जनपद पंचायत बसना के अंतर्गत ग्राम पंचायत उड़ेला में पेयजल आपूर्ति सामग्री खरीदी के बदले जारी किए गए कोटेशन/बिलों में GST से जुड़ी प्रविष्टियों को लेकर तकनीकी सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राप्त दस्तावेजों और बिलों के गहन अध्ययन से वित्तीय पारदर्शी प्रक्रियाओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता महसूस हो रही है।
GST विसंगतियाँ: CGST और SGST की अनुपस्थिति
दस्तावेजों में मुख्य ध्यान खींचने वाला पहलू यह है कि 27 मार्च 2026 की तिथि में जारी बिल संख्या 146 (कुल राशि ₹49,092) में CGST और SGST की कोई अलग दर अथवा विभाजित प्रविष्टि अंकित नहीं की गई है। जबकि पूर्व में जारी 20 अप्रैल 2025 (बिल संख्या 47) और 5 मई 2025 (बिल संख्या 65) के बिलों में नियमानुसार CGST (9%) और SGST (9%) की स्पष्ट गणना शामिल की गई थी। एक ही फर्म द्वारा जारी बिलों के प्रारूप (Layout) और टैक्स संरचना में इस प्रकार का बदलाव वाणिज्यिक कर (GST) के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं, यह जांच का विषय है।
टैक्स कोड और फर्म विवरण में भिन्नता
दस्तावेजों का अवलोकन करने पर फर्म के विवरण में भी तकनीकी भिन्नता दिखाई देती है:
स्टेट कोड व नंबर: 2025 के बिलों में केवल ‘State Code 22’ लिखा है, जबकि 2026 के बिल में बाकायदा फर्म का full GSTIN दर्ज है।
स्पेलिंग और नाम प्रविष्टि: अलग-अलग बिलों में फर्म का नाम ‘Agrawal Krishi Agrawal’ तथा ‘Agrawal Krishi Kednra’ के रूप में दर्ज है।
चौधरी ट्रेडर्स का हाथ से बना बिल: बिना तिथि और बिना टैक्स विभाजन का भुगतान
ग्राम पंचायत उड़ेला के नाम पर ‘चौधरी ट्रेडर्स’ (मालिक: शशि बाई चौधरी, झारबंद-भंवरपुर) द्वारा जारी बिल क्र. 139 में रेती (रेत) हायवा के 3 ट्रिप के एवज में कुल ₹48,000 दर्ज हैं। इस बिल में निम्नलिखित तकनीकी बातें ध्यान खींचती हैं:
तिथि गायब: बिल पर दिनांक का कॉलम खाली (दिनांक – / /20) छोड़ दिया गया है।
टैक्स प्रविष्टि शून्य: बिल के ऊपर GSTIN तो छपा हुआ है, लेकिन नीचे दिए गए SGST (%) और CGST (%) के कॉलम को पूरी तरह खाली छोड़ा गया है और सीधे ₹48,000 का कुल योग दर्शाया गया है।
ऑडिट और भौतिक सत्यापन की आवश्यकता
सरकारी या पंचायती मदों से होने वाले भुगतानों में GST नियमों का पूर्ण पालन प्रतीत नहीं हो रहा है। बिलों में टैक्स पृथक्करण का ना होना और पूर्व एवं वर्तमान बिलों के प्रारूप में भिन्नता होना यह दर्शाता है कि भुगतान स्वीकृत करने से पूर्व टैक्स इनवॉइस की गहन जांच नहीं की गई।
अब सवाल यह उठता है कि क्या उक्त भुगतानों का GST पोर्टल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और टैक्स रिटर्न के साथ मिलान (Reconciliation) हुआ है? संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं लेखा-परीक्षकों (Auditors) द्वारा इसकी समीक्षा किए जाने से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


