रायपुरl 31/08/26 ड्रिप विधि से सब्जी की खेती ने बनाया ‘लखपति दीदी’, सालाना डेढ़ लाख रुपये की कमाई
कोरबा जिले के ग्राम बेला की श्रीमती अंजना भगत ने मेहनत, सीखने की लगन और स्वसहायता समूह के सहयोग से अपनी छोटी-सी बाड़ी को आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बना दिया है। सब्जी उत्पादन को आजीविका से जोड़कर उन्होंने अपनी वार्षिक आय करीब 1.50 लाख रुपये तक पहुंचाई और ‘लखपति दीदी’ बनने का गौरव हासिल किया।
श्रीमती अंजना भगत वर्ष 2017 से ‘बिहान’ (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ी हैं। वे ‘सहेली स्वसहायता समूह’ की सदस्य हैं, जिसमें 13 महिलाएं शामिल हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए अपनी बाड़ी में ड्रिप सिंचाई विधि अपनाई।
उन्होंने बरबट्टी, लौकी और डोड़का जैसी सब्जियों की खेती शुरू की। ड्रिप विधि से सिंचाई और फसल की व्यवस्थित देखभाल के चलते उत्पादन बेहतर हुआ। तैयार सब्जियों को स्थानीय बाजार में बेचकर उन्हें नियमित आमदनी होने लगी। धीरे-धीरे सब्जी उत्पादन उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया।
💰 मेहनत ने बदली आर्थिक तस्वीर
अंजना भगत की मेहनत का परिणाम उनकी बढ़ती आय के रूप में सामने आया। सब्जी उत्पादन और अन्य आजीविका गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग 1.50 लाख रुपये तक पहुंच गई। आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ उन्होंने ‘लखपति दीदी’ की पहचान हासिल की।
अंजना बताती हैं कि ‘बिहान’ से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत रहा। स्वसहायता समूह से उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिला और अपनी मेहनत को स्वरोजगार से जोड़ने का अवसर प्राप्त हुआ।
आज उनकी बाड़ी में लहलहाती सब्जियां केवल फसल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, मेहनत और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक बन गई हैं।
👩🌾 दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
अंजना भगत की सफलता यह साबित करती है कि ग्रामीण महिलाएं यदि समूह की शक्ति, आधुनिक कृषि तकनीक और अपनी मेहनत को साथ लेकर आगे बढ़ें तो आर्थिक आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है। उनकी सफलता गांव की अन्य महिलाओं को भी आजीविका के नए अवसर अपनाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए प्रेरित कर रही है।
अपनी इस उपलब्धि के लिए उन्होंने ‘विष्णु भैया’ के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा किए जा रहे प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को नई दिशा और अवसर मिल रहे हैं। उनके नेतृत्व में महिलाओं की मेहनत को सम्मान के साथ आत्मनिर्भरता की नई पहचान मिल रही है।



