सरायपाली/स्थगन आदेश की अवहेलना, सरायपाली में शासकीय उप अभियंता पर अवैध निर्माण जारी रखने के आरोप
सरायपाली।स्थानीय वार्ड क्रमांक 10 स्थित पुराने पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में कथित अवैध अतिक्रमण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एनएच पीडब्ल्यूडी रायगढ़ में पदस्थ उप अभियंता भुजरंग साय पैंकरा पर तहसीलदार न्यायालय के 05 मार्च 2025 के स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य पुनः शुरू कराने के आरोप लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 सितंबर 2025 को हुए धरना प्रदर्शन के बाद भुजरंग साय द्वारा स्वयं एसडीएम को लिखित रूप से निर्माण कार्य बंद करने का आवेदन दिया गया था, किंतु गुरुवार 15 जनवरी को उसी स्थल पर दोबारा निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। इसकी सूचना शिकायतकर्ता सौरभ गोयल ने तहसीलदार एवं एसडीएम कार्यालय को दी।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि जिस प्रशासन की सक्रियता अवैध धान परिवहन पर सख्त कार्रवाई के लिए जानी जाती है, वही प्रशासन इस प्रकरण में कथित रूप से निष्क्रिय नजर आ रहा है। तहसीलदार श्रीधर पंडा ने कार्रवाई की जिम्मेदारी एनएच पीडब्ल्यूडी विभाग की बताते हुए पल्ला झाड़ लिया, जबकि एसडीएम अनुपमा आनंद (आईएएस) ने जांच कराने की बात कहकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
इसका परिणाम यह हुआ कि आरोप है कि अतिक्रमण स्थल पर स्लैब ढालने तक का कार्य कर लिया गया। नगर पालिका कर्मचारी गिरजा शंकर महापात्र ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण की तस्वीरें लेकर सीएमओ दिनेश यादव को भेजने की बात कही, हालांकि इस पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचते, तो यह स्पष्ट होता कि निर्माण कार्य में एनएच पीडब्ल्यूडी के गैंग लेबर लगे हुए थे, जो शासकीय कार्य छोड़कर कथित अवैध निर्माण में कार्यरत पाए गए। इस संबंध में एनएच पीडब्ल्यूडी रायगढ़ के एसडीओ महेश गुप्ता ने जानकारी जुटाने की बात कही है।
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि उक्त भवन को लगभग तीन करोड़ रुपये में बेचने की मंशा से निर्माण किया जा रहा है, जबकि बाजार मूल्य भी इसी के आसपास बताया जा रहा है। मामले को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक शिकायत पहुंचाने की तैयारी की चर्चा भी है।
वहीं, तहसीलदार न्यायालय के स्थगन आदेश की कथित अवहेलना पर कार्रवाई न होने से स्थानीय प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाता है।



