Mahasamund -: झटका मशीन यानी मौत क़ा तार कितना वोल्ट करेंट हो रहा है प्रभावित, मशीन वैध या अवैध क्या कहते है अधिकारी सरायपाली बसना सहित जिले भर मे!महासमुंद -: किसी की भी हो सकता है मौत खेत के चारो और बिछाये है जा रहे मौत का तार ,यानी झटका मशीन, कितना करेंट दौड़ रहा है क्या कहते है अधिकारी ,झटका मशीन वैध या अवैध
जिले भर मे किसान अब अपने फसलों को बचाने के लिए झटका मशीन का उपयोग कर रहे है लेकिन कुछ सेकंड के लिए झटका देने वाला मशीन का उपयोग किसी आम व्यक्ति या जानवर के लिए मज़ाक बात नहीं अचानक लगे झटके से आदमी बेहोस और हार्ट अटैक से मौत भी हो सकता है देश मे झटका मशीन से कई ऐसी केश सामने आ चुके है बसना सरायपाली सहित जिले भर के किसानों द्वारा झटका तार का उपयोग किया जा रहा है इस मामले मे हमने संबंधित अधिकारियों से भी बात की अधिकारियों ने झटका तार के बारे मे क्या कहा यह जानने के पहले ये जानते है की यह कार्य कैसे करता है और कितने वोल्ट का करेंट प्रभावित होता है!
किसान अपनी फसलों को बचाने खातिर वन्यजीव और आमजन को खतरे में डाल रहे हैं। खेतों के चारों तरफ नंगे तारों की फेंसिंग करवाई गई है। इन तारों में बैटरी के जरिए करंट प्रभावित होता है। जैसे ही मवेशी या वन्यजीव इनसे टच होता है तो उसे 24 से 50 वोल्ट का करंट लग जाता है। इंटरनेट पर सर्च करने पर इसको मानव सुरक्षा के लिए घातक बताया गया है इस करेंट से जान भी जा सकती है और अचानक लगे करेंट से हार्ट अटैक से मौत भी हो सकती है किसानों का मानना है कि करंट का झटका के लगने से मवेशी वापस खेतों की तरफ रुख नहीं करता है। नाॅर्मल तारों और कांटों की फेंसिंग को तो मवेशी हटाकर खेतों में घुस जाते हैं। झटका मशीन उन्हें रोक रहा है।
जानवरों से फसलों को नुकसान की समस्या से जूझ रहे किसानों ने इलेक्ट्रिक झटका मशीन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। मशीन से जुड़े तारों की चपेट में आते ही जानवर या तो गश खाकर जमीन पर गिर पड़ेगा या फिर दौड़ता नजर आएगा। इसका इस्तेमाल बढ़ने से फसलों की रखवाली का झंझट कम हो गया है।
बारह हजार वोल्ट क्षमता की झटका मशीन करीब 50 बीघा खेत की मेड़ पर लगे तारों में करंट प्रवाहित रखने में सक्षम बताई जाती है। तीन से चार हजार रुपये कीमत की इस मशीन के बारे में बुटला के किसान प्रेमपाल ने बताया कि पिछले साल छुट्टा जानवरों से मक्का की फसल तबाह हो गई थी। इस बार बुआई से पहले ही खेत की तारकशी कराके झटका मशीन लगा दी। एक बार इसकी चपेट में आने के बाद कोई भी जानवर दोबारा फसल की तरफ देखने का भी नाम नहीं लेता। वैसे, कुछेक किसान 18 हजार वोल्ट की मशीन का भी इस्तेमाल करते हैं।
कटरी के गांवों के लोगों ने अपने अधिकतर खेतों के आसपास तारकशी करा दी है। हुसैनपुर खेड़ा निवासी किसान नजाकत का कहना है कि रात में फसलों की रखवाली के दौरान जंगली जानवरों में खासकर सुअरों के हमले का डर बना रहता है। शाम को खेत में मशीन रखकर तार जोड़ आओ, फिर घर आकर चैन से सो जाते हैं।
बाइक के प्लग जैसा होता है करंट
झटका मशीन से 12 हजार वोल्ट का डायरेक्ट करंट (डीसी) निकलता है, जो बाइक के प्लग से निकलने वाले करंट जैसा होता है। मशीन से करंट निरंतर नहीं, बल्कि कुछ क्षण के अंतराल से निकलता है। यह कह सकते हैं कि इससे जोर का झटका पर टुकड़ों में लगता है। मशीन में 12 वोल्ट की बैटरी का इस्तेमाल होता है। इसे चार्ज करने के लिए किसान सोलर पैनल लगवा लेते हैं।
ब्लेड लगे तारों के इस्तेमाल में गिरावट
जंगली और छुट्टा जानवरों से फसलों को बचाने के लिए पिछले सालों में ब्लेड लगे तारों का प्रयोग होता रहा है। ब्लेडयुक्त तारों का प्रयोग तो इन दिनों भी हो रहा है, लेकिन इसके रकबा में गिरावट आई है। बताते हैं कि ब्लेडयुक्त तार की बाड़ में फंसकर जानवर अमूमन लहूलुहान हो जाते रहे हैं। कभी-कभी तो लहूलुहान जानवरों की मौत भी हो जाती है। ऐसे तार हालांकि प्रतिबंधित हैं, लेकिन बाजार में खुलेआम बिक रहे हैं। ब्लेडयुक्त तारों ने सबसे ज्यादा संरक्षित प्रजाति के छुट्टा जानवरों को नुकसान पहुंचाया है।
हालांकि इस पुरे मामले मे कृषि विभाग महासमुंद बसना के अधिकारी एपि शामल ने कहा की कृषि विभाग से झटका मशीन को प्रमाण पत्र नहीं मिला है अधिकारी ने कहा की यह किसानो द्वारा ईजाद किया गया जुगाड़ है यह आम व्यक्ति और पालतू मवेसियो के लिए खतरनाक साबित होते है अधिकारी ने कहा की हम लोग तो किसानों को मना ही करते है अधिकारी ने किसानों से कहा की किसान अपना फसलों की सुरक्षा ऐसे तरीके से करें की किसी की जान और माल की हानी ना हो!



