महासमुंद / नेत्री हो तो रुपकुमारी चौधरी जैसा वरना टिकट नहीं मिलने से नाराज, अपना और पार्टी का अस्तित्व खतरे मे देख दल बदलने वालो की यहां कमी नहीं, क्या कह रहे है सरायपाली बसना के लोग चुनाव जीत रही है या हार का सामना?
महासमुंद जिले मे इस वक़्त कांग्रेस के कई कार्यकर्ता भाजपा मे शामिल हो चुके है जिनमे जिला पंचायत अध्यक्ष उषा पटेल के साथ साथ और कई वरिष्ठ नेता और नेत्रियों का नाम शामिल है इनमे से कुछ तो विधानसभा चुनाव समय से ही टिकट नहीं पाने से नाराज थे कई लोकसभा मे लेकिन क्या कांग्रेस से नेता भाजपा मे जाते है उसके बाद उनका जो भी भ्र्ष्टाचार रहता है क्या ओ धूल जाता है या अपने पार्टियों का अस्तित्व खतरे मे देख नेता दल बदल लेते है दल बदलने का मतलब कई बार भ्र्ष्टाचार छिपाना भी रहता है चुकी सत्ता पक्ष मे रहने का यह भी एक फायदा है
वही इन दल बदलू नेत्री और नेताओं को रूप कुमारी चौधरी से सिख लेने की आवश्यकता है की कैसे अपने पार्टी के काठीन परिस्थियो या अपने को टिकट नहीं मिलने से भी पार्टी नहीं छोड़ना चाहिए और शायद इसी ईमानदारी और पार्टी के प्रति मेहनत का फल है की आज भारत की बड़ी पार्टी बीजेपी ने रूप कुमारी चौधरी को अपना लोक सभा प्रत्यासी बनाकर मैदान मे उतारा है ,
नहीं तो याद कीजिए ओ दिन ज़ब रुपकुमारी चौधरी के बजाय डीसी पटेल को विधायक प्रत्यासी बनाकर मैदान मे उतार दिया गया लेकिन रूप कुमारी चौधरी पार्टी नहीं छोडी उसके बाद फिर एक बार बसना मे सम्पत अग्रवाल को टिकट दे दिया गया लेकिन इस बार भी टिकट नहीं मिलने से जो नाराजगी थी शायद रूप कुमारी चौधरी छीपा कर रखी और उसका परिणाम लोकसभा का टिकट मिलकर भरपाई हो गया लेकिन अपना पार्टी नहीं छोडी, वही बसना सरायपाली के स्थानीय लोगो का मनाना है की रूप कुमारी चौधरी पर राज योग है वे चुनाव जीत रही है!



