CG सरायपाली रायगढ़ खैर लकड़ी तस्करी मामले में सियासत गरमाई, विधायक प्रतिनिधि को लेकर भाजपा ने कांग्रेस से पूछे सवाल देखें वीडियोविधायक प्रतिनिधि से जुड़े गंभीर सवालों पर कांग्रेस की चुप्पी क्यों? भाजपा ने विधायक चतुरी नंद और कांग्रेस संगठन से मांगा जवाब सरायपाली/बलौदा। सरायपाली क्षेत्र में बेशकीमती खैर लकड़ी की कथित अवैध कटाई एवं तस्करी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष नीलांबर वी. तांडी ने कांग्रेस संगठन और सरायपाली विधानसभा की वर्तमान विधायक चतुरी नंद की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण में स्पष्टता की मांग की है।
नीलांबर वी. तांडी ने कहा कि भरत मेश्राम को सरायपाली विधायक चतुरी नंद द्वारा वन विभाग का विधायक प्रतिनिधि बनाया गया है तथा वे कांग्रेस संगठन में जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। ऐसे में यदि उनके विरुद्ध किसी मामले में कार्रवाई चल रही है और वे फरार बताए जा रहे हैं, तो कांग्रेस संगठन एवं विधायक चतुरी नंद को जनता के सामने अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति विशेष का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही, पारदर्शिता और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। विधायक प्रतिनिधि की नियुक्ति पर उठाए सवाल भाजपा मंडल अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब भरत मेश्राम को विशेष रूप से वन विभाग का विधायक प्रतिनिधि बनाया गया, तो आखिर उन्हें वन विभाग का प्रतिनिधित्व देने का उद्देश्य क्या था? क्या यह जिम्मेदारी केवल सामान्य समन्वय के लिए थी या इसके पीछे कोई विशेष राजनीतिक एवं प्रशासनिक उद्देश्य था? जनता को इसकी जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विधायक प्रतिनिधि की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और वह जनता, विधायक तथा प्रशासन के बीच समन्वय का कार्य करता है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि भरत मेश्राम की वन विभाग के विधायक प्रतिनिधि के रूप में नियुक्ति किन आधारों पर हुई, नियुक्ति से पहले उनका आवश्यक सत्यापन किया गया था या नहीं और वर्तमान परिस्थितियों में विधायक चतुरी नंद एवं कांग्रेस संगठन का उनके संबंध में आधिकारिक रुख क्या है।
नीलांबर वी. तांडी ने सवाल किया कि यदि विधायक चतुरी नंद को पूरे मामले की जानकारी थी तो भरत मेश्राम को वन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विषय का विधायक प्रतिनिधि क्यों बनाया गया और यदि जानकारी नहीं थी तो नियुक्ति से पहले आवश्यक सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
उन्होंने कहा कि खैर जैसी बेशकीमती वन संपदा से जुड़े विषय में विधायक प्रतिनिधि की भूमिका और जिम्मेदारी को देखते हुए यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि जिस व्यक्ति को वन विभाग का प्रतिनिधित्व सौंपा गया, उसी क्षेत्र में बहुमूल्य खैर लकड़ी की कथित अवैध कटाई एवं परिवहन को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं।
खैर लकड़ी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग श्री तांडी ने सरायपाली क्षेत्र में बेशकीमती खैर लकड़ी की कथित अवैध कटाई एवं परिवहन को लेकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच के माध्यम से यह स्पष्ट होना चाहिए कि अवैध कटाई और परिवहन के पीछे कौन लोग हैं तथा कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संरक्षण की भूमिका तो नहीं है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग के विधायक प्रतिनिधि की भूमिका, क्षेत्र में खैर लकड़ी की कथित अवैध कटाई एवं परिवहन तथा इस पूरे मामले से जुड़े लोगों के संबंधों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “जनता अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछ रही है और जवाब की अपेक्षा कर रही है। यह किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने का विषय नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल है। जब विधायक चतुरी नंद द्वारा भरत मेश्राम को वन विभाग का विधायक प्रतिनिधि बनाया गया है, तो जनता यह जानना चाहती है कि उन्हें यह जिम्मेदारी किस उद्देश्य से दी गई थी और इस जिम्मेदारी के दौरान उनकी भूमिका क्या रही। खैर लकड़ी से जुड़े कथित मामले और विधायक प्रतिनिधि की भूमिका पर कांग्रेस एवं विधायक चतुरी नंद को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मौन रहने से सवाल खत्म नहीं होंगे।”
लकड़ी तस्करी के आरोपी की गिरफ्तारी पर हंगामा, पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर बैठी महिला बसना। खैर लकड़ी तस्करी के मामले में फरार आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची रायगढ़ पुलिस को बसना में भारी विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस जब आरोपी मनीष अग्रवाल को पकड़कर ले जाने लगी, तो परिजनों ने हंगामा कर दिया और पुलिस टीम के साथ उनकी तीखी झूमाझटकी हुई। गिरफ्तारी से आक्रोशित परिजन पुलिस वाहन के सामने आ गए।
एक महिला आरोपी को ले जाने से रोकने के लिए पुलिस जीप के बोनट पर ही चढ़कर बैठ गई, जिससे मौके पर भारी तनाव की स्थिति बन गई। बोनट से महिला को हटाने के दौरान पुलिस और परिजनों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। इस दौरान एक महिला पुलिसकर्मी के सिर में चोट लगने की सूचना है।
रायगढ़ के जूटमिल थाने में साल 2025 में खैर लकड़ी की तस्करी का अपराध दर्ज हुआ था। आरोपी मनीष इस मामले में लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था। भारी हंगामे के बावजूद पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया और आरोपी मनीष अग्रवाल को गिरफ्तार कर अपने साथ ले जाने में सफल रही। इस पूरे घटनाक्रम की बसना में दिनभर चर्चा रही।
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रायगढ़ में फर्जी TP से लकड़ी तस्करी के इंटरस्टेट सिंडिकेट का खुलासा
रायगढ़ जिले में खैर और तेंदू प्रजाति की बेशकीमती लकड़ियों की कथित अवैध कटाई और तस्करी करने वाले इंटरस्टेट सिंडिकेट का पुलिस और वन विभाग ने खुलासा किया है। पुलिस ने रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया है। वहीं आरोपी भरत कुमार मेश्राम फरार बताया गया है, जिसकी तलाश की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक आरोपी ग्रामीणों को पैसे का लालच देकर धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार क्षेत्र के जंगलों से लकड़ी कटवाते थे। इसके बाद लकड़ी को गढ़उमरिया स्थित गोदाम में जमा कर छिलाई की जाती थी। यहां से ट्रांसपोर्ट के जरिए हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दूसरे राज्यों में भेजकर मुनाफा कमाया जाता था।
फर्जी TP बनाकर अवैध लकड़ी को दिखाते थे वैध
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा अवैध रूप से काटी गई लकड़ी की तस्करी को वैध दिखाने के लिए फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट (TP) का इस्तेमाल किया जाता था। वन विभाग की जांच में एक ऐसा TP मिला, जिस पर संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं थे। प्रथम दृष्टया दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
5 मई 2025 को गोदाम में मिला था अवैध लकड़ी का स्टॉक
पिछले साल 5 मई 2025 को वन विभाग की टीम ने जामटीकरा (गढ़उमरिया) स्थित नरेश अग्रवाल के गोदाम में दबिश दी थी। यह गोदाम रोहित मित्तल ने किराए पर लिया था।
कार्रवाई के दौरान ट्रक में लोड और गोदाम में रखी खैर व तेंदू की लकड़ी, कटर मशीन और अन्य सामान जब्त किया गया था। SSP शशि मोहन सिंह के मुताबिक गोदाम से 42 नग तेंदू के लट्ठे भी मिले थे। कार्रवाई के दौरान रोहित मित्तल अपने साथियों के साथ मौके से भाग गया था।
वन विभाग ने जांच के बाद पुलिस को दिया आवेदन
गोदाम से जब्त लकड़ी की ट्रांसपोर्टिंग के लिए आरोपियों ने वन अमले के सामने TP पेश किया था। जांच में TP पर संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिले। इसके बाद वन विभाग ने दस्तावेज की जांच की और इसे प्रथम दृष्टया फर्जी पाया।
मामले में विस्तृत जांच के लिए वन विभाग के रेंजर ने 2 सितंबर को जूटमिल थाने में आवेदन दिया। इसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और वन अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।
गोदाम से दूसरे राज्यों तक फैला था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार रोहित मित्तल ने गढ़उमरिया में गोदाम लेकर अवैध लकड़ी का स्टॉक कराया। उसका बिजनेस पार्टनर मनीष अग्रवाल लकड़ी की छिलाई के काम में शामिल था। वहीं भरत मेश्राम और सलाउद्दीन खान के जरिए लकड़ी को दूसरे राज्यों तक भेजने की बात सामने आई है।
तीन गिरफ्तार, एक आरोपी फरार पुलिस की विशेष टीम ने जांच के दौरान तीनों आरोपियों की भूमिका की पुष्टि के बाद रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को हिरासत में लिया। पूछताछ और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद शुक्रवार को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।
पुलिस अब फरार आरोपी भरत कुमार मेश्राम की तलाश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
SSP बोले- संगठित गिरोह की तरह कर रहे थे काम
SSP शशि मोहन सिंह ने बताया कि पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की है। जांच में पता चला कि आरोपी संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे। फर्जी TP के जरिए अवैध लकड़ी को वैध बताकर दूसरे राज्यों में भेजने की कोशिश की जा रही थी।



