सरायपाली/ Beo समझते है अपने आप को मंत्री आरोप लगाते हुए कहा कि रक्षाबंधन पर रकम नहीं, तीन माह से भुगतान रोकने का आरोप: ऐसे लापरवाही से शासन की छवि होती है खराब? हड़ताल में सम्मिलित कर्मचारियों का लेन देन कर वेतन जारी करने का आरोप?
हड़ताल में शामिल 10 कर्मचारियों का वेतन जमा होने का दावा, बैंक स्टेटमेंट और हस्ताक्षर को बताया प्रमाण; लेन-देन कर मनमाने तरीके से भुगतान करने का आरोप
सरायपाली। रक्षाबंधन के त्योहार के बीच सरायपाली ब्लॉक के अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारियों के भुगतान का मामला गरमा गया है। छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ, ब्लॉक सरायपाली ने जून, जुलाई और अगस्त—तीन माह का भुगतान रोके जाने का आरोप लगाते हुए शिक्षा विभाग की भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ ने आज छुट्टी के दिन लाचार होकर 28 अगस्त 2026 को जारी पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
संघ के पत्र में कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी का जिक्र करते हुए कहा गया है कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के समय भी उन्हें भुगतान नहीं मिला है। पत्र में कर्मचारियों की स्थिति को लेकर “आज कर्मचारी पेमेंट के लिये रो रहे हैं” जैसी बात लिखी गई है। कर्मचारियों का सवाल है कि जब उन्हें नियमित रूप से भुगतान मिलना चाहिए, तो लगातार तीन महीने का भुगतान रोकने की स्थिति आखिर क्यों बनी?

हड़ताल में थे 10 कर्मचारी, फिर वेतन जमा होने का दावा
कर्मचारियों ने भुगतान को लेकर सबसे गंभीर सवाल यह उठाया है कि हड़ताल में शामिल 10 कर्मचारियों का वेतन उनके खातों में जमा होने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि इस संबंध में उनके पास बैंक स्टेटमेंट और कर्मचारियों के हस्ताक्षर सहित दस्तावेज मौजूद हैं।
कर्मचारियों के मुताबिक, यदि हड़ताल में शामिल कर्मचारियों का भुगतान किया गया है तो अन्य कर्मचारियों का भुगतान किस आधार पर रोका गया? क्या सभी कर्मचारियों के भुगतान के लिए एक समान नियम लागू नहीं होना चाहिए? यही सवाल अब शिक्षा विभाग की भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठ रहा है।
“लेन-देन कर मनमाने तरीके से भुगतान” का आरोप
स्कूल सफाई कर्मचारियों ने भुगतान प्रक्रिया में लेन-देन कर मनमाने तरीके से वेतन जारी करने का आरोप भी लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि भुगतान में समानता नहीं दिखाई दे रही है और कुछ लोगों को भुगतान मिल रहा है, जबकि अन्य कर्मचारी अपने बकाया भुगतान के लिए इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि, लेन-देन संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इन आरोपों की सच्चाई वेतन बिल, भुगतान आदेश, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
सवाल पूछने पर धमकी देने का भी आरोप
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि भुगतान को लेकर सवाल उठाने या अपनी बात रखने पर उन्हें धमकी दिए जाने की बात कही गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने हक का भुगतान मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी समस्या खुलकर रखने में परेशानी होती है।
यदि यह आरोप सही है तो यह भी गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
मुख्यालय बीईओ कार्यालय, फिर चारभांठा स्कूल में वेतन का काम क्यों?
कर्मचारियों के अनुसार उनका वेतन लेखा-जोखा और संबंधित प्रशासनिक कार्य बीईओ कार्यालय सरायपाली से जुड़ा है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि वेतन संबंधी कार्य चारभांठा स्कूल में तैयार किया जाता है।
इसी व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि यदि कर्मचारियों का पूरा लेखा-जोखा बीईओ कार्यालय के अधीन है तो वेतन संबंधी कार्य चारभांठा स्कूल में किस आदेश और किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा है? इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की है? कर्मचारियों ने इस पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
बीईओ टीकम चंद्र पटेल की कार्यप्रणाली पर सवाल
कर्मचारियों ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी टीकम चंद्र पटेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि भुगतान के मामले में मनमानी की जा रही है। कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए यहां तक कहा है कि “बीईओ अपने आप को मंत्री समझ रहे हैं।”
यह बयान कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप और उनकी नाराजगी को दर्शाता है। इन आरोपों पर बीईओ टीकम चंद्र पटेल या शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे
रक्षाबंधन पर भुगतान नहीं, तो त्योहार कैसे मनाएं?
स्कूल सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी आय सीमित है और ऐसे में तीन महीने का भुगतान रुकना उनके परिवारों के लिए बड़ी परेशानी है। रक्षाबंधन के मौके पर बहनों और परिवार के लिए जरूरी खर्च भी करना होता है। ऐसे में भुगतान नहीं मिलने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों का सवाल सीधा है—जब सरकार की ओर से कर्मचारियों को समय पर भुगतान की व्यवस्था है, तो सरायपाली में तीन महीने का भुगतान क्यों अटका हुआ है?
शासन की छवि पर भी सवाल
मामला केवल कर्मचारियों के भुगतान तक सीमित नहीं है। यदि तीन माह का भुगतान वास्तव में बिना उचित कारण रोका गया है या भुगतान प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई है, तो इससे संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली के साथ-साथ शासन की छवि पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
वहीं, यदि भुगतान रोकने के पीछे कोई प्रशासनिक, तकनीकी या वैधानिक कारण है, तो विभाग को कर्मचारियों के सामने उसकी स्पष्ट जानकारी रखनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।
₹8,860 के कथित दोहरे भुगतान की भी जांच की मांग
इसी मामले से जुड़े एक अन्य बिंदु में लमकेनी एमएस स्कूल के कर्मचारी बसंत बेहरा के नाम पर जून, जुलाई और अगस्त की ₹8,860 राशि के दो बार भुगतान होने की बात सामने आई है।
यह भी फिलहाल दावा/शिकायत है। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित वेतन बिल, भुगतान वाउचर और बैंक रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। यदि एक ही अवधि और मद की राशि वास्तव में दो बार जारी हुई है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि दोहरा भुगतान किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत हुआ।
जांच हुई तो कई सवालों के मिल सकते हैं जवाब
अब पूरे मामले में कर्मचारियों की मांग है कि जून, जुलाई और अगस्त के सभी कर्मचारियों के वेतन बिल, भुगतान सूची, बैंक ट्रांजेक्शन, हस्ताक्षर, उपस्थिति/हड़ताल संबंधी रिकॉर्ड और भुगतान आदेशों की जांच कराई जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि—
तीन माह का भुगतान किन कर्मचारियों का रोका गया और क्यों?
हड़ताल में शामिल 10 कर्मचारियों का भुगतान हुआ या नहीं?
यदि हुआ तो किस आदेश के आधार पर?
चारभांठा स्कूल में वेतन संबंधी कार्य किस आदेश से कराया जा रहा है?
भुगतान प्रक्रिया की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
₹8,860 के कथित दोहरे भुगतान की वास्तविकता क्या है?
कर्मचारियों द्वारा लगाए गए लेन-देन और धमकी के आरोपों में कितनी सच्चाई है?
छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ ने जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद सहित उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लंबित भुगतान जारी कराने और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि रक्षाबंधन के मौके पर तीन माह के भुगतान को लेकर उठे इन सवालों पर शिक्षा विभाग क्या जवाब देता है और दस्तावेजों की जांच में वास्तविकता क्या सामने आती है।
> नोट: इस समाचार में लेन-देन, धमकी, मनमाने भुगतान और ₹8,860 के दोहरे भुगतान संबंधी बातें कर्मचारियों/संघ द्वारा लगाए गए आरोप अथवा दावे के रूप में दी गई हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित बीईओ एवं शिक्षा विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना आवश्यक है।


