CG सरायपाली/ दागदार से दमदार?” जांच आदेश और पदोन्नति आदेश की वायरल पोस्ट से गरमाई सियासत, कांग्रेस नेता और RTI कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
सरायपाली/महासमुंद। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी को सहायक संचालक पद पर पदोन्नति दिए जाने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट में भाजपा सरकार के “सुशासन” पर सवाल उठाते हुए दावा किया गया है कि जिस अधिकारी के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी, उसी अधिकारी को पदोन्नति देकर सहायक संचालक बना दिया गया।
वायरल पोस्ट में बड़े अक्षरों में लिखा गया है—
> “भाजपा सरकार में ‘दागदार’ दमदार बन रहे!”
इसके नीचे आरोप लगाया गया है कि—
> “जिस अधिकारी की वर्तमान में ‘वित्त अनियमितता’ मामले में जांच चल रही, उसे प्रमोट कर ‘सहायक संचालक’ बना दिया!”
पोस्ट में शिक्षा विभाग से जुड़े दो आदेशों की प्रतियां भी साझा की गई हैं। एक आदेश में तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सरायपाली के विरुद्ध निरीक्षण के बाद कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में अनुशासनात्मक कार्रवाई का उल्लेख दिखाई देता है, जबकि दूसरे आदेश में संबंधित अधिकारी श्री प्रकाशचंद्र मांझी को सहायक संचालक पद पर पदस्थ किए जाने का उल्लेख है।
मामले को राजनीतिक रंग तब मिला जब महासमुंद लोकसभा कांग्रेस आईटी सेल के पूर्व अध्यक्ष जफर खान ने उक्त पोस्ट को साझा करते हुए भाजपा सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल उठाए। पोस्ट में नीचे लिखा गया है—
> “कैसा तेरा सुशासन!”
वहीं, RTI कार्यकर्ता विनोद कुमार दास ने भी सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि उन्होंने तत्कालीन बीईओ सरायपाली के खिलाफ कई शिकायतें की थीं। उनके अनुसार, जांच में वित्तीय अनियमितता सामने आई थी और जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट एवं अभिमत सहित प्रकरण को लोक शिक्षण संचालनालय भेजा था।
अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं—
क्या संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी थी?
क्या उन्हें विभागीय स्तर पर क्लीन चिट मिल चुकी थी?
यदि नहीं, तो पदोन्नति किन नियमों और परिस्थितियों में दी गई?
क्या स्कूल शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करेगा?
हालांकि, यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि महाजनपदन्यूज.कॉम वायरल पोस्ट में किए गए दावों और दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। किसी भी अधिकारी को केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय अभिलेखों, जांच की अंतिम रिपोर्ट और शासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट होगी।
यदि इस मामले में संबंधित अधिकारी, स्कूल शिक्षा विभाग या शासन की ओर से कोई पक्ष या स्पष्टीकरण प्राप्त होता है, तो महाजनपदन्यूज.कॉम उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
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