सरायपाली: पड़ताल 35 मिनट में एक टैंकर, फिर रोज 60 कैसे? सरायपाली नगर पालिका के आंकड़ों पर बड़ा सवाल 24 घंटे में 29 घंटे का काम कैसे?
सरायपाली, 24 अप्रैल 2026।
भीषण गर्मी के बीच सरायपाली में पेयजल व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शहर में पिछले तीन वर्षों से संगम सेवा समिति द्वारा टैंकरों के माध्यम से निःशुल्क पानी उपलब्ध कराया जा रहा था, जिससे सैकड़ों लोगों को राहत मिल रही थी। लेकिन इस वर्ष नगर पालिका परिषद द्वारा पानी उपलब्ध कराने में असमर्थता जताने के बाद यह व्यवस्था अचानक बंद हो गई है, जिससे आमजन में नाराजगी बढ़ गई है।
नगर पालिका के पत्र से बढ़ा विवाद
नगर पालिका द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि शहर में पेयजल आपूर्ति ट्यूबवेल के माध्यम से की जा रही है, जहां से प्रतिदिन 50 से 60 टैंकर पानी भरकर विभिन्न वार्डों में भेजे जाते हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि एक टैंकर भरने में लगभग 30 से 35 मिनट का समय लगता है।
महाजनपद न्यूज की पड़ताल में बड़ा गणितीय विरोधाभास
यदि नगर पालिका के दावे को गणित के आधार पर परखा जाए, तो कई सवाल खड़े होते हैं।
एक टैंकर भरने में औसतन 35 मिनट लगते हैं, तो 50 टैंकर भरने में लगभग 1750 मिनट यानी करीब 29 घंटे का समय लगेगा, जबकि एक दिन में केवल 24 घंटे ही होते हैं।
ऐसे में नगर पालिका का 50 से 60 टैंकर प्रतिदिन भरने का दावा व्यवहारिक रूप से संभव नहीं दिखता।
जिम्मेदारों की चुप्पी
मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) दिनेश यादव से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके। बाद में कॉल रिसीव कर बिना जवाब दिए फोन काट दिया गया।
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष ने भी संक्षिप्त जवाब देते हुए पत्र का हवाला दिया और विस्तृत जानकारी देने से बचते नजर आए।
समिति अध्यक्ष के गंभीर आरोप
संगम सेवा समिति के अध्यक्ष प्रखर अग्रवाल ने नगर पालिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी समिति पानी के लिए निर्धारित शुल्क देने को तैयार है, इसके बावजूद पानी नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नगर पालिका 50–60 टैंकर चलाने का दावा कर रही है, तो वास्तव में केवल 5–6 टैंकर ही क्यों दिखाई देते हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
गर्मी में बढ़ी लोगों की परेशानी
तेज गर्मी के बीच पानी जैसी बुनियादी जरूरत प्रभावित होने से हालात चिंताजनक हो गए हैं। सामाजिक संगठनों द्वारा दी जा रही राहत व्यवस्था के बंद होने से ग्रामीण और शहरी गरीब वर्ग पर सीधा असर पड़ा है।
अब बड़ा सवाल यही है — क्या नगर पालिका अपने दावों पर स्पष्ट जवाब देगी, या यह मामला यूं ही सवालों में उलझा रहेगा?
महाजनपद न्यूज इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है।



