रायपुर/31वीं किश्त ने दिया आर्थिक संबल, परिवार की जिम्मेदारियों के बीच बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
रायपुर, 31 अगस्त 2026।
महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई राह बन रही है। महासमुंद शहर के वार्ड नंबर 11 की हितग्राही श्रीमती सीता वर्मा की कहानी इस बदलाव की प्रेरक तस्वीर पेश करती है। योजना के तहत उन्हें अब तक 31वीं किश्त प्राप्त हो चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता ने उनके परिवार को सहारा देने के साथ उन्हें अपनी आजीविका मजबूत करने का अवसर दिया।
सिलाई मशीन बनी कमाई का जरिया
सीता वर्मा बताती हैं कि उनके परिवार में 11 सदस्य हैं। परिवार की बड़ी जिम्मेदारियों के बीच रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं था। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना की नियमित राशि उनके लिए बड़ा सहारा बनी। उन्होंने मिली आर्थिक सहायता का उपयोग सिलाई मशीन खरीदने में किया और घर से ही सिलाई का काम शुरू कर दिया।
शुरुआत में छोटे स्तर से शुरू हुआ काम धीरे-धीरे बढ़ने लगा। आसपास से सिलाई के काम मिलने लगे और उनकी मेहनत ने घर बैठे आय का नया जरिया तैयार कर दिया। अब सीता अपने हुनर से परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान दे रही हैं।
आर्थिक मदद के साथ मिला आत्मविश्वास
सीता वर्मा कहती हैं कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें सिर्फ आर्थिक मदद नहीं दी, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का हौसला भी दिया। पहले परिवार की जरूरतों के लिए कर्ज लेने की चिंता बनी रहती थी। अब नियमित आर्थिक सहायता और सिलाई से होने वाली आय ने उनकी परेशानियों को काफी कम किया है।
उनके लिए सिलाई मशीन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का साधन बन गई है। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए वे अब अपने हुनर को आय में बदल रही हैं और भविष्य को लेकर पहले से ज्यादा आत्मविश्वास महसूस करती हैं।
‘विष्णु भैया’ के प्रति जताया आभार
श्रीमती सीता वर्मा ने महिलाओं को लगातार आर्थिक संबल देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “विष्णु भैया जिस तरह परिवार के बड़े भाई की तरह महिलाओं की चिंता कर रहे हैं और नियमित किश्त दे रहे हैं, उससे हम जैसी महिलाओं की मुश्किलें आसान हुई हैं। अब हम भी अपने परिवार की जिम्मेदारियों को मजबूती से निभा पा रहे हैं।”
सीता वर्मा की कहानी बताती है कि जब आर्थिक संबल के साथ मेहनत और हुनर जुड़ जाए, तो सहायता का एक छोटा कदम भी आत्मनिर्भरता की बड़ी उड़ान बन सकता है।



