महासमुंद सरायपाली। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय सरायपाली में कक्षा 5वीं एवं 8वीं की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के मानदेय भुगतान को लेकर की गई शिकायत अब जांच के घेरे में पहुंच गई है। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द के आदेश के बाद केजुवां शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सह जांच अधिकारी ने संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को जांच के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि शिक्षा सत्र 2023-24 एवं 2024-25 में कक्षा 5वीं एवं 8वीं की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्राप्त मानदेय राशि के भुगतान को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी महासमुन्द के समक्ष शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर डीईओ कार्यालय महासमुन्द द्वारा 27 जुलाई 2026 को जांच के आदेश जारी किए गए।
जांच के संबंध में केजुवां शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य सह जांच अधिकारी द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि मामले की जांच 3 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सरायपाली में की जाएगी। संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों को निर्धारित तिथि और समय पर जांच स्थल पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रकाशचंद्र मांझी, सहायक ग्रेड-3 राजीव लोचन रथ सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को जांच में उपस्थित होने के लिए सूचित किया गया है। शिकायतकर्ता विनोद कुमार दास को भी जांच की सूचना दी गई है।
विनोद दास के अनुसार, शिक्षकों द्वारा उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन निष्ठापूर्वक एवं समयबद्ध तरीके से किए जाने के बावजूद उक्त कार्य के एवज में मिलने वाली मानदेय राशि के भुगतान को लेकर सवाल उठे हैं। उनके मुताबिक, विभाग की ओर से ₹96,552 की मानदेय राशि का चेक 28 मार्च 2025 को बीईओ कार्यालय सरायपाली को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
इस मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ द्वारा भी शिकायत किए जाने की बात कही गई है। मानदेय राशि प्राप्त होने के बाद वास्तविक रूप से किन शिक्षकों को कितना भुगतान किया गया, भुगतान की प्रक्रिया क्या रही और संबंधित अभिलेखों में क्या दर्ज है, इन सभी बिंदुओं पर जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
अब 3 सितंबर को होने वाली जांच में दस्तावेजों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मानदेय राशि का वास्तविक भुगतान किस प्रकार किया गया और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।



