बसना : मनमाना भुगतान और करोड़ों की संपत्ति का खेल? — लंबे समय तक एक ही पद पर रहते हुए रिस्तेदार सहित मकान, प्लांट, वाहन, बीमा व ज्वेलरी खरीद के आरोप, जांच रिपोर्ट भेजा गया
बसना/महासमुंद। नगर पंचायत बसना में पदस्थ प्रभारी लेखापाल पिंकी पटेल पर गंभीर अनियमितताओं, पद के दुरुपयोग और अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। यह शिकायत पत्रकार एवं समाजसेवी जय कुमार सारथी द्वारा शासन को की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2013 में कैशियर पद पर नियुक्त पिंकी पटेल वर्ष 2015 से नगर पंचायत बसना में प्रभारी लेखापाल के रूप में कार्यरत हैं। शिकायत के अनुसार नियमों के विपरीत एक ही पद पर 10 वर्षों से बने रहने के कारण उन्होंने ठेकों का भुगतान, डेवलपमेंट फंड, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं समेत विभिन्न शासकीय कार्यों में मनमानी की है।
आरोप है कि पिंकी पटेल द्वारा अपने और अपने नजदीकी लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से शासकीय राशि का बंदरबांट किया गया। शासन द्वारा स्वीकृत 2 से 3 लाख के भुगतान को भी पारदर्शी रूप से नहीं किया गया तथा कई कार्यों का भुगतान नियमों की अनदेखी कर निजी स्तर पर तय ठेकेदारों को दिलाया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया कि लंबे समय से प्रभारी लेखापाल बनने का लाभ उठाते हुए पिंकी पटेल ने बसना नगर में तथा अन्यत्र अपने व अपने रिश्तेदारों के नाम पर मकान, प्लांट, बीमा पॉलिसी, ज्वेलरी, वाहन जैसे मोटर कार, मोटरसाइकिल, टीवी, ए.सी. और अन्य संसाधन खरीदे हैं। यह भी उल्लेख है कि उक्त सभी चल-अचल संपत्तियाँ शासन से पूर्व अनुमति लिए बिना अर्जित की गई हैं, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 19(1) का उल्लंघन है।
शिकायतकर्ता ने शासन से मांग की है कि पिंकी पटेल के पूरे सेवा काल में उनके तथा उनके नजदीकी रिश्तेदारों के नाम पर अर्जित सभी संपत्तियों, खरीद-फरोख्त, बैंक खातों और शासकीय भुगतान की विस्तृत जांच की जाए।
मामले में सरकारी विभाग के कर्मचारियों के बीच मिलीभगत और भ्रष्टाचार की आशंका भी व्यक्त की गई है।
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CMO ने दी प्रतिक्रिया
नगर पंचायत बसना के मुख्य नगर अधिकारी (CMO) सूरज सिदार ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि—
> “शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित दस्तावेजों की जांच कर ली गई है और जांच प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। आगे की कार्रवाई वहीं से होगी।”
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वर्तमान में यह मामला नगर पंचायत क्षेत्र में चर्चाओं का प्रमुख विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि शासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।



