सांकरा : निर्माणाधीन मकान से छड़-रिंग चोरी, मामला दर्ज

त्रिवेन्द्र जगत, सांकरा। सांकरा के गुरु घासीदास चौक स्थित एक निर्माणाधीन मकान से अज्ञात चोर ने करीब 2 क्विंटल छड़-रिंग पार कर दी। पीड़ित की शिकायत पर सांकरा पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सांकरा निवासी कवलजीत सिंह छाबड़ा (47 वर्ष) गुरु घासीदास चौक के पास अपना मकान बनवा रहे हैं। उन्होंने मकान निर्माण के लिए सलूजा स्टील बसना से 8MM की छड़ खरीदी थी, जिसका उपयोग कॉलम बनाने के लिए रिंग के रूप में किया जा रहा था। इस्तेमाल के बाद बची हुई करीब 2 क्विंटल छड़-रिंग (कीमत लगभग ₹11,000) को निर्माणाधीन मकान के एक कमरे में सुरक्षित रखा गया था।

पीड़ित ने बताया कि 7 सितंबर 2026 को वे सामान देखकर गए थे, तब छड़-रिंग कमरे में ही रखी थी। अगले दिन 8 सितंबर की सुबह करीब 5 बजे जब वे दोबारा पहुंचे, तो कमरे से छड़-रिंग गायब थी। आसपास काफी पूछताछ और तलाश करने के बाद भी जब सामान का कोई पता नहीं चला। चोरी की सूचना के बाद सांकरा पुलिस ने पीड़ित कवलजीत सिंह छाबड़ा की रिपोर्ट पर अज्ञात चोर के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर लिया है और मामले की विवेचना की जा रही

बसना : रिचार्ज करवाने जा रहे बुजुर्ग की सड़क हादसे में मौत

बसना। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल ग्राम उड़ेला निवासी 76 वर्षीय बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई। भंवरपुर चौकी पुलिस ने मर्ग जांच के बाद आरोपी मोटरसाइकिल चालक के खिलाफ धारा 106(1) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम उड़ेला निवासी ईश्वर सिदार (76 वर्ष) मोबाइल रिचार्ज कराने के लिए गांव की ही एक दुकान जा रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे मोटरसाइकिल क्रमांक CG 12 AH 2268 के चालक ने तेजी व लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में बुजुर्ग के सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं।

दुर्घटना के बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत प्राथमिक इलाज के लिए ओम अस्पताल सरायपाली में भर्ती कराया, जहाँ से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें बालाजी अस्पताल, रायपुर रेफर किया गया। रायपुर में इलाज के दौरान बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया।

एक साल बाद दर्ज हुआ मामला
उल्लेखनीय है कि यह हादसा पिछले साल 09 सितंबर 2025 को हुआ था, जिसमें इलाज के दौरान 02 अक्टूबर 2025 को बुजुर्ग की मौत हो गई थी। चूंकि मामला रायपुर के अस्पताल से जुड़ा था, इसलिए वहां से मर्ग डायरी भंवरपुर चौकी स्थानांतरित होने और मर्ग जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अब ठीक एक साल बाद 09 सितंबर 2026 को आरोपी बाइक चालक के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है।

बसना क्षेत्र के गांवों में केबल वायर चोरी का दावा, किसानों ने जताई चिंता, सोशल मीडिया पर चर्चा

बसना थाना क्षेत्र के आसपास के गांवों में केबल वायर की चोरी की खबरें इन दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में छाई हुई हैं। वॉट्सऐप ग्रुप्स पर वायरल हो रहे संदेशों के अनुसार, चोर अब सीधे खेतों को अपना निशाना बना रहे हैं।

कई गांवों से चोरी की चर्चा
वॉट्सऐप पर साझा की जा रही जानकारी के मुताबिक, ग्राम छांदनपुर में बीती रात 5 बोर के केबल वायर चोरी होने का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा गनेकेरा और बरगांव क्षेत्रों से भी ऐसी ही घटनाएं सामने आने की बात कही जा रही है। एक संदेश में दावा किया गया है कि चोरों ने खेत में बने बोर रूम का ताला तोड़कर वारदात को अंजाम दिया और आसपास के 6 से 7 किसानों के बोर के तार पार कर दिए।

यह समाचार वॉट्सऐप ग्रुप और स्थानीय सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं व दावों पर आधारित है। पुलिस प्रशासन द्वारा इन घटनाओं के संबंध में आधिकारिक पुष्टि अथवा किसी आधिकारिक शिकायत की जानकारी आना अभी बाकी है।

छत्तीसगढ़ को रेल लाइन की मिली सौगात, 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को रेलवे की तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। करीब 10,783 करोड़ रुपए की लागत वाली इन परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। इससे माल और यात्री परिवहन को गति मिलने के साथ पांच राज्यों में कनेक्टिविटी मजबूत होगी।कैबिनेट से मंजूर परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी रेल लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

656 किलोमीटर बढ़ेगा रेल नेटवर्क
पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को कवर करने वाली इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इससे लगभग 4,790 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी कुल आबादी करीब 56 लाख है।

पर्यटन स्थलों तक बेहतर होगी रेल पहुंच
परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल संपर्क मजबूत होगा। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर समेत कई प्रमुख स्थल शामिल हैं।

महासमुंद, बलौदाबाजार समेत 10 जिलों से बेदखल हुए 3 शातिर बदमाश, जानें कौन हैं ये चेहरे?

बलौदाबाजार – भाटापारा जिले में वर्तमान कानून व्यवस्था को देखते हुए कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने पुलिस प्रशासन से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन आदतन अपराधियों को एक वर्ष के लिए जिला बदर के आदेश जारी किया है। आदेश के तहत थाना लवन अंतर्गत वार्ड 8 लवन निवासी देवा उर्फ देवनारायण जायसवाल पिता शिवप्रसाद जायसवाल, देवेंद्र उर्फ़ रिंकू वर्मा पिता गंगा प्रसाद वर्मा निवासी थाना भाटापारा अंतर्गत ग्राम देवरी एवं थाना गिधौरी-टुंडरा अंतर्गत ग्राम खपरीडीह निवासी गयाराम पटेल पिता शिवलाल पटेल को जिला बदर किया गया है।

उक्त कार्रवाई छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3,5 (ख ) के तहत किया गया है जिसमें 1 वर्ष के कालावधि के लिए बलौदाबाजार-भाटापारा जिला एवं उसके सीमावर्ती जिले बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़, महासमुंद, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ति, बेमेतरा एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की सीमाओं से आदेश पारित होने के 24 घंटे के भीतर हटने एवं बाहर चले जाने के आदेश दिए है।

CG/ हादसों से पहले CM साय का बड़ा एक्शन प्लान! SP-कलेक्टर को निर्देश—हॉस्टल, PG, स्कूल और कोचिंग सेंटर का तत्काल सेफ्टी ऑडिट;अवैध-मिलावटी शराब पर भी सख्ती, लापरवाही पर अफसरों पर होगी कार्रवाई

CG/ हादसों से पहले CM साय का बड़ा एक्शन प्लान! SP-कलेक्टर को निर्देश—हॉस्टल, PG, स्कूल और कोचिंग सेंटर का तत्काल सेफ्टी ऑडिट;अवैध-मिलावटी शराब पर भी सख्ती, लापरवाही पर अफसरों पर होगी कार्रवाई

जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही पड़ी भारी, मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर-एसपी को दिए सख्त निर्देश रायपुर/10 सितंबर 2026। प्रदेश में विद्यार्थियों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संभावित खतरे की पहले पहचान कर उसे दूर करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जोखिमपूर्ण भवनों की जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

 

मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली।

हॉस्टल से लेकर कोचिंग सेंटर तक होगा निरीक्षण मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आती हैं, वहां समय-सीमा तय कर आवश्यक सुधार कराया जाए।

 

उन्होंने कलेक्टरों और एसपी से अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि शासन के निर्देशों का प्रभावी पालन जमीनी स्तर पर दिखाई दे।

जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का होगा आकलनमुख्यमंत्री ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थित पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे भवन, जिनसे जनहानि की आशंका हो सकती है, उनकी पहचान कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिसमें संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान हो और दुर्घटना की आशंका को पहले ही समाप्त किया जा सके। शिकायत या हादसे का इंतजार नहींमुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि सुरक्षा संबंधी मामलों में केवल शिकायत मिलने या दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने की प्रवृत्ति को समाप्त करना होगा। इसके स्थान पर सतत निगरानी और समय रहते सुधार की कार्यसंस्कृति विकसित करने की जरूरत है।

 

अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ भी चलेगा अभियान

बैठक में मुख्यमंत्री ने अवैध एवं मिलावटी शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन के खिलाफ प्रदेशभर में सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय से विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई करने को कहा।

जिन क्षेत्रों में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री या मिलावट की आशंका हो, वहां संयुक्त टीमों के माध्यम से छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ेगी निगरानी

मुख्यमंत्री ने दूसरे राज्यों से अवैध शराब की आवक रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख परिवहन मार्गों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। पुलिस और आबकारी विभाग को सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करते हुए संयुक्त कार्रवाई करने को कहा गया।

उन्होंने अवैध शराब के निर्माण या मिलावट में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि शासन के निर्देशों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए कि बैठक में दिए गए निर्देशों पर तत्काल अमल शुरू किया जाए और जिलों में की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव श्री रजत बंसल, संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

महासमुंद/ 2 लोगों ने भरा नेत्रदान का संकल्प पत्र, तो 2 दिवंगतों का हुआ नेत्रदान; सरायपाली, बागबाहरा और महासमुंद से लोग आ रहे सामने

महासमुंद में नेत्रदान को लेकर बढ़ी जागरूकता, दो लोगों ने लिया संकल्प; दो दिवंगतों का नेत्रदान भी हुआ

महासमुंद/10 सितंबर 2026। जिले में नेत्रदान को लेकर लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान के बीच लोगों ने मृत्यु के बाद नेत्रदान कर दृष्टिहीन लोगों के जीवन में रोशनी लाने का संकल्प लेना शुरू किया है। विभाग के अनुसार, एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने में मदद मिल सकती है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्पदृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक नेत्रदान पखवाड़ा आयोजित किया गया। इस दौरान आमजनों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी देने के साथ संकल्प पत्र भरने के लिए प्रेरित किया गया।

सरायपाली और बागबाहरा में लिया नेत्रदान का संकल्प

इसी अभियान के तहत सरायपाली विकासखंड के ग्राम कोलतापारा, बलौदा निवासी श्रीमती सैरेन्दी स्वाइ/कविराज ने 3 सितंबर को नेत्रदान का घोषणा पत्र भरकर मृत्यु उपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया। इस अवसर पर श्री सुदाम भोई एवं उनके पुत्र संगमलाल स्वाई उपस्थित रहे।

वहीं बागबाहरा विकासखंड के ग्राम पचेड़ा निवासी श्री रामेश्वर सिंह दीवान/श्री बदलू सिंह दीवान ने 9 सितंबर को जिला अस्पताल महासमुंद में नेत्रदान हेतु संकल्प पत्र भरा। इस दौरान उनके उत्तराधिकारी मनहरण एवं राधेश्याम तथा मित्र श्री सुखलाल साहू उपस्थित रहे।

दो दिवंगतों का हो चुका है नेत्रदान

जिले में हाल ही में दो व्यक्तियों का मृत्यु उपरांत नेत्रदान भी किया गया। जुलाई 2026 में क्लब पारा महासमुंद निवासी स्व. श्री छोटालाल कोठारी तथा 18 अगस्त को ग्राम पीढ़ी, लहंगर निवासी स्व. श्रीमती उत्तरा बाई चंद्राकर का नेत्रदान किया गया।

परिजनों द्वारा मृत्यु की सूचना जिला चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग को दी गई, जिसके बाद नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। इस पुनीत कार्य में परिवार की सहमति और तत्परता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

स्वास्थ्य विभाग कर रहा लोगों को जागरूक

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के निर्देशन में नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं नेत्रदान अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गोरियार, सहायक नेत्रदान अधिकारी श्री अवधेश कुमार यादव, श्री उमेश कुमार गोतमारे सहित जिले के विभिन्न प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ नेत्र सहायक अधिकारी और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक किया जा रहा है।

मृत्यु के 6 घंटे के भीतर हो सकता है नेत्रदान

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नेत्रदान मृत्यु के पश्चात किया जाता है। मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्र ज्योति का संग्रहण किया जा सकता है। इसलिए किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर इसकी सूचना तत्काल जिला अस्पताल की नेत्र इकाई अथवा नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र को देना आवश्यक है।

स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे नेत्रदान के लिए आगे आएं और मृत्यु के बाद किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी लाने वाले इस पुनीत एवं लोककल्याणकारी कार्य में सहभागी बनें।

CG सरायपाली / बैंक के 1.77 करोड़ के किसान लोन घोटाला मामले में थाना में FIR दर्ज, आदेश में सामने आए थे 5 नाम, फरार या गिरफ्तार? थाना प्रभारी ने क्या कहा, किनके नाम पर FIR दर्ज, पढ़िए पूरी खबर

सरायपाली/महासमुंद। सरायपाली थाना अंतर्गत तोरेसिंहा बैंक और केना सेवा सहकारी समिति से जुड़े करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपए के कथित KCC ऋण फर्जीवाड़े के मामले में सरायपाली पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अपराध क्रमांक 0289/26 में धारा 120-B, 409, 420, 467, 468 एवं 471 IPC के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR दर्ज होने के बाद अब मामले की आपराधिक जांच शुरू हो गई है।
FIR दर्ज होने के बाद इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि अपराध में किन-किन लोगों को आरोपी बनाया गया है और उनकी गिरफ्तारी की स्थिति क्या है?

 

फिलहाल पुलिस की ओर से आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
मामला संवेदनशील, इसलिए नामों की जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं
सरायपाली थाना प्रभारी रितेश यादव ने मामले को संवेदनशील बताते हुए फिलहाल यह जानकारी साझा नहीं की है कि FIR में किन-किन लोगों को आरोपी बनाया गया है। ऐसे में पूर्व जांच में सामने आए छह लोगों के नामों को वर्तमान FIR के आरोपी के तौर पर जोड़ना उचित नहीं होगा।
वहीं, FIR में नामजद व्यक्ति गिरफ्तार हैं या फरार, इसकी भी पुलिस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। गिरफ्तारी की स्थिति और आरोपियों की संख्या को लेकर भी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।

पूर्व जांच में सामने आए थे छह नाम
गौरतलब है कि मामले की पूर्व में हुई जांच में केना सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन समिति प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा बैंक के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुंदर पटेल, वर्तमान सुपरवाइजर राज कुमार प्रधान, बैंक मैनेजर युवराज नायक, कनिष्ठ लिपिक हीरा सिंह ध्रुव और प्रभारी लेखापाल खिलेश्वर साहू के नाम सामने आने की बात कही गई थी।
पूर्व जांच में इन लोगों की भूमिका जिम्मेदार व्यक्तियों के तौर पर सामने आने की बात कही गई थी। हालांकि, इनमें से कौन-कौन वर्तमान FIR में आरोपी है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इसलिए पूर्व जांच में सामने आए इन छह नामों को वर्तमान FIR का आरोपी बताना उचित नहीं होगा।
मृत किसानों के नाम पर KCC ऋण से भी जुड़ा मामला
जांच के दौरान मामले में कई बिंदु सामने आने की बात कही गई थी। इनमें मृत किसानों के नाम पर KCC ऋण जारी किया जाना, केना सेवा सहकारी समिति क्षेत्र से बाहर के किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत होना तथा कुछ किसानों के नाम पर ऋण जारी होने के बावजूद उनके द्वारा ऋण की जानकारी नहीं होने की बात शामिल है।
करीब 1.77 करोड़ रुपए के KCC ऋण से जुड़े इस मामले में बैंक स्तर पर जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
6 अगस्त को FIR दर्ज कराने के दिए गए थे निर्देश
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त 2026 को महासमुंद के नोडल अधिकारी को जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।
निर्देश में FIR दर्ज कराने के साथ उसकी छायाप्रति मुख्य कार्यालय भेजने को भी कहा गया था। इसके बाद सरायपाली थाने में अपराध क्रमांक 0289/26 दर्ज किया गया है।

अब पुलिस जांच में सामने आएंगे कई सवालों के जवाब
FIR दर्ज होने के बाद जांच में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है। मृत किसानों के नाम पर KCC ऋण किस प्रक्रिया से स्वीकृत हुए? किसानों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ? ऋण की राशि किस माध्यम से निकाली गई? समिति और बैंक स्तर पर दस्तावेजों की जांच किस प्रकार हुई? और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की वास्तविक भूमिका रही?

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि पूर्व जांच में सामने आए छह नामों में से किन लोगों की भूमिका आपराधिक जांच में सामने आती है और वर्तमान FIR में वास्तव में किन लोगों को आरोपी बनाया गया है।
FIR दर्ज, अब जांच के नतीजों पर नजर
फिलहाल मामले में अपराध क्रमांक और धाराओं की जानकारी सामने आ चुकी है, जबकि आरोपियों के नाम और उनकी गिरफ्तारी की स्थिति के संबंध में आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

ऐसे में 1.77 करोड़ रुपए के इस KCC मामले में FIR दर्ज होने के बाद अब जांच आगे बढ़ने का इंतजार है। पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही और उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।

पिथौरा : नहाने गए मासूम पर भालू ने किया हमला

त्रिवेन्द्र जगत,पिथौरा। पिथौरा विकासखंड के ग्राम रेमड़ा में मंगलवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब नाले के पास नहाने गए एक 7-8 वर्षीय मासूम पर जंगली भालू ने अचानक हमला कर दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार सुबह करीब 7:00 से 8:00 बजे के बीच की है। बच्ची गांव के समीप स्थित नाले की ओर गई हुई थी, इसी बीच भालू ने उस पर हमला कर दिया। बच्चे की चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने शोर मचाया, जिससे भालू बच्चे को छोड़कर भाग गया।

हमले में घायल बच्चे को परिजनों और ग्रामीणों की मदद से तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। जहां उसका उपचार जारी है। घटना के बाद से गांव में भालू की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीण अब अकेले बाहर निकलने में सतर्कता बरत रहे हैं।

सरायपाली/ सीएम हेल्पलाइन की एक घंटी पर शिकायत दूर, लेकिन गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर एक्शन कब? मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी से सवाल, क्या आम आदमी है खुश? पढ़िए पूरी खबर

 

सीएम हेल्पलाइन की घंटी बजते ही क्यों दूर हो रही लोगों की परेशानी? छोटी शिकायतों के लिए भी 1076 का सहारा क्यों

महासमुंद। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज होने के बाद लोगों की समस्याओं के समाधान के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। लेकिन इन मामलों के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है—क्या आम लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही नहीं हो सकता? क्या सीएम हेल्पलाइन में फोन करने के बाद ही समस्या का समाधान होना संभव है?

यह सवाल तब और जरूरी हो जाता है, जब कोई आम आदमी अपनी छोटी-सी समस्या का भी निराकरण कराने के लिए परेशान होता रहे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जारी प्रेस विज्ञप्तियों को पढ़ने पर कई बार यह सामने आता है कि संबंधित व्यक्ति अपनी समस्या को लेकर दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, लेकिन समाधान नहीं हुआ। आखिरकार उसने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर फोन किया और शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उसकी समस्या का समाधान हो गया।

यह बात निश्चित रूप से अच्छी है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का निराकरण हो रहा है। लेकिन इसी के साथ यह सवाल भी जरूरी है कि जब शिकायत 1076 तक पहुंचते ही संबंधित अधिकारी-कर्मचारी सक्रिय होकर समस्या का समाधान कर सकते हैं, तो शिकायतकर्ता को पहले ही स्तर पर समाधान क्यों नहीं मिल पाता?

 महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम कसलबा निवासी कमलेश प्रधान ने राशन कार्ड से संबंधित समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग ने मामले में त्वरित कार्रवाई की और उनकी समस्या का निराकरण कर दिया।

समस्या दूर होने के बाद कमलेश प्रधान ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का समय पर समाधान हुआ, जिससे उन्हें काफी राहत मिली। कमलेश का मामला निश्चित रूप से राहत देने वाला है और यह भी बताता है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम आदमी के लिए किस तरह सहारा बन रही है। लेकिन यह मामला व्यवस्था के दूसरे पहलू पर भी सवाल खड़ा करता है। जब 1076 पर शिकायत पहुंचने के बाद संबंधित विभाग तेजी से कार्रवाई कर समस्या का समाधान कर सकता है, तो क्या ऐसी शिकायतों के लिए नागरिकों को पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंचना जरूरी है?

राशन कार्ड जैसी रोजमर्रा से जुड़ी समस्या आम नागरिक के लिए भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन संबंधित व्यक्ति के लिए वह महत्वपूर्ण होती है। ऐसी समस्या के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर ही व्यवस्था उपलब्ध होने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यह देखना भी जरूरी है कि हेल्पलाइन पर शिकायत पहुंचने के बाद ही कार्रवाई क्यों तेज होती है और उससे पहले समस्या के समाधान की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।

महाजनपद न्यूज का मुख्यमंत्री से निवेदन महाजनपद न्यूज का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से निवेदन है कि जिन गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी आम व्यक्तियों की छोटी-छोटी परेशानियों का भी निराकरण नहीं कर पा रहे हैं, उन पर भी ध्यान दिया जाए। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त है तथा उसके खिलाफ लिखित शिकायत के बाद भी जांच और कार्रवाई में लापरवाही बरती जा रही है, तो ऐसे मामलों को भी मुख्यमंत्री स्तर पर संज्ञान में लिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के आदेश जारी किए जाएं। तभी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी योजना की सफलता और अधिक सार्थक होगी। क्योंकि केवल शिकायत का निराकरण होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि आम व्यक्ति को अपनी समस्या लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंचने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी।

यह कहना भी सही नहीं होगा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से लोगों की समस्याएं दूर नहीं हो रही हैं। यह वास्तविकता है कि जब से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू हुई है, इसका लाभ आम व्यक्ति जरूर ले रहा है और समस्याओं का निराकरण भी हो रहा है। लोग इस योजना से खुश हैं।

जो लोग अपना काम छोड़कर अपनी समस्याओं के लिए कार्यालय और पंचायत के दफ्तरों के चक्कर लगाते थे, कर्मचारियों और अधिकारियों के सामने अपनी समस्या के समाधान के लिए गुहार लगाते थे और फिर भी कार्य नहीं होने पर दुखी हो जाते थे, वैसे लोगों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय निश्चित ही एक हीरो की तरह हैं।

लेकिन जिस दिन मुख्यमंत्री स्वयं उन गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के मामलों पर भी संज्ञान लेना शुरू कर देंगे, जो आम लोगों की समस्याओं के निराकरण में लापरवाही बरत रहे हैं, उस दिन इस व्यवस्था का संदेश और मजबूत होगा। महाजनपद न्यूज की ओर से यह कहना है कि आपके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में अगला चुनाव भाजपा लाएगी और सरकार बनाएगी, ऐसी उम्मीद भी लोग कर सकते हैं—लेकिन इसके लिए शासन की योजनाओं के साथ-साथ जमीनी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी जरूरी है।

सरायपाली, बसना और पिथौरा से उठ रही जवाबदेही की मांग

महासमुंद जिले के सरायपाली, बसना और पिथौरा क्षेत्र के कुछ पत्रकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में कुछ गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें की गईं, लेकिन कुछ मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इन दावों की पुष्टि संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।

फिर भी यदि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत किए जाने के बाद भी संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मामले को गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो ऐसे मामलों को मुख्यमंत्री स्तर पर देखे जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ भी एक्शन लिया जाए।

महाजनपद न्यूज को भी मुख्यमंत्री जी की ऐसी कार्रवाई का इंतजार रहेगा, ताकि पूरा छत्तीसगढ़ यह देख सके कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल आम लोगों की समस्याओं का निराकरण ही नहीं करती, बल्कि जो अधिकारी-कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही करते हैं, उन्हें भी उनकी जिम्मेदारी याद दिलाने और नियमानुसार कार्रवाई करने का माध्यम बनती है।

सिर्फ शिकायत का समाधान नहीं, जिम्मेदारी भी तय हो

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रदेशवासियों की शिकायतों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उनके निराकरण का माध्यम है। सरकार की ओर से दावा किया गया है कि इसके जरिए अब तक लाखों नागरिकों की समस्याओं का समाधान किया जा चुका है।

कमलेश प्रधान की शिकायत का समाधान मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की उपयोगिता को सामने लाता है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या हेल्पलाइन आम लोगों की अंतिम उम्मीद बनी रहेगी, या स्थानीय स्तर पर ही व्यवस्था इतनी मजबूत होगी कि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए नागरिकों को 1076 की घंटी बजाने की जरूरत न पड़े।

क्योंकि असली सफलता सिर्फ यह नहीं कि 1076 पर शिकायत आई और समस्या दूर हो गई। असली सफलता तब होगी, जब आम आदमी की समस्या संबंधित कार्यालय तक पहुंचने से पहले ही जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी समझें और उसका समाधान करें।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शुरुआत के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सराहना करते हुए महाजनपद न्यूज का निवेदन है कि निराकरण के साथ गैर-जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर भी संज्ञान और नियमानुसार कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इससे आम आदमी को राहत भी मिलेगी, शासन-प्रशासन पर भरोसा भी बढ़ेगा और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का उद्देश्य भी पूरी तरह सार्थक होगा।

धन्यवाद।