सरायपाली। “हमें विश्वास नहीं था कि हमारे खेत से हीरा निकलेगा जहां धान उगाते हैं, उसी खेत से हीरा निकलना हमारे लिए गर्व और खुशी की बात है।” यह कहना है महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र के पैकिन गांव निवासी किसान योगेश्वर बेहरा का, जिनके निजी खेत से वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान हीरे मिलने की पुष्टि हुई है।
महाजनपद न्यूज हेमन्त वैष्णव
हीरे मिलने की खबर के बाद पैकिन गांव में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि क्षेत्र में आगे और अन्वेषण होता है, तो इससे इलाके के विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
दरअसल, छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड द्वारा किए गए वैज्ञानिक परीक्षण के दौरान 200 टन बल्क सैंपल के प्रसंस्करण के बाद कुल 5 हीरे प्राप्त हुए हैं, जिनका कुल वजन 1.22 कैरेट बताया गया है। इनमें दो जेम क्वालिटी तथा तीन अन्य श्रेणी के हीरे शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में वैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय अध्ययन तथा अन्वेषण ड्रिलिंग के आधार पर चिन्हित क्षेत्र से लगभग 200 टन खनिज सामग्री का बल्क सैंपल एकत्र कर परीक्षण किया गया था। परीक्षण के बाद प्राप्त हीरों ने क्षेत्र में हीरा खनिजीकरण की संभावनाओं को और मजबूत किया है।
किसान योगेश्वर बेहरा ने बताया कि करीब चार माह पहले उनके खेत में वैज्ञानिक सर्वेक्षण और खुदाई का कार्य किया गया था। उस समय उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि जिस खेत में वे वर्षों से धान की खेती कर रहे हैं, उसी खेत की मिट्टी में हीरे छिपे हुए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह प्रदेश की आर्थिक क्षमता और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी प्रबंधन और मूल्य संवर्धन आधारित औद्योगिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है और अब हीरा संभावनाओं की पुष्टि से प्रदेश की खनिज विविधता और अधिक समृद्ध होगी। इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर निवेश, राजस्व सृजन और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक चरण में मिली यह सफलता भविष्य के विस्तृत अन्वेषण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। आगामी सर्वेक्षणों और परीक्षणों से क्षेत्र की वास्तविक खनिज क्षमता का अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि परीक्षण के दौरान प्राप्त सभी हीरों को सुरक्षित अभिरक्षा में एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रांग रूम में रखा गया है तथा आगे की कार्रवाई नियमानुसार और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप की जाएगी।



