सरायपाली/महासमुंद। सरायपाली क्षेत्र की केना सेवा सहकारी समिति में करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपए के कथित फर्जी KCC लोन घोटाले का मामला सामने आने के बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं कराए जाने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच में मृत किसानों के नाम पर भी KCC ऋण जारी किए जाने के साथ-साथ समिति क्षेत्र से बाहर के किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत किए जाने का मामला सामने आया है।
मामले की जांच के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त 2026 को महासमुंद के नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा को संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश जारी किए थे। बैंक के पत्र में FIR दर्ज कराने के बाद उसकी छायाप्रति मुख्य कार्यालय रायपुर भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं होने से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
मृत किसानों के नाम पर भी निकाला गया ऋणजांच रिपोर्ट के अनुसार मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि मृत किसानों के नाम पर भी KCC ऋण निकाले जाने की बात सामने आई है। वहीं कुछ किसानों के नाम पर ऋण जारी किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद किसानों ने बताया कि उन्हें इस ऋण की जानकारी तक नहीं थी।
जांच में यह भी सामने आया कि केना समिति क्षेत्र से बाहर के किसानों के नाम पर भी ऋण स्वीकृत किए गए। इस तरह करीब 1.77 करोड़ रुपए के ऋण में अनियमितता और कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।
जांच में छह लोगों के नाम सामने आए मामले की जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें केना समिति के तत्कालीन समिति प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा बैंक के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुंदर पटेल, वर्तमान सुपरवाइजर राज कुमार प्रधान, बैंक मैनेजर युवराज नायक, कनिष्ठ लिपिक हीरा सिंह ध्रुव और प्रभारी लेखापाल खिलेश्वर साहू शामिल हैं।
जांच के आधार पर बैंक स्तर पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई की गई है। वहीं समिति स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। 6 अगस्त को FIR के निर्देश, फिर भी अब तक अपराध दर्ज नहीं
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त को नोडल अधिकारी महासमुंद को निर्देशित किया था कि जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज कराई जाए और FIR की छायाप्रति मुख्य कार्यालय को भेजी जाए।
लेकिन निर्देश जारी होने के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अपराध दर्ज कराने में देरी किस स्तर पर हो रही है?
निलंबन की कार्रवाई हुई, FIR क्यों नहीं? करीब 1.77 करोड़ रुपए के किसान KCC ऋण से जुड़े इस मामले में विभागीय स्तर पर निलंबन की कार्रवाई तो की गई, लेकिन मृत किसानों के नाम पर ऋण जारी करने जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं होने से कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो सकता है कि मृत किसानों के नाम पर ऋण कैसे स्वीकृत हुए, ऋण की राशि किसके माध्यम से निकाली गई, किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ और इस पूरे मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है, जिम्मेदारों के नाम सामने आ चुके हैं और बैंक की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 6 अगस्त को FIR कराने के लिखित निर्देश भी दे दिए हैं, तो फिर अब तक अपराध दर्ज क्यों नहीं कराया गया?
करोड़ों रुपए के किसान ऋण से जुड़े इस मामले में FIR में हो रही देरी को लेकर अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।


