महासमुंद/ 10 नवंबर 2025 की रात कुहरी मोड़ से चोरी हुए थे करीब 100 DI पाइप, 12 नवंबर को दी गई थी शिकायत; अब सवाल—चोरी के कारण परियोजना में देरी होगी तो जिम्मेदार कौन? महासमुंद। तुमगांव जिले के 48 से अधिक गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित समोदा-अछोला मल्टी विलेज वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 10 लाख रुपए कीमत के DI पाइप चोरी होने का मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है। खास बात यह है कि चोरी की घटना को करीब 10 महीने बीत चुके हैं।
पुलिस के अनुसार परियोजना के तहत घोडारी से कुहरी मोड़ तक पाइपलाइन बिछाने के लिए ग्राम कुहरी मोड़ के पास DI पाइपों का स्टॉक रखा गया था। शिकायत के मुताबिक 10 नवंबर 2025 की रात करीब 11:50 बजे अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा करीब 100 DI पाइप चोरी कर लिए गए। इनकी अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपए बताई गई है।
कंपनी की ओर से 12 नवंबर 2025 को थाना तुमगांव में लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायत पर पुलिस ने धारा 303(2) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की।
करीब 10 महीने बाद भी उठ रहा सवाल चोरी की घटना को अब करीब 10 महीने हो चुके हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चोरी गए पाइपों का क्या हुआ? क्या पाइप बरामद हुए? आरोपियों की पहचान हुई या नहीं? और यदि पाइप उपलब्ध नहीं होने के कारण परियोजना के काम में देरी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
यह परियोजना 48 से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने से जुड़ी है। ऐसे में लोगों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि चोरी की घटना के बाद परियोजना का काम किस स्थिति में है और निर्धारित समय-सीमा पर इसका कितना असर पड़ा है।
क्या चोरी को बनाया जाएगा देरी का आधार? पाइप चोरी होना निश्चित रूप से एक गंभीर घटना है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या चोरी हुए पाइपों के कारण सरकारी पेयजल परियोजना का काम लंबे समय तक प्रभावित रहेगा? यदि ठेकेदार द्वारा चोरी हुए पाइपों की जगह नए पाइप उपलब्ध कराए जा सकते हैं, तो क्या काम को निर्धारित समय पर पूरा करने के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की गई?
यदि चोरी की घटना को आधार बनाकर परियोजना के काम में देरी होती है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सामग्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और देरी की जवाबदेही किसकी तय होगी।
विभाग की निगरानी भी सवालों के घेरे में समोदा-अछोला मल्टी विलेज वॉटर सप्लाई प्रोजेक्ट लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) महासमुंद के अंतर्गत संचालित सरकारी योजना है। इसलिए परियोजना से जुड़ी सामग्री की सुरक्षा, कार्य की प्रगति और निर्धारित समय में योजना पूरी कराने को लेकर संबंधित विभाग की निगरानी भी महत्वपूर्ण है।
करीब 10 महीने पहले हुई चोरी की घटना के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच में क्या सामने आता है और परियोजना एजेंसी तथा विभाग इस नुकसान की भरपाई कर 48 से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने का काम समय पर पूरा करते हैं या नहीं।
फिलहाल चोरी की घटना में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज है। अब सवाल सिर्फ 10 लाख रुपए के पाइपों की चोरी का नहीं, बल्कि 48 गांवों की पेयजल परियोजना की समय-सीमा और उसकी जवाबदेही का भी है।



