महासमुंद में प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने ली विभागीय समीक्षा बैठक

महासमुंद में प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने ली विभागीय समीक्षा बैठक

अधूरे कार्य जल्द पूरे करने, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश

महासमुंद, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा महासमुंद जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभाकक्ष में जिला स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं, विकास कार्यों और निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

प्रभारी मंत्री ने सभी निर्माण एजेंसियों को स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीडब्ल्यूडी, आरईएस सहित अन्य निर्माण एजेंसियों को समय पर कार्य पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने वीबी रामजी योजना के अंतर्गत पीडीएस एवं आजीविका डबरी के लिए कार्ययोजना तैयार कर अधिक से अधिक पात्र प्रकरणों को स्वीकृति देने के निर्देश दिए। वहीं बिहान योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को बैंक ऋण से जोड़ने के लिए शिविर आयोजित करने और शिविरों में बैंकर्स की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

पंचायतों में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मंत्री ने कहा कि शासकीय राशि के दुरुपयोग या गबन की स्थिति सामने आने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार वसूली की कार्रवाई की जाए।

राशन कार्ड की ई-केवाईसी जल्द पूरी कराने के निर्देश

खाद्य विभाग की समीक्षा में प्रभारी मंत्री ने शेष राशन कार्डों की ई-केवाईसी प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने उचित मूल्य की दुकानों में खाद्यान्न का समय पर भंडारण एवं वितरण सुनिश्चित करने तथा हितग्राहियों को राशन प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने को कहा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष जोर

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मौसमी बीमारियों को देखते हुए आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से एंटी-वेनम और रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही टीबी और मलेरिया उन्मूलन के लिए मैदानी स्तर पर निगरानी एवं जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए गए। मेडिकल स्टोर्स में नशीली दवाइयों के अवैध विक्रय एवं दुरुपयोग पर नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया।

आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी

महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा में अपूर्ण आंगनबाड़ी भवनों को शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से आंगनबाड़ी केंद्रों का सतत निरीक्षण करने तथा बच्चों और हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी नियमित निगरानी करने को कहा गया।

बैठक में राजस्व, पशुपालन, कृषि, शिक्षा सहित अन्य विभागों की भी विभागवार समीक्षा की गई। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री अनुपमा आनंद, डीएफओ श्री श्रीनिवास एन.टी. सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

पिथौरा/ विकास कार्यों में देरी और लापरवाही पर विधायक डॉ. संपत अग्रवाल सख्त, अधिकारियों को समय-सीमा और गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने के कड़े निर्देश

त्रिवेंद्र जगत पिथौरा। जनपद पंचायत सभागार में विकासखंड स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने विभिन्न विभागों के कामकाज और शासन की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में विधायक ने अधिकारियों से योजनाओं और निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेते हुए विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए।

विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, कृषि, विद्युत, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा समाज कल्याण सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों से एक-एक कर उनके विभाग में चल रहे कार्यों और योजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है।

 लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनीसमीक्षा के दौरान विधायक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के साथ गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर अधिकारियों के पास पहुंचती है। ऐसे में आवेदनों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निराकरण किया जाए, ताकि लोगों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़े

पेयजल, सड़क और बिजली व्यवस्था पर भी जोर बैठक में आगामी मौसम और स्थानीय जरूरतों को देखते हुए पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सड़कों की आवश्यक मरम्मत कराने और विद्युत आपूर्ति सुचारू बनाए रखने पर भी विधायक ने अधिकारियों को निर्देशित किया।

 

विधायक ने कहा कि विभागीय समीक्षा का उद्देश्य केवल योजनाओं की जानकारी लेना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की स्थिति जानना और जनता को उसका वास्तविक लाभ दिलाना है।

 

बैठक में पिथौरा जनपद पंचायत अध्यक्ष ऊषा पुरुषोत्तम धृतलहरे, उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल, जिला उपाध्यक्ष भाजपा एवं विधायक प्रतिनिधि हरप्रसाद पटेल, जिला प्रवक्ता भाजपा स्वप्निल तिवारी, जनपद सदस्य एवं विधायक प्रतिनिधि पुरुषोत्तम धृतलहरे, जनपद पंचायत सभापति दिनेश अग्रवाल, विधायक प्रतिनिधि बसना कैलाश अग्रवाल, सभापति कंवलजीत छाबड़ा, जिला उपाध्यक्ष युवा मोर्चा विजय नायक, निज सचिव नरेंद्र बोरे, विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र पांडेय, सुमित अग्रवाल, खेमराज अग्रवाल, पुष्पराज गजेंद्र, एसडीएम पिथौरा बजरंग वर्मा, विधायक प्रतिनिधि अनूप अग्रवाल सहित जनपद पंचायत के जनप्रतिनिधि, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

सरायपाली : इंडसइंड बैंक में बड़ा घोटाला? जांच के दौरान अधिकारियों पर लगा सबूत मिटाने और CCTV फुटेज छुपाने का गंभीर आरोप

महासमुंद। इंडसइंड बैंक के भीतर एक बड़े आंतरिक घोटाले और उसे दबाने के लिए उच्च अधिकारियों द्वारा सबूतों को नष्ट करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने बैंक के प्रबंध निदेशक और भारतीय रिजर्व बैंक को ईमेल भेजकर मामले की निष्पक्ष केंद्रीय जांच कराने की मांग की है। यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र का बताया जा रहा है।

आरोप है कि जांच अधिकारी राजीव उपाध्याय ने कैशियर गुण सागर के कंप्यूटर में एक संदिग्ध ईमेल देखा। जब उन्हें पता चला कि यह ईमेल विद्या शंकर साहू के सिस्टम से आया है, तो वे तुरंत कैबिन से बाहर आए और विद्या शंकर साहू के कंप्यूटर से उस महत्वपूर्ण ईमेल को डिलीट कर दिया। जब गवाहों ने उस ईमेल का प्रिंट आउट मांगा, तो अधिकारी ने यह कहकर मना कर दिया कि ईमेल में कुछ नहीं था और वह रिकवर नहीं हो सकता।

स्टेट हेड ने CCTV फुटेज दिखाने से किया मना : शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब घटना के समय का CCTV फुटेज दिखाने की मांग की गई, तो बैंक के स्टेट हेड सचिन चौरसिया ने यह बहाना बनाकर मना कर दिया कि उनके पास केवल ३० दिनों का ही बैकअप रहता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्टेट हेड ने सच को सामने आने से रोकने के लिए फुटेज की जांच करने का कोई प्रयास ही नहीं किया।

स्थानीय अधिकारियों पर अविश्वास, ट्रांसफर और फॉरेंसिक जांच की मांग : शिकायतकर्ता ने बैंक के शीर्ष प्रबंधन से निम्नलिखित तात्कालिक मांगें की हैं:CCTV फुटेज फ्रीज हो: स्थानीय स्तर पर सबूत नष्ट होने से बचाने के लिए मुख्य सर्वर से घटना के दिनों का CCTV बैकअप तुरंत सुरक्षित (Lock) किया जाए। वर्तमान ब्रांच मैनेजर सुजीत शानीकर को तत्काल प्रभाव से किसी दूसरी शाखा में स्थानांतरित किया जाए, ताकि वे बचे हुए सबूतों को प्रभावित न कर सकें।फॉरेंसिक ऑडिट हो: हेड ऑफिस के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा मैनेजर सुजीत शानीकर, विद्या शंकर साहू और गुण सागर के कंप्यूटरों की गहराई से फॉरेंसिक जांच कराई जाए ताकि डिलीट किए गए ईमेल रिकवर हो सकें।

 

बाहरी टीम से जांच: छत्तीसगढ़ के स्थानीय अधिकारियों पर अविश्वास जताते हुए मामले की जांच राज्य से बाहर की केंद्रीय सतर्कता टीम से कराने की मांग की गई है।इस मामले में तीनों प्रत्यक्षदर्शी गवाह—लोकनाथ पटेल, लोचन चौधरी और अंजोर यादव—केंद्रीय जांच टीम के सामने अपने आधिकारिक बयान दर्ज कराने के लिए तैयार हैं। अब देखना यह है कि इंडसइंड बैंक का शीर्ष प्रबंधन और आरबीआई इस गंभीर शिकायत पर क्या एक्शन लेते हैं।

CG : आदिवासी जमीन को दूसरों के नाम पर खरीदने वालों की होगी जांच, जमीन वापसी का भी प्रावधान, गवाहों पर भी नजर

छत्तीसगढ़ में आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों के अप्रत्यक्ष नियंत्रण में जाने से रोकने के लिए शासन ने सख्त रुख अपनाया है। गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासी भूमि को सीधे अपने नाम पर खरीदने के बजाय नौकर, परिचित, रिश्तेदार अथवा अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीयन कराने और बाद में भूमि पर वास्तविक कब्जा एवं नियंत्रण रखने के मामलों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे संदिग्ध मामलों में भूमि के आगे के हस्तांतरण पर नियमानुसार रोक लगाने तथा कानून के विपरीत पाए जाने वाले पुराने मामलों में भूमि को पुनः आदिवासी खातेदार के पक्ष में बहाल करने की कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रस्ताव पर महानिरीक्षक पंजीयन छत्तीसगढ़ ने कलेक्टरों को लिखे पत्र में इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा इस संबंध में शासन को पत्र भेजकर आदिवासी भूमि के संरक्षण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का सुझाव दिया गया था। आयोग ने बताया था कि वैधानिक प्रावधानों के बावजूद कई स्थानों पर आदिवासी भूमि के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष हस्तांतरण की शिकायतें सामने आती रही हैं। विशेष रूप से गैर-आदिवासी व्यक्तियों द्वारा अपने नौकर, परिचित, रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति के नाम पर जमीन खरीदकर बाद में उसका वास्तविक उपयोग, कब्जा अथवा आर्थिक लाभ स्वयं लेने के मामलों को गंभीरता से लिया गया।

 

जिला प्रशासन को जांच के निर्देश : पत्र में इस संबंध में कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसमें आदिवासी भूमि के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष हस्तांतरण की जांच कराने तथा ऐसे मामलों की पड़ताल करने कहा गया, जहां जमीन आदिवासी से किसी नौकर, परिचित, रिश्तेदार अथवा अन्य व्यक्ति के नाम पर खरीदी गई हो, लेकिन उसका वास्तविक उपयोग या आर्थिक लाभ किसी गैर-आदिवासी द्वारा लिया जा रहा हो। निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया कि संदेहास्पद एवं नियम-विरुद्ध पंजीयन अथवा नामांतरण की जांच पूरी होने तक संबंधित भूमि के आगे के हस्तांतरण पर नियमानुसार रोक लगाने की कार्रवाई की जाए।

 

रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच जरूरी : शासन के निर्देशों में पंजीयन अधिकारियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया है। पंजीयन हेतु प्रस्तुत दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 34, 35 एवं रजिस्ट्रीकरण नियम के नियम 19 एवं 35 के प्रावधानों के अनुरूप परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ संलग्न आवश्यक दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच, संपत्ति की पर्याप्त पहचान तथा क्रेता-विक्रेता एवं गवाहों की नियमानुसार शिनाख्त सुनिश्चित करने कहा गया है । नक्शा, राजस्व अभिलेख और बिक्री नकल का सत्यापन निर्देशों के अनुसार पंजीयन दस्तावेजों में पंजीयन अधिनियम की धारा 21 के अनुरूप आवश्यक नक्शा एवं रेखांकन लिया जाना चाहिए। साथ ही रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1939 के नियम 19 (ण) (त) के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी राजस्व अभिलेख एवं बिक्री नकल अनिवार्य रूप से लेने के निर्देश दिए गए हैं। छोटे टुकड़ों की भूमि की रजिस्ट्री में विशेष सतर्कता बरतने तथा राजस्व अभिलेखों का सूक्ष्म परीक्षण करने कहा गया है। अभिलेखों को लेकर किसी प्रकार की शंका होने पर संबंधित तहसीलदार से संपर्क कर सत्यापन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

 

एक ही व्यक्ति के बार-बार गवाह बनने पर भी नजर : शासन के संज्ञान में यह तथ्य भी आया था कि कई दस्तावेजों में एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार गवाह के रूप में पहचान की जा रही है। इसे उचित नहीं मानते हुए गवाहों की पहचान के मामले में पूर्ण सतर्कता बरतने और सही पहचानकर्ता को ही गवाह के रूप में स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

कानून के विपरीत सौदे मिले तो जमीन की बहाली : निर्देशों का उद्देश्य केवल भविष्य में होने वाले संदिग्ध लेन-देन को रोकना ही नहीं, बल्कि पूर्व में हुए ऐसे मामलों की भी जांच करना है। जिला स्तर पर संदिग्ध भूमि हस्तांतरणों की जांच के बाद यदि कोई लेन-देन कानून के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित भूमि को नियमानुसार पुनः आदिवासी खातेदार के पक्ष में बहाल करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही शिकायतों पर समयबद्ध जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर आवश्यक निगरानी व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है।

महासमुंद/ ग्राहक बनकर पहुंची थी टिम एक अफसर निलंबित और 2 सेल्स मेन पर केस दर्ज बैगपाईपर व्हिस्की लेकर टिम ने किया खुलासा उड़े होश 2 जिला अधिकारी को नोटिस एक पक्षीय कार्यवाही की चेतावनी

महासमुंद, 10 सितंबर 2026। जिले में शराब की निर्धारित कीमत से अधिक वसूली का मामला सामने आया है। राज्य स्तरीय आबकारी उड़नदस्ता टीम ने तुमा डबरी (बेमचा) की कम्पोजिट मदिरा दुकान में जांच के दौरान ₹190 की शराब ₹200 में बिकते पकड़ी। मामले में दो विक्रेताओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 39 (ग) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। वहीं, दुकान की निगरानी में लापरवाही मानते हुए आबकारी उप निरीक्षक नितेश सिंह बैस को निलंबित कर दिया गया है।

छद्म ग्राहक बनकर पहुंची टीम, ऐसे खुला मामला राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने 7 सितंबर 2026 को तुमा डबरी (बेमचा) स्थित कम्पोजिट मदिरा दुकान का आकस्मिक निरीक्षण किया। टीम ने छद्म ग्राहक के माध्यम से शराब खरीदकर निर्धारित दर की जांच की।

 

इस दौरान दुकान के विक्रयकर्ता दिनेश्वर ध्रुव ने विदेशी मदिरा बैगपाईपर व्हिस्की का एक पाव, जिसकी सरकारी निर्धारित बिक्री कीमत ₹190 थी, उसे ₹200 में बेच दिया।

इसके बाद टीम ने दोबारा खरीद परीक्षण किया। इस बार दूसरे विक्रयकर्ता गुलाब डहरिया ने भी ₹190 की शराब ₹200 में बेच दी।

दो पाव में ₹20 ज्यादा वसूले दोनों खरीद परीक्षण में कुल दो पाव शराब खरीदी गई। इसकी निर्धारित कीमत ₹380 थी, लेकिन विक्रेताओं ने ग्राहक से ₹400 वसूले।

 

यानी निर्धारित दर से कुल ₹20 अधिक लिए गए। जांच के बाद दोनों विक्रेताओं के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 39 (ग) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

दुकान प्रभारी नितेश सिंह बैस निलंबित

ओवररेटिंग सामने आने के बाद विभाग ने इसे संबंधित प्रभार क्षेत्र में प्रभावी निगरानी के अभाव और शिथिल नियंत्रण का गंभीर मामला माना। इसके बाद आबकारी उप निरीक्षक नितेश सिंह बैस, जो मदिरा दुकान प्रभारी एवं वृत्त प्रभारी महासमुंद थे, को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 9 (1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

 

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता दुर्ग संभाग, दुर्ग निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। दो सहायक जिला आबकारी अधिकारियों को नोटिस

मामले में विभाग ने सिर्फ निलंबन तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी दीपक ठाकुर और सहायक जिला आबकारी अधिकारी अजय कुमार पाण्डेय को भी कारण बताओ सूचना जारी की गई है।

दोनों अधिकारियों से 7 दिवस के भीतर समाधानकारक जवाब मांगा गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर विभाग ने नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी है।

निर्धारित दर से अधिक वसूली पर सख्ती

महासमुंद की इस कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मदिरा दुकानों में निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने के मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी। राज्य स्तरीय उड़नदस्ता द्वारा किए गए आकस्मिक निरीक्षण से शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आई है।

CG/ महासमुंद में ₹190 की शराब ₹200 में बिकी, कांकेर में 4409 खाली बोतलें और 105 पत्ता स्टीकर-होलोग्राम बरामद, आबकारी विभाग ने 3 अफसरों को किया निलंबित

CG/ महासमुंद में ₹190 की शराब ₹200 में बिकी, कांकेर में 4409 खाली बोतलें और 105 पत्ता स्टीकर-होलोग्राम बरामद, आबकारी विभाग ने 3 अफसरों को किया निलंबित

रिपोर्टर हेमन्त वैष्णव/ प्रदेश में शराब की निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री और अवैध शराब निर्माण के खिलाफ आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच में महासमुंद जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान तुमा डबरी (बेमचा) में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने की पुष्टि हुई। वहीं कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण से जुड़ी बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद होने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई की है।

इन दोनों मामलों में आबकारी विभाग ने तीन अधिकारियों को निलंबित किया है। महासमुंद में आबकारी उप निरीक्षक नितेश सिंह बैस को निलंबित किया गया, जबकि कांकेर मामले में आबकारी उप निरीक्षक रानू मरकाम और प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी मधुकर श्याम हरित पर भी निलंबन की गाज गिरी है। इसके अलावा महासमुंद मामले में दो अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा गया है। जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

₹190 की शराब ₹200 में बेची, दो विक्रेताओं पर केस राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की टीम ने 7 सितंबर 2026 को महासमुंद जिले की कम्पोजिट मदिरा दुकान तुमा डबरी (बेमचा) में आकस्मिक निरीक्षण किया। छद्म ग्राहक के माध्यम से किए गए सत्यापन में दुकान के विक्रयकर्ता क्रमांक-1 दिनेश्वर ध्रुव द्वारा विदेशी मदिरा बैगपाईपर व्हिस्की का एक पाव, शासन द्वारा निर्धारित विक्रय दर ₹190 के बजाय ₹200 में बेचना पाया गया।

इसके बाद दोबारा किए गए खरीद परीक्षण में विक्रयकर्ता क्रमांक-2 गुलाब डहरिया द्वारा भी यही मदिरा ₹190 के बजाय ₹200 में बेची गई। इस तरह दो पाव की खरीद में निर्धारित ₹380 के बजाय ₹400 वसूले गए। यानी दोनों विक्रेताओं द्वारा कुल ₹20 अधिक लिए गए। मामले में दोनों विक्रेताओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 39(ग) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

प्रभार क्षेत्र में अनियमितता, नितेश सिंह बैस निलंबित विभाग ने मामले को संबंधित प्रभार क्षेत्र में प्रभावी निगरानी के अभाव और शिथिल नियंत्रण का गंभीर मामला माना। इसके बाद नितेश सिंह बैस, आबकारी उप निरीक्षक, मदिरा दुकान प्रभारी एवं वृत्त प्रभारी महासमुंद को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता दुर्ग संभाग, दुर्ग निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

कांकेर में 4409 खाली बोतलें, 105 पत्ता स्टीकर-होलोग्राम बरामद इधर, उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बसंत नगर (नारायणपुर) में पुलिस की छापामार कार्रवाई में एक सूने/बंद किराए के मकान से अवैध मदिरा निर्माण से संबंधित बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई।

कार्रवाई में 4409 नग खाली शराब की बोतल/पौवा, 105 पत्ता स्टीकर एवं होलोग्राम और 3380 ढक्कन सहित अन्य सामग्री जब्त की गई। जब्त सामग्री में 30 नग पौवा जम्मू स्पेशल व्हिस्की भरी हुई, कुल 5.400 लीटर, जिसकी कीमत ₹3600 बताई गई है। इसके अलावा विभिन्न ब्रांडों के स्टीकर एवं होलोग्राम की कीमत ₹59,645 और खाली बोतल/पौवा की कीमत ₹22,045 बताई गई है।

रानू मरकाम और मधुकर श्याम हरित पर भी कार्रवाई

यह प्रकरण रानू मरकाम, आबकारी उप निरीक्षक, मदिरा दुकान प्रभारी एवं वृत्त प्रभारी भानुप्रतापपुर के प्रभार क्षेत्र में आता है। उनके क्षेत्र में इतनी गंभीर अनियमितता पाए जाने को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, उदासीनता एवं शिथिल नियंत्रण का परिचायक मानते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय जिला आबकारी अधिकारी, कांकेर निर्धारित किया गया है।

इसी मामले में मधुकर श्याम हरित, सहायक जिला आबकारी अधिकारी एवं प्रभारी, जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय, उत्तर बस्तर कांकेर के विरुद्ध भी प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही, कर्तव्य के प्रति उदासीनता तथा प्रभावी पर्यवेक्षण एवं सतत निगरानी के अभाव को देखते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है। उनका निलंबन मुख्यालय कार्यालय आबकारी आयुक्त, छत्तीसगढ़, नवा रायपुर अटल नगर निर्धारित किया गया है।

दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

महासमुंद में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बिक्री के मामले में विभाग ने अन्य अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है। दीपक ठाकुर, सहायक जिला आबकारी अधिकारी और अजय कुमार पाण्डेय, सहायक जिला आबकारी अधिकारी को कारण बताओ सूचना जारी की गई है।

दोनों अधिकारियों को 7 दिवस के भीतर समाधानकारक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

शराब दुकानों की निगरानी होगी और सख्त

आबकारी विभाग की इस कार्रवाई से साफ है कि प्रदेश में निर्धारित विक्रय दर से अधिक कीमत पर शराब की बिक्री, अवैध शराब निर्माण और निगरानी में लापरवाही को गंभीरता से लिया जा रहा है। राज्य स्तरीय उड़नदस्ता और मैदानी अमले के माध्यम से मदिरा दुकानों की जांच और निगरानी को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में बस यात्रियों के लिए बदलने वाला है सिस्टम! महिला यात्री अकेली हों तो होगी बस की ऑनलाइन निगरानी, किराए पर बस किराए में 75 फीसदी बढ़ोतरी की मांग

 

रायपुर। परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में बस ऑनर फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों और प्रदेशभर से आए बस संचालकों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में यात्री किराया, स्लीपर बसों के टैक्स, बसों की समय-सारिणी, ऑनलाइन परमिट, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, फिटनेस प्रमाण-पत्र और महिला यात्रियों की सुरक्षा सहित परिवहन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में फेडरेशन ने अपनी विभिन्न मांगें और बस संचालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं मंत्री के सामने रखीं। परिवहन मंत्री ने सभी विषयों को गंभीरता से सुनते हुए अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। महिला यात्री बस में अकेली होंगी तो ऑनलाइन ट्रैकिंग पर जोर बैठक में महिला यात्रियों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई। परिवहन मंत्री ने निर्देश दिए कि बस में पहली या अंतिम सवारी महिला होने की स्थिति में वाहन की ऑनलाइन ट्रैकिंग की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

महिला यात्री के सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचने तक बस की स्थिति की निगरानी के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही बसों में लगे कैमरे, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और अन्य सुरक्षा उपकरणों को सक्रिय रखने तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बस किराए में 75 फीसदी बढ़ोतरी की मांग, जल्द होगा समाधान? बस ऑनर फेडरेशन ने साधारण यात्री बसों के किराए में 75 प्रतिशत और डीलक्स बसों के किराए में 30 प्रतिशत वृद्धि की मांग रखी। इसके अलावा 11 मार्च 2025 को जारी संशोधित अधिसूचना को निरस्त करने का विषय भी उठाया गया।

परिवहन मंत्री ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि यात्री किराए से जुड़े विषय का शीघ्र समाधान किया जाएगा। अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध रूप से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्लीपर बसों के टैक्स को लेकर भी उठी मांग फेडरेशन ने स्लीपर बसों में एक स्लीपर के बदले दो सीटों का टैक्स लेने की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की मांग की। बस संचालकों ने मांग रखी कि एक स्लीपर पर एक सीट के बराबर टैक्स निर्धारित किया जाए।

मंत्री ने इस मांग पर गंभीरता से विचार किए जाने की बात कही और अधिकारियों को इसके व्यावहारिक, तकनीकी और राजस्व संबंधी पहलुओं का परीक्षण करने के निर्देश दिए।

बसों के बीच समय-अंतराल तय करने पर चर्चा स्टेज कैरिज बसों की समय-सारिणी को व्यवस्थित करने का मुद्दा भी बैठक में उठा। फेडरेशन ने मुख्य मार्गों पर बसों के बीच 10 मिनट और ग्रामीण मार्गों पर 30 मिनट का अंतर निर्धारित करने का सुझाव दिया।

मंत्री ने कहा कि समय-सारिणी ऐसी होनी चाहिए जिससे यात्रियों को पर्याप्त परिवहन सुविधा मिले और बस संचालकों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा की स्थिति न बने।

परमिट सहित परिवहन सेवाएं ऑनलाइन करने के निर्देश
बैठक में सभी स्टेज कैरिज यात्री बसों के लिए ऑनलाइन परमिट की सुविधा का विषय भी रखा गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि बसों के लिए ऑनलाइन परमिट जारी किए जा रहे हैं।

परिवहन मंत्री ने परमिट सहित परिवहन विभाग की अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन करने के निर्देश दिए, ताकि बस संचालकों और आम नागरिकों को विभागीय कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

बस संचालकों की समस्याओं के साथ यात्रियों की सुरक्षा पर भी जोर मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बस संचालक प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बसें आम नागरिकों के आवागमन का प्रमुख साधन हैं। इसलिए बस संचालकों की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के साथ यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाना जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को बैठक में उठाए गए सभी विषयों का बिंदुवार परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

बैठक में छत्तीसगढ़ फूड कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं बस ऑनर फेडरेशन ऑफ छत्तीसगढ़ के संरक्षक श्री संजय श्रीवास्तव, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश, अपर परिवहन आयुक्त श्री डी. रविशंकर, फेडरेशन के अध्यक्ष श्री अनिल पूसदकर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए बस संचालक प्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

पटेवा क्षेत्र से नाबालिग युवती लापता, अज्ञात के खिलाफ अपराध दर्ज

त्रिवेन्द्र जगत, पटेवा। पटेवा थाना क्षेत्र के एक गांव से 16 वर्षीय नाबालिग बालिका के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। परिजनों की शिकायत पर पटेवा पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ बहला-फुसलाकर भगा ले जाने (अपहरण) का अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िता के पिता (66 वर्ष) ने थाने में लिखित आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि उनकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री गत 5 सितंबर 2026 की दोपहर करीब 3:00 बजे घर से बिना बताए कहीं निकल गई थी। जब वह देर शाम तक वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की।

पीड़ित पिता ने बताया कि 5 सितंबर से लेकर 9 सितंबर तक उन्होंने अपने स्तर पर गांव, आसपास के क्षेत्रों और नाते-रिश्तेदारों में बालिका की काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों को आशंका है कि उनकी नाबालिग पुत्री को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाया गया है।

मामले की गंभीरता और बालिका के नाबालिग होने के कारण पटेवा पुलिस ने मर्ग/गुम इंसान कायम करते हुए अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

सांकरा : निर्माणाधीन मकान से छड़-रिंग चोरी, मामला दर्ज

त्रिवेन्द्र जगत, सांकरा। सांकरा के गुरु घासीदास चौक स्थित एक निर्माणाधीन मकान से अज्ञात चोर ने करीब 2 क्विंटल छड़-रिंग पार कर दी। पीड़ित की शिकायत पर सांकरा पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सांकरा निवासी कवलजीत सिंह छाबड़ा (47 वर्ष) गुरु घासीदास चौक के पास अपना मकान बनवा रहे हैं। उन्होंने मकान निर्माण के लिए सलूजा स्टील बसना से 8MM की छड़ खरीदी थी, जिसका उपयोग कॉलम बनाने के लिए रिंग के रूप में किया जा रहा था। इस्तेमाल के बाद बची हुई करीब 2 क्विंटल छड़-रिंग (कीमत लगभग ₹11,000) को निर्माणाधीन मकान के एक कमरे में सुरक्षित रखा गया था।

पीड़ित ने बताया कि 7 सितंबर 2026 को वे सामान देखकर गए थे, तब छड़-रिंग कमरे में ही रखी थी। अगले दिन 8 सितंबर की सुबह करीब 5 बजे जब वे दोबारा पहुंचे, तो कमरे से छड़-रिंग गायब थी। आसपास काफी पूछताछ और तलाश करने के बाद भी जब सामान का कोई पता नहीं चला। चोरी की सूचना के बाद सांकरा पुलिस ने पीड़ित कवलजीत सिंह छाबड़ा की रिपोर्ट पर अज्ञात चोर के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया है और मामले की विवेचना की जा रही

बसना : रिचार्ज करवाने जा रहे बुजुर्ग की सड़क हादसे में मौत

बसना। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल ग्राम उड़ेला निवासी 76 वर्षीय बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई। भंवरपुर चौकी पुलिस ने मर्ग जांच के बाद आरोपी मोटरसाइकिल चालक के खिलाफ धारा 106(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम उड़ेला निवासी ईश्वर सिदार (76 वर्ष) मोबाइल रिचार्ज कराने के लिए गांव की ही एक दुकान जा रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे मोटरसाइकिल क्रमांक CG 12 AH 2268 के चालक ने तेजी व लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में बुजुर्ग के सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं।

दुर्घटना के बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत प्राथमिक इलाज के लिए ओम अस्पताल सरायपाली में भर्ती कराया, जहाँ से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बालाजी अस्पताल, रायपुर रेफर किया गया। रायपुर में इलाज के दौरान बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।

एक साल बाद दर्ज हुआ मामला
उल्लेखनीय है कि यह हादसा पिछले साल 09 सितंबर 2025 को हुआ था, जिसमें इलाज के दौरान 02 अक्टूबर 2025 को बुजुर्ग की मौत हो गई थी। चूंकि मामला रायपुर के अस्पताल से जुड़ा था, इसलिए वहां से मर्ग डायरी भंवरपुर चौकी स्थानांतरित होने और मर्ग जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अब ठीक एक साल बाद 09 सितंबर 2026 को आरोपी बाइक चालक के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।