सरायपाली। छत्तीसगढ़ अंशकालीन स्कूल सफाई कर्मचारी कल्याण संघ, ब्लॉक सरायपाली ने 9 सफाई कर्मचारियों का ₹77,940 भुगतान पिछले वर्ष 2025 से रोके जाने का आरोप लगाया है। संघ ने 29 अगस्त 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति पत्र में मामले को लेकर कई सवाल उठाते हुए उचित कार्रवाई और लंबित भुगतान कराने की मांग की है।
शिकायत पत्र में संघ ने आरोप लगाया है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सरायपाली द्वारा 9 सफाई कर्मचारियों का ₹77,940 का पेमेंट रोक दिया गया है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों ने स्कूल में कार्य किया है और संबंधित प्रधान पाठक ने उनकी उपस्थिति प्रमाणित करते हुए यह भी प्रमाणित किया है कि कर्मचारी ने काम किया है।
इसके बावजूद भुगतान रोके जाने पर संघ ने सवाल उठाते हुए लिखा है कि “क्या बीईओ अपना धान बेचकर हमें पेमेंट देते हैं, कि हम उनके घर के नौकर हैं, जो हमारा पेमेंट रोका गया है?”
प्रधान पाठक ने प्रमाणित की उपस्थिति, फिर भी भुगतान अटका
शिकायत पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों ने स्कूल में काम किया है और उनके कार्य की पुष्टि प्रधान पाठक द्वारा की गई है। इसके बाद भी भुगतान रोक दिया गया। संघ ने सवाल उठाया है कि आखिर किस नियम के तहत स्कूल सफाई कर्मचारियों का पेमेंट रोका गया है।
संघ ने शिकायत में यह भी लिखा है कि पिछले वर्ष 2025 के तीन माह का 9 कर्मचारियों का पेमेंट रोकना बहुत दुख की बात है।
“कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा”
संघ ने शासन से इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि इस तरह नियमों के विपरीत पेंच-पेच के द्वारा कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि उचित कार्रवाई करते हुए उन्हें न्याय दिलाया जाए और लंबित भुगतान कराया जाए।
शिकायत पत्र के साथ 9 सफाई कर्मचारियों के उपस्थिति पत्रक संलग्न किए गए हैं। इनमें संबंधित स्कूलों में कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज है और प्रधान पाठकों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
दस्तावेजों ने बढ़ाए सवाल
मामले में सामने आए उपस्थिति पत्रकों में जून, जुलाई और अगस्त 2025 की उपस्थिति दर्ज है। कुछ पत्रकों में कर्मचारी द्वारा स्कूल में उपस्थित रहकर कार्य करने के दिनों की संख्या और उपस्थित दिनों की संख्या समान दर्ज है।
अब सवाल यह है कि जब कर्मचारियों की उपस्थिति प्रधान पाठक द्वारा प्रमाणित की गई है और संघ के अनुसार उन्होंने कार्य भी किया है, तो ₹77,940 का भुगतान आखिर क्यों रोका गया? इस मामले में विभागीय पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।



