोंदियापाल प्राथमिक अजजा बालक आश्रम में 01 नग हाई मास्क लाईट स्थापना, वनपाल भवन निर्माण,वन रक्षक भवन निर्माण, चेराकुर में अटल चौक के पास 01 नग हाई मास्क लाईट स्थापना के लिये 1 करोड़ 16 लाख से अधिक राशि के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी है।

सुशासन तिहार के माध्यम समस्याओं का निराकरण वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सुशासन तिहार हमारी साय सरकार का एक क्रांतिकारी अभियान है। हमने हर व्यक्ति से इसलिए अभियान के माध्यम से और हर स्तर पर पहुंचने का प्रयास किया है। शिविर के दौरान प्राप्त आवेदनों पर त्वरित कार्य हो रहे हैं। सरकार अपनी विजन और प्राथमिकता के आधार पर लोगों के मांग और आवेदनों पर कार्य कर रही है। हमारी श्री विष्णु देव साय की सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, क़ृषि, निर्माण कार्य हो या महिलाओं के सशक्तिकरण का विषय हो सभी क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रही है।बस्तर के विकास में सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो, सेवा सहकार से जुड़ें’

वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि हमारी साय सरकार सहकारिता के क्षेत्र में लोगों को स्वरोजगार के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिये सहकारिता एक अद्वितीय विकल्प है। मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि बस्तर शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल कई क्षेत्रों में आगे हैं लेकिन अब हमें व्यवसाय के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा मत्स्य पालन, कुक्कूट पालन, दुग्ध उत्पादन का क्षेत्र हो हम सहकारिता के माध्यम से बस्तर ही नहीं पूरे प्रदेश में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की दिशा में कार्यरत हैं।

नक्सल मुक्त बस्तर का निर्माण केवल सरकार नहीं प्रत्येक बस्तरवासियों का सपना  हो रहा पूरा

वनमंत्री श्री केदार कश्यप ने लोगों को कहा कि अब बस्तर से लाल आतंक समाप्त हो रहा है। उन्होंने लोगों को बताया कि कल ही केंद्र सरकार ने  एलडब्ल्यूई सूची से बस्तर जिला को बाहर करते हुए नक्सलवाद से मुक्त जिला घोषित किया है। मंत्री श्री कश्यप ने कहा जल्द ही हमारा पूरा बस्तर संभाग नक्सल मुक्त होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन व नेतृत्व में बस्तर विकास के नये सोपान को तय करेगा।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तोंगापाल पहुंचे 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तोंगापाल पहुंचे

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय समाधान शिविर तोंगपाल में 16 करोड़ से अधिक विकास कार्यों का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिले के विकासखंड तोंगापाल में आयोजित शिविर में अचानक पहुंचे। अपने मुख्या का इस तरह अचानक पहुंचने से ग्रामीणों में अत्यंत उत्साह का संचार हुआ। वे मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर पारंपरिक नृत्य करते हुए अपनी खुशी का इजहार किया। मुख्यमंत्री समाधान शिविर में लोगों से योजनाओं की फीडबैक लेकर 16 करोड़ 25 लाख से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण किया।  उन्होंने कुकानार  से बढ़ाईपारा 4.80 किमी सड़क निर्माण हेतु 4 करोड़ 03 लाख 73 हजार, एल 53 चिंतलनार से किस्टारम  4.50 किमी सड़क हेतु 01 करोड़ 52 लाख 41 हजार, एल 80 बुरकापाल से तोकनपल्ली 3.86 किमी सड़क हेतु 01 करोड़ 24लाख 61 हजार, एल 67 मुकरम से तोंगपल्ली 5 किमी सड़क हेतु 01 करोड़ 24लाख 13 हजार की लागत से निर्माण कार्य किया गया है । इसके अलावा गादीरास से मानकापाल 12 किमी सड़क, 13 नग पुल पुलिया निर्माण हेतु 6 करोड़ 86 लाख 15 हजार, सुकमा दंतेवाड़ा 23 किमी से कासरगुड़ा 2 किमी सड़क निर्माण कार्य के लिए 01 करोड़ 34 लाख की लागत से निर्माण किया गया ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, मुख्ममंत्री के सचिव डॉ बसव राजू एस, कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक श्री किरण चौहान सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे ।

 

मुख्यमंत्री ने ‘सावरकर सौरभ’ स्मारिका का किया विमोचन

मुख्यमंत्री ने ‘सावरकर सौरभ’ स्मारिका का किया विमोचन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने निवास कार्यालय में स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर आधारित स्मारिका ‘सावरकर सौरभ’ का विमोचन किया। स्मारिका ‘सावरकर सौरभ’ का प्रकाशन अखिल भारतीय साहित्य परिषद, छत्तीसगढ़ द्वारा सावरकर जयंती के अवसर पर किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘सावरकर सौरभ’ स्मारिका के प्रकाशन पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद, छत्तीसगढ़ के सदस्यों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि वीर सावरकर हमारे देश के सच्चे सपूत थे। उन्होंने मातृभूमि की सेवा में असंख्य कष्ट सहते हुए स्वतंत्रता की अलख जगाई। उनके साहसपूर्ण जीवन के प्रेरणादायी संस्मरणों से सभी को प्रेरणा मिलेगी।

मुख्यमंत्री को ‘सावरकर सौरभ’ के संपादक और अखिल भारतीय साहित्य परिषद छत्तीसगढ़ के प्रांत संयोजक श्री प्रभात मिश्र ने बताया कि इस स्मारिका में स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवनकाल की घटनाओं को संपादित कर स्मारिका का रूप दिया गया है। स्मारिका में विभिन्न लेखकों ने वीर सावरकर के जीवन के विभिन्न आयामों को लेकर अपने विचार व्यक्त किए हैं।

इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद, छत्तीसगढ़ से श्री रामेश्वर शर्मा, श्री शिवरतन गुप्ता, श्री मनीष शर्मा,श्री संतोष बरलोटा, श्री भास्कर किन्हेकर , श्री अभय मिश्रा, श्री कौशल साहू सहित अन्य गणमान्य जन उपस्थित थे।

 

वार्ड क्रमांक 01 में आंगनबाड़ी केन्द्र हेतु सहायिका पद के लिए 13 जून तक आवेदन आमंत्रित

वार्ड क्रमांक 01 में आंगनबाड़ी केन्द्र हेतु सहायिका पद के लिए 13 जून तक आवेदन आमंत्रित

एकीकृत बाल विकास परियोजना महासमुंद अंतर्गत शंकर नगर वार्ड क्रमांक 01 में स्थित शंकर नगर आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 02 के लिए रिक्त सहायिका पद पर नियुक्ति की जानी है। परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना ने बताया कि सहायिका पद पर नियुक्ति के लिए 13 जून 2025 शाम 05ः30 बजे तक कार्यालय बाल विकास परियोजना महासमुंद (शहरी) में कार्यालयीन समय पर सीधे अथवा पंजीकृत डाक द्वारा जमा किया जा सकता है। निर्धारित तिथि के उपरांत आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सहायिका पद हेतु आठवीं बोर्ड उत्तीर्ण होना चाहिए। साथ ही आयु सीमा 18 वर्ष से 44 वर्ष की हो। वार्ड निवासी सत्यापन के लिए आवेदिकाओं को वार्ड की अद्यतन मतदाता सूची आवेदन के साथ संलग्न करना अनिवार्य है। शहरी क्षेत्रों में आवेदिका उसी वार्ड का होना चाहिए जहां आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित है तथा गरीबी रेखा प्रमाण पत्र सर्वे सूची 2011-12 का होना चाहिए। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय महासमुंद से सम्पर्क कर सकते है।

राज्यपाल श्री डेका ने तीन गांव गोद लिए               

राज्यपाल श्री डेका ने तीन गांव गोद लिए                                  गोद लिए गांवों में होगा समावेशी मानव केन्द्रित विकास

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने एक नई पहल करते हुए, प्रदेश के तीन गांवों को गोद लेने का संकल्प लिया है। बेमेतरा जिले के टेमरी, गरियाबंद जिले के मड़वा डीह, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के सोनपुरी गांव को गोद लेने के लिए चयन किया गया है। इन गांवों में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न फ्लेगशिप योजनाओं के हेतु समुदाय को शामिल करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय विकास की पहल की जाएगी। इसके लिए पृथक से कोई राशि का आबंटन नहीं किया जाएगा, बल्कि विभिन्न योजनाओं में उपलब्ध राशि के समुचित उपयोग एवं निगरानी से ही यह कार्य किया जाएगा। गांवों को गोद लेने से सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में ‘मानव-केंद्रित‘ दृष्टिकोण के साथ गांवों के समावेशी विकास के उद्देश्य पर अधिक जोर दिया जा सकेगा।

राज्यपाल श्री डेका द्वारा जिन गांवो को गोद लिया जा रहा है उनमें जल संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाना, शिक्षा ,स्वास्थ्य एवं पोषण, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा, सतत् कृषि, विरासत एवं संस्कृति के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जल संरक्षण के लिए अमृत सरोवर बनाने एवं नरेगा एवं जल जीवन मिशन से कार्य कराए जाने, कैम्पा, नरेगा, वृक्षारोपण अभियान के जरिए हरित आवरण बढ़ाने, प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में विद्यार्थियों के शाला छोड़ने की दर को कम करने के लिए स्कूलों में अभिभावकों के साथ मीटिंग करने, पुस्तकालयों में शिक्षाप्रद एवं आकर्षक पुस्तकें रखे जाने, एनसीसी, स्कूलों का जीर्णोंद्धार आदि कार्यो पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीणों के स्वास्थ्य की बेहतरी एव्ं पोषण के लिए टी बी उन्मूलन, स्वच्छता अभियान, आईसीडीएस, पर जोर रहेगा। ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने के लिए एनआरएलएम, स्व सहायता समूह, कौशल प्रशिक्षण, ग्रामीण उद्यमिता सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बुजुर्गों एवं दिव्यांगों की देखभाल, नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्र, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाएगा। कृषि में सुधार के लिए जैविक खेती, पारंपरिक कृषि, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, विरासत और संस्कृति-स्थानीय और ग्रामीण पर्यटन, विरासत स्थल के संरक्षण हेेतु सामुदायिक प्रयास किए जाएंगे।

इसके अलावा गोद लिए गए गांवों की निगरानी समय-समय पर की जाएगी और विभिन्न परियोजनाओं के परिणाम के रूप में मापने योग्य संकेतकों का मूल्यांकन किया जाएगा जैसे भूजल स्तर में वृद्धि, हरित क्षेत्र में वृद्धि, प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में विद्यार्थियों में शाला छोड़ने की दर आदि। कुल मिलाकर गोद लिए गए गांव संबंधित जिला प्रशासन के लिए गांव के सामाजिक-आर्थिक और  पर्यावरणीय विकास हेतु एक समावेशी मानव केंद्रित दृष्टिकोण रखने के लिए मार्ग दर्शक के रूप में कार्य करेंगे।

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष अगस्त में नई दिल्ली में आयोजित राज्यपालों के सम्मेलन में सभी राज्यपालों को प्रधानमंत्री फ्लेगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन के बारे में प्रत्येक जिले के अधिकारियों के साथ चर्चा करने के लिए निर्देशित किया गया था। इसी निर्देश के परिपालन में राज्यपाल श्री डेका लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर केन्द्र की फ्लेगशिप योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन का फीडबैक ले रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने कुछ गांवों को आदर्श गांव की तर्ज पर विकसित करने का संकल्प लिय