हाल के दिनों में युवाओं में मोबाइल से कमाई का शौक़ तेजी से बढ़ा है। कई जुआ और सट्टा आधारित एप्स (Apps) युवाओं को “तेज़ी से पैसा कमाने” का लालच देकर अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इन एप्स में दावा किया जाता है कि यूज़र खेलकर या दांव लगाकर आसानी से 2-4 हज़ार रुपये तक जीत सकते हैं। लेकिन हक़ीक़त इससे बिल्कुल अलग है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि इन ऐप्स का पूरा सर्वर और नियंत्रण (system control) कंपनी या मालिक के पास रहता है।
यूज़र चाहे जितनी मेहनत करे, जीत का निर्णय एल्गोरिद्म (algorithm) और सर्वर पर सेट किए गए नियमों से होता है।
ऐप मालिक तकनीकी रूप से कभी भी यह तय कर सकता है कि किसे जीताना है और किसे हाराना है।
इसी वजह से यह देखा गया है कि यूज़र शुरुआत में थोड़ा-बहुत जीतते हैं ताकि उनमें विश्वास बने, लेकिन बाद में लगातार हारते हैं और नुकसान उठाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक प्रकार का डिजिटल जुआ (online gambling) है, जहां खिलाड़ी के पास असली नियंत्रण नहीं होता। जिताने और हराने का खेल ऐप के मालिकों के हाथ में रहता है। कंपनी हमेशा अपना मुनाफ़ा सुरक्षित रखती है, जबकि यूज़र की जेब खाली होती जाती है।
सरकार ने भी ऐसे ऐप्स पर निगरानी तेज़ कर दी है। हाल ही में केंद्र ने संकेत दिया है कि पैसे से खेले जाने वाले गेम्स और सट्टा एप्स पर प्रतिबंध लगाया जाएगा क्योंकि इससे युवा लत के शिकार हो रहे हैं और परिवार आर्थिक संकट में फँस रहे हैं।
संदेश युवाओं के लिए:
युवाओं को चाहिए कि वे ऐसे एप्स से दूर रहें। शुरुआत में जीत का लालच भले ही आकर्षक लगे, लेकिन अंत में नुकसान सिर्फ़ यूज़र का होता है। मेहनत और कौशल से कमाई का कोई विकल्प नहीं है।



