अंतर्राज्यीय वनोपज जाँचनाका टेमरी में अवैध सागौन परिवहन करते हुए महिंद्रा पिकअप वाहन जब्त
महासमुंद वनमंडल में अवैध वनोपज परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु चलाए जा रहे सघन गश्ती अभियान के अंतर्गत, वनमंडलाधिकारी श्री मयंक पांडेय के कुशल मार्गदर्शन एवं उपवनमंडलाधिकारी श्री गोविंद सिंह के नेतृत्व में आज दिनांक 09 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
इस कार्रवाई के दौरान महासमुंद वनमंडल के बागबहारा परिक्षेत्र अंतर्गत उड़ीसा सीमा पर स्थित अंतर्राज्यीय वनोपज जाँचनाका टेमरी में जाँच के दौरान अवैध रूप से सागौन का परिवहन करते हुए एक महिंद्रा पिकअप वाहन क्रमांक RJ 19 H 5254 (राजस्थान पंजीकृत) को रोका गया।
वाहन चालक द्वारा प्रस्तुत ट्रांजिट पास आम की लकड़ी के परिवहन हेतु जारी पाया गया, जो कि फॉरेस्ट ऑफिसर, पेंड्रूथी सेक्शन, विशाखापट्टनम रेंज द्वारा निर्गत था। ट्रांजिट पास के अनुसार वाहन में आम चिरान 300 नग (3.12 घनमीटर) परिवहन किया जाना दर्शाया गया था।
संदेह के आधार पर वाहन की गहन जाँच करने पर यह पाया गया कि आम चिरान के नीचे 1.85 घनमीटर सागौन चिरान को योजनाबद्ध रूप से छिपाकर अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था। यह कृत्य भारतीय वन अधिनियम, 1927 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
उक्त अवैध सागौन चिरान सहित वाहन को अंतर्राज्यीय वनोपज जाँचनाका टेमरी में विधिवत जब्त किया गया। इस संबंध में वन अपराध क्रमांक 22663/05 दिनांक 09.02.2026 पंजीबद्ध कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। अवैध सागौन परिवहन में प्रयुक्त वाहन को राजसात किए जाने की प्रक्रिया जारी है।
इस सफल कार्रवाई में बागबहारा परिक्षेत्र अधिकारी श्री लोकनाथ ध्रुव, डिप्टी रेंजर श्री दुलार सिन्हा, फॉरेस्ट गार्ड श्री खेमराज साहू सहित जाँचनाका टेमरी में पदस्थ कर्मचारियों की सतर्कता एवं तत्परता सराहनीय रही।
वन विभाग द्वारा अवैध वनोपज परिवहन के विरुद्ध भविष्य में भी कठोर एवं सतत कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

बसना। लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत बसना से पदमपुर (उड़ीसा अंतराज्यीय सीमा) को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग इन दिनों अत्यधिक जर्जर एवं खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुका है। सड़क पर जगह-जगह बने बड़े एवं गहरे गड्ढों के कारण आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
सुकमा। एक दिवसीय दिव्य दरबार के आयोजन हेतु प्रेमा साईं जी महाराज सुकमा पहुँच चुके हैं। मंगलवार, 10 फरवरी को लगने वाले इस दिव्य दरबार को लेकर पूरे बस्तर अंचल में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक उमंग का वातावरण है। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश–विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पर्चा बनवाने और महाराज श्री के दर्शन–आशीर्वाद हेतु सुकमा पहुँच रहे हैं।
यह दिव्य दरबार छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक पहचान और गौरव का प्रतीक बनकर उभर रहा है। प्रेमा साईं जी महाराज का यह आयोजन केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति को सशक्त करने का जीवंत मंच है। बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी सक्रिय उपस्थिति से सामाजिक चेतना को नया बल मिला है और धर्मांतरण जैसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी रोक लगी है।
महासमुंद / महासमुंद जिले में कमार जनजाति का निवास बागबाहरा, महासमुंद एवं पिथौरा विकासखंड के कुछ ग्रामों में है। आदिम जाति अनुसंधान केंद्र द्वारा वर्ष 2015-16 में किए गए आधारभूत सर्वेक्षण के अनुसार जिले में कुल 923 कमार परिवार निवासरत हैं, जिनकी कुल जनसंख्या 3309 है। इसमें 1614 पुरुष एवं 1695 महिलाएं शामिल हैं। यह जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति की श्रेणी में आती है, जिसके समग्र विकास हेतु जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।