सरायपाली: पानी भरते ही टंकी से बहने लगा झरने की तरह पानी, सरपंच संघ अध्यक्ष बोले – “मोदी जी की योजना को ठेकेदारों ने किया बदनाम” 47 लाख लागत
महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जलगढ़ में जल जीवन मिशन योजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव में लाखों रुपये की लागत से निर्मित पानी टंकी में पहली बार पानी भरते ही कई स्थानों से रिसाव शुरू हो गया। टंकी से चारों तरफ झरने की तरह पानी बहता देख ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई।
मामले को लेकर सरपंच संघ अध्यक्ष एवं ग्राम जलगढ़ के सरपंच श्रीमती रेखा लिंगराज साहू ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से गांव में पाइपलाइन, पानी टंकी और घर-घर नल कनेक्शन का कार्य शुरू किया गया था, लेकिन आज तक कई घरों में नल कनेक्शन नहीं पहुंच पाया है और ठेकेदार द्वारा कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।
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सरपंच संघ के अध्यक्ष रेखा साहू के अनुसार पानी के समस्या का मामला सिर्फ जलगढ़ का नहीं है सरायपाली क्षेत्र में कई ऐसे गांव है जहां पानी के लिए समस्याएं हो रही है खासकर गर्मी के दिनों में
सरपंच के अनुसार गांव में पानी की समस्या को देखते हुए लगभग 500 मीटर दूर स्थित बोरवेल से पानी लाकर टंकी में पहली बार भरा गया, लेकिन पानी भरते ही टंकी के चारों तरफ से रिसाव शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था मानो टंकी नहीं बल्कि कोई झरना बह रहा हो।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य पूरी तरह गुणवत्ता विहीन तरीके से किया गया है। टंकी तक चढ़ने के लिए बनाई गई सीढ़ियां भी अभी से टूटने लगी हैं। वहीं पाइपलाइन और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। वीडियो
कार्य स्थल पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार यह कार्य “जल जीवन मिशन” के अंतर्गत ग्राम जलगढ़ में जल प्रदाय योजना के रेट्रोफिटिंग कार्य के रूप में कराया गया। योजना की कुल लागत लगभग 47.65 लाख रुपये बताई गई है। बोर्ड में ठेकेदार एजेंसी के रूप में “शिवम कंस्ट्रक्शन” मेसर्स भरत राठी का नाम दर्ज है, जबकि एजेंसी जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन महासमुंद को बताया गया है। कार्य आदेश क्रमांक 344/DL/2021-22 के तहत इस योजना की समय सीमा 9 माह निर्धारित की गई थी।
योजना के तहत 50 कि. ली . स्टेजिंग क्षमता की उच्च स्तरीय पानी टंकी, 12 मीटर ऊंचाई का जलाशय, 1050 मीटर एवं 100 मीटर वितरण पाइपलाइन, यूपीवीसी पाइप, पंप कक्ष, क्लोरीनेटर रूम और क्लोरीनेटर सिस्टम का निर्माण किया जाना था। लेकिन चार वर्ष बीतने के बाद भी योजना पूरी तरह चालू नहीं हो पाई है।
सरपंच और ग्रामीणों का कहना है कि 47 लाख खर्च होने के बावजूद गांव में नियमित जल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। कई घरों में आज भी नल कनेक्शन नहीं पहुंचा है और जहां कनेक्शन दिया गया है वहां पानी नहीं पहुंच रहा। अब पहली बार पानी भरते ही टंकी में रिसाव शुरू हो जाना निर्माण गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
सरपंच संघ अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की “हर घर नल, हर घर जल” योजना का उद्देश्य ग्रामीणों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, लेकिन जिम्मेदार इंजीनियरों और ठेकेदारों की लापरवाही से योजना बदनाम हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जांच और सुधार नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सरपंच श्रीमती रेखा साहू और ग्रामीणों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करवाने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
मामले में phe विभाग के SDO के नंबर पर फोन लगाने पर बंद आया


