सरायपाली : शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण हटाने तहसीलदार ने किया आदेश जारी

सरायपाली। पुराना टैक्सी स्टैंड के पास स्थित शासकीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण और निर्माण के मामले में तहसीलदार सरायपाली ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह आदेश छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत जारी किया गया है। मामले में लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता भुजरंग साय पैकरा के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आदेश जारी किया गया है।

मामला उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर में दायर प्रकरण क्रमांक डब्ल्यूपीसी 3818/2026 से जुड़ा है। उच्च न्यायालय के 23 जुलाई 2026 के आदेश के पालन में जिला कलेक्टर के माध्यम से प्राप्त निर्देशों के आधार पर तहसील कार्यालय ने 3 सितंबर 2026 को मौके का निरीक्षण कराया। निरीक्षण के दौरान पंचनामा तैयार कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गय
जांच में सरायपाली स्थित खसरा नंबर 777 की कुल 7.453 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेख में शासकीय आबादी मद के रूप में दर्ज पाई गई। उक्त भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के कार्यालय भवन से संबंधित क्षेत्र में स्थित है। हल्का पटवारी की रिपोर्ट के अनुसार उप अभियंता भुजरंग साय पैकरा द्वारा परिवार सहित वर्ष 2009 से उक्त शासकीय भूमि पर निवास किया जा रहा है।

जांच में पुराने कार्यालय भवन के समीप करीब 798 वर्गफीट क्षेत्रफल में अनाधिकृत निर्माण पाए जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार निर्माण में डीपीसी कॉलम, दीवार सहित अन्य निर्माण किए गए थे। मौके पर लगभग दो फीट अतिरिक्त क्षेत्र में एस्बेस्टस से शेड का विस्तार भी पाया गया, जबकि डीपीसी के ऊपर करीब सात फीट ऊंची दीवार का निर्माण किए जाने का उल्लेख है।
तहसीलदार के आदेश में कहा गया है कि सुनवाई के दौरान अनावेदक द्वारा अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर खसरा नंबर 777 की शासकीय भूमि के 798 वर्गफीट क्षेत्र में किए गए नवीन अनाधिकृत अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण को हटाने का निर्देश दिया गया है।

आदेश के तहत भुजरंग साय पैकरा को सात दिनों के भीतर (17 सितंबर 2026) तक निर्माण सामग्री और अवैध निर्माण स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर राजस्व अमले और पुलिस बल की सहायता से अतिक्रमण हटाकर भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। इसका पूरा खर्च और उत्तरदायित्व अनावेदक का होगा।
राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी, मालजमादार और थाना प्रभारी सरायपाली को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने तथा पालन प्रतिवेदन तत्काल तहसील कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश 11 सितंबर 2026 को तहसीलदार सरायपाली द्वारा जारी किया गया।

जानें 2 से 5 साल के बच्चों के लिए कितना खतरनाक है स्क्रीन टाइम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दो से पांच वर्ष की उम्र के बच्चे दिन में एक घंटे से अधिक समय मोबाइल और टैबलेट पर वीडियो देखकर बिताते हैं तो उनके मस्तिष्क के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ी है जिन्हें बोलने में देरी की शिकायत के साथ अस्पताल लाया जा रहा है और इनमें कई मामलों में अत्यधिक स्क्रीन देखने तथा माता-पिता के साथ सीमित संवाद जैसी बातें सामने आती हैं।

रोहिणी स्थित डॉ.बाबा साहेब आंबेडकर अस्पताल में वरिष्ठ रेजिडेंट बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.राहुल दराल ने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम, खासकर ‘रील्स’ और ‘शॉर्ट्स’ जैसे तेजी से बदलने वाले वीडियो, छोटे बच्चों में बोलने की क्षमता के विकास और एकाग्रता पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं।ऐसा ही एक मामला राष्ट्रीय राजधानी के एक सरकारी अस्पताल में सामने आया। ढाई वर्ष के बच्चे को इसलिए अस्पताल लाया गया क्योंकि वह केवल “मम्मा”, “पापा” और कुछ गिने-चुने शब्द ही बोल पाता था जबकि उसकी उम्र के अन्य बच्चे छोटे-छोटे वाक्य बोलने लगे थे।

डॉक्टरों ने बताया कि जांच में उसकी सुनने की क्षमता, दृष्टि, तंत्रिका तंत्र और अन्य विकास संबंधी पहलू सामान्य पाए गए। विस्तृत जानकारी लेने पर पता चला कि वह प्रतिदिन छह से सात घंटे तक मोबाइल फोन पर कार्टून और छोटे वीडियो देखता था। खाना भी वह मोबाइल देखते हुए ही खाता था और फोन हटाने पर चिड़चिड़ा हो जाता था। उन्होंने बताया कि बच्चे में केवल बोलने की क्षमता का विकास अपेक्षाकृत धीमा पाया गया। उसके माता-पिता ने बताया कि दोनों के कामकाजी होने के कारण बच्चे के साथ बातचीत और ‘इंटरैक्टिव’ खेल काफी सीमित हो गए थे।

हालांकि मनोरंजन के लिए स्क्रीन का उपयोग पूरी तरह बंद करने, भोजन के दौरान किसी भी प्रकार की स्क्रीन का उपयोग न करने, प्रतिदिन कम से कम एक घंटे तक माता-पिता द्वारा बच्चे के साथ इंटरैक्टिव खेल खेलने, रोज़ाना चित्रों वाली किताबें पढ़कर सुनाने, रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान बच्चे से लगातार बातचीत करने और ‘स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी’ शुरू करने की सलाह दी गई जिससे उल्लेखनीय सुधार देखने को मिले।डॉ. दराल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि अत्यधिक ‘स्क्रीन टाइम’ के कारण आमने-सामने की बातचीत, कहानी सुनाना, किताबें पढ़ना और खेल जैसी गतिविधियां कम हो जाती हैं और यही गतिविधियां शुरुआती वर्षों में भाषा सीखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए लंबे समय तक स्क्रीन देखने से भाषा का विकास प्रभावित हो सकता है।

उनके अनुसार, ‘रील्स’ और ‘शॉर्ट्स’ जैसे वीडियो हर कुछ सेकेंड में नया कंटेंट दिखाते हैं जिससे मस्तिष्क को लगातार उत्तेजक संकेत मिलते हैं और बच्चों को पढ़ाई, किताबें या अन्य ऐसी गतिविधियां, जनका परिणाम धीरे-धीरे मिलता है, अपेक्षाकृत कम रोचक लगने लगती हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा, “ध्यान केंद्रित करने में कमी के लिए केवल ‘रील्स’ या ‘शॉर्ट्स’ को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधि, पालन-पोषण का तरीका और घर का वातावरण भी उतने ही महत्वपूर्ण कारक हैं।”डॉ दराल ने बताया, “लगातार स्क्रीन स्क्रॉल करने से मस्तिष्क का ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ बार-बार सक्रिय होता है। मस्तिष्क तुरंत मिलने वाले ‘रिवॉर्ड’ का अभ्यस्त हो सकता है। इसके कारण गृह कार्य, पढ़ाई, किताबें पढ़ना या संगीत का अभ्यास जैसी गतिविधियां बच्चों को कम आकर्षक लग सकती हैं।”उन्होंने सलाह दी कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मनोरंजन के लिए स्क्रीन से दूर रखा जाना चाहिए और दो से पांच वर्ष की आयु के बच्चों में मनोरंजन के लिए स्क्रीन का समय आदर्श रूप से प्रतिदिन एक घंटे से कम होना चाहिए।

डॉक्टर ने कहा कि बड़े बच्चों में यह सुनिश्चित करना अधिक महत्वपूर्ण है कि स्क्रीन टाइम के कारण उनकी नींद, पढ़ाई, शारीरिक गतिविधि और परिवार के साथ बिताया जाने वाला समय प्रभावित न हो।

डॉ दराल ने कहा, “समस्या का समाधान केवल मोबाइल छीन लेना नहीं, बल्कि स्वस्थ डिजिटल आदतें विकसित करना है। इसके लिए भोजन के समय और शयनकक्ष को स्क्रीन-मुक्त रखा जाए, सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दी जाए, बच्चों को प्रतिदिन कम से कम एक घंटा बाहर खेलने या शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित किया जाए तथा रोजाना कहानी सुनाने, किताब पढ़ने और बातचीत के लिए समय निकाला जाए।”उन्होंने कहा कि माता-पिता स्वयं भी संतुलित स्क्रीन उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत करें क्योंकि बच्चे सबसे अधिक सीख अपने आसपास के लोगों को देखकर ही लेते हैं।

CG : फिंगरप्रिंट लिया पर राशन नहीं दिया: साजापाली की राशन दुकान निलंबित

धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम साजापाली में शासकीय उचित मूल्य दुकान से खाद्यान्न वितरण नहीं किए जाने की शिकायत को जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान में लिया। शिकायत की जांच कराई गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित दुकान की संचालन एजेंसी ज्योति महिला स्व-सहायता समूह के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत प्रकरण दर्ज कर दुकान को निलंबित कर दिया गया।

जिला खाद्य अधिकारी ने बताया कि साजापाली स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में हितग्राहियों से फिंगर लेने के बाद भी माह अगस्त 2026 का खाद्यान्न वितरित नहीं किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। जिला प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई गई और जांच के आधार पर संबंधित संचालन एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई।
हितग्राहियों को खाद्यान्न प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन द्वारा तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की गई। साजापाली दुकान से संलग्न हितग्राहियों को माह अगस्त 2026 के खाद्यान्न का वितरण समीपस्थ ग्राम पंचायत चिड़ोडीह कॉलोनी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान से कराया गया। उक्त दुकान का संचालन जीवन ज्योति स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है।

इस व्यवस्था के बाद साजापाली से संलग्न हितग्रियों को अगस्त माह का खाद्यान्न मिल गया है। जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत संचालित उचित मूल्य दुकानों की व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है। खाद्यान्न वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्मार्ट मीटर को लेकर भ्रम दूर, CSPDCL ने स्पष्ट किए निर्देश

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, राजनांदगांव क्षेत्र ने कबीरधाम जिले में स्मार्ट मीटर स्थापना को लेकर उपभोक्ताओं के बीच बनी असमंजस की स्थिति को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर की स्थापना केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। विद्युत मंत्रालय ने 12 अगस्त 2026 को सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्मार्ट मीटर स्थापना के कार्य में तेजी लाने के निर्देश जारी किए हैं।
विद्युत मंत्रालय के निर्देशानुसार, जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध है, वहां सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को भारतीय मानकों के अनुरूप स्मार्ट मीटर के माध्यम से विद्युत आपूर्ति की जानी है। इसके तहत स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य निरंतर जारी रखते हुए इसमें तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। कबीरधाम जिले में 1 लाख 17 हजार 302 स्मार्ट मीटर लगाएं गए है। स्मार्ट मीटर स्थापना का कार्य व्यापक स्तर पर जारी है और बड़ी संख्या में उपभोक्ता इस आधुनिक मीटरिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं।

स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को बिजली खपत के आधार पर सटीक एवं पारदर्शी बिलिंग की सुविधा मिलेगी। साथ ही उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर बेहतर तरीके से नजर रख सकेंगे। स्मार्ट मीटर व्यवस्था भविष्य में समय आधारित बिजली दर जैसी सुविधाओं के उपयोग में भी सहायक होगी। इसके माध्यम से उपभोक्ता अधिक दर वाले समय में बिजली का उपयोग कम तथा कम दर वाले समय में उपयोग बढ़ाकर अपने बिजली बिल में संभावित कमी ला सकेंगे। स्मार्ट मीटर से विद्युत वितरण कंपनी को भी बिजली खपत का सटीक लेखा-जोखा, बेहतर निगरानी एवं वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इससे विद्युत आपूर्ति एवं उपभोक्ता सेवाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक और अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिल रहा है।

देश के विभिन्न राज्यों में तेजी से हो रहा स्मार्ट मीटर स्थापना कार्य
विद्युत मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य जारी रखने तथा इसकी गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसी दिशा में देश के विभिन्न राज्यों में स्मार्ट मीटर स्थापना का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इनमें केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित अन्य राज्य शामिल हैं।
अफवाहों पर ध्यान न दें, अधिकृत जानकारी पर करें भरोसा
सीएसपीडीसीएल ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि स्मार्ट मीटर को लेकर सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों से प्रसारित होने वाली अफवाहों एवं अपुष्ट जानकारियों पर ध्यान न दें। स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए विद्युत विभाग के अधिकृत माध्यमों एवं अधिकारियों से ही जानकारी प्राप्त करें।स्मार्ट मीटर व्यवस्था का उद्देश्य विद्युत बिलिंग में सटीकता, पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का समावेश करते हुए उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सेवा उपलब्ध कराना है।

छत्तीसगढ़ में भूमि उपयोग नियमों में बड़ा बदलाव, कृषि और सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था

छत्तीसगढ़ में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, स्पष्ट एवं व्यावहारिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए Negative List आधारित व्यवस्था अपनाने का प्रावधान किया गया है। यह पहल केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने के व्यापक सुधारों के अनुरूप है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए तथा विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी तथा प्रदेश में निवेश, रोजगार और अधोसंरचना विकास को गति मिलेगी।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नियमन को समाप्त करना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाना है। Negative List आधारित व्यवस्था के माध्यम से प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाएं कम होंगी। इससे बदलती आर्थिक एवं सामाजिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक बनेगी।
मंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत विजन@2047 के अनुरूप और भारत सरकार के डीरिगुलेशन एवं ईज ऑफ लिविंग से जुड़े सुधारों की दिशा में छत्तीसगढ़ लगातार नीतिगत सुधार कर रहा है। आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में ग्रामीण और शहरी विकास को गति देने के लिए अनेक सुधार किए गए हैं। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव प्रदेश के आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति देगा।
उन्होंने कहा कि इस सुधार से मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोगों को अधिक लचीला, व्यावहारिक और समयानुकूल बनाया जा सकेगा। इसका लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा और भूमि उपयोग से संबंधित प्रक्रियाओं में आने वाली कठिनाइयों को कम करने का मार्ग प्रशस्त होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के साथ-साथ नियोजित विकास और आवश्यक प्रतिबंधों के बीच संतुलन स्थापित करना है।
प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्ट सूची, अन्य गतिविधियों के लिए व्यापक अवसर
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों में केवल निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी की Negative List में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को अनुमत माना जाएगा। इससे वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई गतिविधियों के लिए भी अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्ताव में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद तथा कृषि भूमि उपयोग के लिए अलग-अलग निषिद्ध गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है। इससे प्रत्येक क्षेत्र की प्रकृति, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और विकास की जरूरतों के अनुरूप स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था विकसित होगी।
आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता
आवासीय भूमि उपयोग के अंतर्गत प्रदूषणकारी उद्योगों, बड़े भंडारण, कबाड़खानों, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन एवं मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है। इससे आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यावरणीय गुणवत्ता और बेहतर जीवन-परिस्थितियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियोजन
वाणिज्यिक भूमि उपयोग में नारंगी, लाल एवं नीली श्रेणी के उद्योगों, खतरनाक एवं विषाक्त रसायनों तथा विस्फोटक पदार्थों के भंडारण सहित पशुपालन, मछली पालन, डेयरी एवं कुक्कुट पालन, दाह संस्कार/कब्रिस्तान तथा खनन गतिविधियों को निषिद्ध करने का प्रावधान किया गया है।
वहीं औद्योगिक भूमि उपयोग में पूर्णतः आवासीय टाउनशिप, अनुमत कर्मचारी आवास को छोड़कर छात्रावास एवं शयनागार, विद्यालय, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार, बड़े परिवहन टर्मिनल, थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और असंगत गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है।

कृषि, सार्वजनिक और परिवहन क्षेत्रों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था
कृषि भूमि उपयोग में आवासीय अभिन्यास, किफायती जन आवास एवं एकीकृत उपनगर को छोड़कर बड़े वाणिज्यिक परिसर, खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग, विभिन्न श्रेणी के उद्योग, उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं तथा बड़े मॉल जैसी गतिविधियों को निषिद्ध रखने का प्रस्ताव है।
इसी प्रकार सार्वजनिक एवं अर्द्ध-सार्वजनिक, परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग के लिए भी असंगत, प्रदूषणकारी, खतरनाक एवं अत्यधिक भारी गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निषिद्ध किया गया है। इससे निर्धारित भूमि उपयोग और संबंधित क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।
नई अर्थव्यवस्था और बदलती जरूरतों के अनुरूप नियोजन
तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नई सेवाओं, संस्थाओं, व्यवसायों और तकनीकी गतिविधियों के स्वरूप भी लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में पहले से तय गतिविधियों की लंबी सूची के बजाय स्पष्ट रूप से निर्धारित निषिद्ध गतिविधियों के आधार पर नियमन करने से नई और उभरती गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था से अनावश्यक अनुपालन बोझ कम होने के साथ विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही निवेशकों के लिए अधिक स्पष्ट और पूर्वानुमानित नियामकीय वातावरण तैयार होगा। इससे प्रदेश के शहरों और कस्बों में नियोजित विकास को बढ़ावा देने के साथ आवास, व्यापार, सेवाओं और अधोसंरचना से जुड़ी बदलती जरूरतों को पूरा करने में भी सुविधा होगी।

नागरिकों और संबंधित पक्षों से मांगे गए सुझाव
प्रस्तावित संशोधन पर नागरिकों एवं संबंधित पक्षों से आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से 15 दिवस की अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर शासन द्वारा विचार किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियमों में प्रस्तावित संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित यह बदलाव छत्तीसगढ़ में सरल नियमन, कम अनुपालन बोझ, स्पष्ट नियोजन और विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार है। इससे प्रदेश की बदलती विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन व्यवस्था को अधिक लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलेगी।

महासमुंद : अन्य पिछड़ा वर्ग के हित में संचालित योजनाओं की होगी व्यापक समीक्षा

महासमुंद : अन्य पिछड़ा वर्ग के हित में संचालित योजनाओं की होगी व्यापक समीक्षा

क्रीमीलेयर निर्धारण, जाति प्रमाण-पत्र और हितग्राही योजनाओं की प्रगति पर होगी विशेष चर्चा

महासमुंद, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, रायपुर द्वारा महासमुंद जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग के हितार्थ संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जिला स्तरीय समीक्षा की जाएगी। आयोग के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा श्री नेहरू राम निषाद तथा उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा श्रीमती चन्द्रकांति वर्मा की मौजूदगी में यह समीक्षा बैठक आयोजित होगी।

जिला स्तरीय विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक 16 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष, महासमुंद में होगी। बैठक में राज्य एवं केन्द्र शासन द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के हित में संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विभागवार समीक्षा की जाएगी।

क्रीमीलेयर और जाति प्रमाण-पत्रों पर विशेष फोकस

बैठक में अन्य पिछड़ा वर्ग के क्रीमीलेयर निर्धारण से संबंधित विषयों पर विशेष चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित जाति प्रमाण-पत्रों के जारी किए गए तथा लंबित प्रकरणों की वस्तुस्थिति की भी समीक्षा होगी। अधिकारियों से लंबित प्रकरणों की अद्यतन स्थिति और उनके निराकरण से संबंधित जानकारी प्रस्तुत करने को कहा गया है।

योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की जानकारी होगी प्रस्तुत

सभी जिला स्तरीय अधिकारियों एवं राजस्व अधिकारियों को अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी निर्धारित प्रपत्र में तैयार कर बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा हितग्राही मूलक योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित लोगों की नाम एवं पता सहित सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। योजनाओं से लाभान्वित सफल हितग्राहियों की सफलता की कहानी भी तैयार कर बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। सफलता की कहानियों को पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन अथवा हार्ड कॉपी के माध्यम से पृथक रूप से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

समीक्षा बैठक के माध्यम से जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए संचालित योजनाओं की वास्तविक प्रगति, पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच तथा लंबित प्रकरणों के निराकरण की स्थिति का जायजा लिया जाएगा।

बसना/ कोरबा के व्यक्ति को सड़क हादसा समझकर अस्पताल लाया गया, मौत के बाद जांच में हत्या का संदेह; बड़े साजापाली सहित दो लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज

 

भंवरपुर। महासमुंद जिले के भंवरपुर चौकी क्षेत्र में 50 वर्षीय परदेशी यादव की संदिग्ध मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। शुरुआत में मामला सड़क दुर्घटना से जुड़ा बताया गया था, लेकिन मर्ग जांच के दौरान मृतक के सिर और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चोट, खरोंच और संघर्ष के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका पर जांच आगे बढ़ाई। डॉक्टर की शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण Traumatic Injury और Internal Cerebral Hemorrhage बताया गया है। वहीं मृत्यु की प्रकृति “Most probably Homicidal” यानी प्रथम दृष्टया संभवतः हत्या से संबंधित बताई गई है। इसके बाद पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस दस्तावेज के अनुसार, मृतक परदेशी यादव पिता धोबाराम यादव, उम्र 50 वर्ष, निवासी कुदरीपारा बांकीमोंगरा, थाना बांकीमोंगरा, जिला कोरबा था। मर्ग पंजी में घटना की तारीख 10 सितंबर 2026 दर्ज है। इसी दिन सुबह करीब 6 बजे परदेशी यादव को श्री श्याम अस्पताल भंवरपुर लाया गया था। अस्पताल में डॉक्टर द्वारा जांच किए जाने पर उसकी मौत हो चुकी थी।

अस्पताल की ओर से वार्ड बॉय बसंत दास पिता ननकी दास, उम्र 44 वर्ष, निवासी श्री श्याम अस्पताल भंवरपुर द्वारा पुलिस को लिखित सूचना दी गई। आवेदन में बताया गया कि परदेशी यादव को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था और जांच में उसकी मृत्यु हो चुकी थी। अस्पताल की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि उसे भानू प्रताप लहरे, निवासी बांकीमोंगरा कुदरीपारा, जिला कोरबा द्वारा अस्पताल लाया गया था। मरीज के चेहरे और सिर पर चोट के निशान होने की जानकारी देते हुए पुलिस से मौके पर पहुंचकर अग्रिम कार्रवाई का अनुरोध किया गया।

मर्ग जांच में सामने आए चोट और संघर्ष के निशान

अस्पताल की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मर्ग पंचनामा कार्रवाई शुरू की। मर्ग पंजी में मृतक की मृत्यु का कारण उस समय अज्ञात बताया गया था। इसके बाद चौकी भंवरपुर में पदस्थ सउनि प्रकाश नंद ने मर्ग क्रमांक 126/2026, धारा 194 बीएनएसएस के तहत जांच की। मर्ग पंचनामा, कथन, घटनास्थल निरीक्षण और शव निरीक्षण के दौरान मृतक के सिर एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोट और खरोंच के साथ संघर्ष के निशान पाए जाने का उल्लेख पुलिस दस्तावेज में किया गया है।

शॉर्ट पीएम में डॉक्टर ने बताई हत्या की आशंका

मामले में डॉक्टर द्वारा किए गए शॉर्ट पोस्टमार्टम में मृत्यु का कारण Traumatic Injury and Internal Cerebral Hemorrhage बताया गया। रिपोर्ट में मृत्यु की प्रकृति “Most probably Homicidal” लिखी गई है। हालांकि डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसकी पुष्टि परिस्थितिजन्य साक्ष्य और आगे की पुलिस जांच के बाद की जाएगी। यानी शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में हत्या की आशंका जताई गई है, जबकि अंतिम स्थिति जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

मृतक के भांजे समेत पंचों ने जताया संदेह

मर्ग जांच के दौरान मृतक परदेशी यादव के भांजे अमन कुमार साहनी सहित अन्य पंचों के कथन लिए गए। पुलिस दस्तावेज के मुताबिक, इन लोगों ने अपने-अपने कथनों में भानूप्रताप लहरे और मनोहर कोसरिया पर परदेशी यादव की हत्या किए जाने का संदेह जताया।

मर्ग जांच में सामने आए तथ्यों, घटनास्थल एवं शव निरीक्षण में मिले चोट-खरोंच और संघर्ष के निशान तथा संबंधित लोगों के कथनों के आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ अपराध दर्ज करने की कार्रवाई की।

दो लोगों के खिलाफ 103(1), 3(5) बीएनएस में मामला

पुलिस दस्तावेज में आरोपी के रूप में भानूप्रताप लहरे, निवासी बांकीमोंगरा, जिला कोरबा तथा मनोहर कोसरिया, निवासी बड़े साजापाली, चौकी भंवरपुर, थाना बसना का नाम दर्ज है। दोनों के खिलाफ धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

प्रथम सूचना प्रतिवेदन के अनुसार मामला चौकी भंवरपुर अपराध क्रमांक 00/2026 से संबंधित है। 11 सितंबर 2026 को चौकी भंवरपुर की बिना नंबरी नालसी को चौकी प्रभारी के आदेश पर असल नंबरी अपराध कायम करने के लिए थाना बसना भेजा गया।

घटना, अस्पताल और पुलिस सूचना के समय में अंतर

मर्ग पंजी में घटना की तारीख 10 सितंबर 2026 और घटना का समय शाम करीब 6 बजे दर्ज है। वहीं अस्पताल की रिपोर्ट में परदेशी यादव को उसी दिन सुबह 6 बजे अस्पताल लाए जाने का उल्लेख है और अस्पताल से पुलिस को सूचना देने का समय दोपहर 1:30 बजे दर्ज है। प्रथम सूचना प्रतिवेदन में थाने पर सूचना प्राप्त होने का समय 11 सितंबर 2026 को दोपहर 2:45 बजे दर्ज किया गया है। अपराध दर्ज करने में देरी का कारण दस्तावेज में “मर्ग जांच पर से” बताया गया है।

बड़े साजापाली बताया गया घटनास्थल

प्रथम सूचना प्रतिवेदन में घटनास्थल का पता ग्राम बड़े साजापाली, चौकी भंवरपुर, थाना बसना दर्ज है। थाना से घटनास्थल की दिशा उत्तर और दूरी करीब 17 किलोमीटर बताई गई है। सूचना का प्रकार लिखित दर्ज है और अभियोगी/सूचनाकर्ता शासन की ओर से सउनि प्रकाश नंद, पिता बी. नंद, उम्र 58 वर्ष, चौकी भंवरपुर, थाना बसना, जिला महासमुंद बताए गए हैं।

गिरफ्तारी को लेकर दस्तावेज में स्पष्ट जानकारी नहीं

मामले में पुलिस ने मर्ग जांच के आधार पर दोनों के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है। हालांकि उपलब्ध प्रथम सूचना दस्तावेज में भानूप्रताप लहरे और मनोहर कोसरिया की गिरफ्तारी हुई है या दोनों फरार हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी दर्ज नहीं है। इसलिए फिलहाल इतना ही सामने आया है कि दोनों के खिलाफ धारा 103(1), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

अब पुलिस की आगे की विवेचना में घटनास्थल, परिस्थितिजन्य साक्ष्य, संबंधित लोगों के कथन और पोस्टमार्टम से जुड़े तथ्यों के आधार पर परदेशी यादव की मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी।

महासमुंद : अस्वच्छ व्यवसाय में कार्यरत परिवारों के विद्यार्थियों को मिलेगी प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति

  1. महासमुंद : अस्वच्छ व्यवसाय में कार्यरत परिवारों के विद्यार्थियों को मिलेगी प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति

महासमुंद, 11 सितम्बर 2026।

लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशानुसार केन्द्र प्रवर्तित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत अस्वच्छ व्यवसाय में कार्यरत परिवारों के कक्षा 1वीं से 10वीं तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाएगा।

योजना के अंतर्गत गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3,500 रुपये तथा छात्रावासी विद्यार्थियों को 8,000 रुपये प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।

आय सीमा की बाध्यता नहीं

शिक्षा विभाग के अनुसार यह छात्रवृत्ति व्यवसाय आधारित योजना है। इसके लिए किसी प्रकार की आय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए संबंधित परिवार का व्यवसाय प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनवाना आवश्यक होगा।

सितम्बर से शुरू होगा पंजीयन

छात्रवृत्ति पोर्टल पर सितम्बर माह से विद्यार्थियों के पंजीयन एवं सत्यापन की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। शिक्षा विभाग ने पात्र विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने संबंधित विद्यालय से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया समय पर पूर्ण कराएं।

विभाग का उद्देश्य है कि योजना के तहत पात्र कोई भी विद्यार्थी छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित न रहे।

महासमुंद में प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने ली विभागीय समीक्षा बैठक

महासमुंद में प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने ली विभागीय समीक्षा बैठक

अधूरे कार्य जल्द पूरे करने, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश

महासमुंद, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा महासमुंद जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं, विकास कार्यों और निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

प्रभारी मंत्री ने सभी निर्माण एजेंसियों को स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी, आरईएस सहित अन्य निर्माण एजेंसियों को समय पर कार्य पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने वीबी रामजी योजना के अंतर्गत पीडीएस एवं आजीविका डबरी के लिए कार्ययोजना तैयार कर अधिक से अधिक पात्र प्रकरणों को स्वीकृति देने के निर्देश दिए। वहीं बिहान योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को बैंक ऋण से जोड़ने के लिए शिविर आयोजित करने और शिविरों में बैंकर्स की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

पंचायतों में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि शासकीय राशि के दुरुपयोग या गबन की स्थिति सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार वसूली की कार्रवाई की जाए।

राशन कार्ड की ई-केवाईसी जल्द पूरी कराने के निर्देश

खाद्य विभाग की समीक्षा में प्रभारी मंत्री ने शेष राशन कार्डों की ई-केवाईसी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने उचित मूल्य की दुकानों में खाद्यान्न का समय पर भंडारण एवं वितरण सुनिश्चित करने तथा हितग्राहियों को राशन प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने को कहा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष जोर

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मौसमी बीमारियों को देखते हुए आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से एंटी-वेनम और रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही टीबी और मलेरिया उन्मूलन के लिए मैदानी स्तर पर निगरानी एवं जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए गए। मेडिकल स्टोर्स में नशीली दवाइयों के अवैध विक्रय एवं दुरुपयोग पर नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया।

आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी

महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा में अपूर्ण आंगनबाड़ी भवनों को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से आंगनबाड़ी केंद्रों का सतत निरीक्षण करने तथा बच्चों और हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी नियमित निगरानी करने को कहा गया।

बैठक में राजस्व, पशुपालन, कृषि, शिक्षा सहित अन्य विभागों की भी विभागवार समीक्षा की गई। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री अनुपमा आनंद, डीएफओ श्री श्रीनिवास एन.टी. सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

पिथौरा/ विकास कार्यों में देरी और लापरवाही पर विधायक डॉ. संपत अग्रवाल सख्त, अधिकारियों को समय-सीमा और गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के कड़े निर्देश

त्रिवेंद्र जगत पिथौरा। जनपद पंचायत सभागार में विकासखंड स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विभिन्न विभागों के कामकाज और शासन की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में विधायक ने अधिकारियों से योजनाओं और निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए।

विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि, विद्युत, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा समाज कल्याण सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों से एक-एक कर उनके विभाग में चल रहे कार्यों और योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है।

 लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनीसमीक्षा के दौरान विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के साथ गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर अधिकारियों के पास पहुंचती है। ऐसे में आवेदनों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि लोगों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े

पेयजल, सड़क और बिजली व्यवस्था पर भी जोर बैठक में आगामी मौसम और स्थानीय जरूरतों को देखते हुए पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सड़कों की आवश्यक मरम्मत कराने और विद्युत आपूर्ति सुचारू बनाए रखने पर भी विधायक ने अधिकारियों को निर्देशित किया।

 

विधायक ने कहा कि विभागीय समीक्षा का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी लेना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की स्थिति जानना और जनता को उसका वास्तविक लाभ दिलाना है।

 

बैठक में पिथौरा जनपद पंचायत अध्यक्ष ऊषा पुरुषोत्तम धृतलहरे, उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल, जिला उपाध्यक्ष भाजपा एवं विधायक प्रतिनिधि हरप्रसाद पटेल, जिला प्रवक्ता भाजपा स्वप्निल तिवारी, जनपद सदस्य एवं विधायक प्रतिनिधि पुरुषोत्तम धृतलहरे, जनपद पंचायत सभापति दिनेश अग्रवाल, विधायक प्रतिनिधि बसना कैलाश अग्रवाल, सभापति कंवलजीत छाबड़ा, जिला उपाध्यक्ष युवा मोर्चा विजय नायक, निज सचिव नरेंद्र बोरे, विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र पांडेय, सुमित अग्रवाल, खेमराज अग्रवाल, पुष्पराज गजेंद्र, एसडीएम पिथौरा बजरंग वर्मा, विधायक प्रतिनिधि अनूप अग्रवाल सहित जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधि, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।