CG बसना/ CM हेल्पलाइन में शिकायत पर रोजगार सहायक का खुला पोल/ एक्शन में जनपद CEO, रोजगार सहायक और मेट पर कार्रवाई के लिए जिला को भेजा पत्र नाला व्यवर्तन योजना के मस्टररोल में फर्जी मस्टरोल का मामला, 24 लोगों के नाम पर करीब ₹84 हजार भुगतान का आरोप
बसना/महासमुंद। बसना जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत दुर्गपाली में नाला व्यवर्तन योजना के तहत मस्टररोल और मजदूरी भुगतान में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीणों और योजना में कार्य करने वाले मजदूरों ने रोजगार सहायक विजय सिंह एवं मेट ललित पटेल बद्री साव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि गांव के महिला-पुरुष सहित करीब 24 लोगों के नाम पर बिना कार्य किए फर्जी मस्टररोल तैयार कर लगभग 84 हजार रुपये का भुगतान कराया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि मस्टररोल में जिन 24 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं, उनमें से कई लोगों को उन्होंने कार्यस्थल पर मजदूरी करते हुए कभी नहीं देखा। इसके बावजूद उनके नाम पर मजदूरी की राशि निकाले जाने की बात कही जा रही है। वहीं, जिन मजदूरों ने वास्तव में योजना के तहत कार्य किया, उनका भुगतान अब तक नहीं होने का भी ग्रामीणों ने आरोप लगाया है।
सीएम हेल्पलाइन में की गई थी शिकायत 
मामले को लेकर ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद जनपद पंचायत स्तर से मामले की जांच कराई गई। जांच के बाद अब मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
बसना जनपद CEO पीयूष ठाकुर ने बताया कि रोजगार सहायक और मेट के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर पत्र भेजा गया है। 
> “ग्राम पंचायत दुर्गपाली में नाला व्यवर्तन योजना से संबंधित शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर रोजगार सहायक एवं मेट के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर पत्र भेजा गया है। मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
— पीयूष ठाकुर, जनपद CEO, बसना
जांच प्रक्रिया पर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल
हालांकि, ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जांच के दौरान पंचायत भवन या किसी सार्वजनिक स्थान पर सभी संबंधित ग्रामीणों और वास्तविक मजदूरों की मौजूदगी में निष्पक्ष तरीके से जांच नहीं की गई। ग्रामीणों के अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ शिकायत की गई थी, उनके घर जाकर बयान लिए गए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया में रोजगार सहायक को बचाने का प्रयास किया गया और वास्तविक मजदूरों के बयान एवं उनकी उपस्थिति को पर्याप्त रूप से जांच में शामिल नहीं किया गया।
मस्टररोल और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए मस्टररोल, मजदूरों की उपस्थिति, कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन और भुगतान की पूरी जानकारी सामने लाई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि जिन लोगों ने वास्तव में काम किया है, उन्हें भुगतान नहीं मिला, जबकि कथित तौर पर काम नहीं करने वालों के नाम से राशि का भुगतान किया गया।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक मजदूरों के बयान लिए जाएं और मस्टररोल में दर्ज नामों का मौके पर सत्यापन कराया जाए।
अब जनपद CEO द्वारा रोजगार सहायक और मेट के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर पत्र भेजे जाने के बाद मामले में जिला प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर ग्रामीणों की नजर है। अंतिम स्थिति संबंधित दस्तावेजों और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।


