महासमुंद श्रम विभाग ने हितग्राहियों से की अपील सामग्री मूलक योजनाओं के लंबित दस्तावेज जल्द पूर्ण कर लाभ लें

महासमुंद श्रम विभाग ने हितग्राहियों से की अपील सामग्री मूलक योजनाओं के लंबित दस्तावेज जल्द पूर्ण कर लाभ लें

 

महासमुंद/ श्रम विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा संचालित विभिन्न सामग्री मूलक योजनाओं में हितग्राहियों के अधूरे आवेदन लंबित हैं। विभाग ने जानकारी दी कि जुलाई 2025 में मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना एवं मुख्यमंत्री सुरक्षा उपकरण योजना के अंतर्गत प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों में आवश्यक दस्तावेज की कमी पाए जाने पर उन्हें अपूर्ण स्थिति में वापस कर सुधार हेतु भेजा गया था।

विभाग ने बताया कि आवेदनों की अपूर्णता की सूचना विभागीय वेबसाइट एवं हितग्राहियों के श्रमिक पंजीयन कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबरों पर एसएमएस के माध्यम से भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद निर्धारित 15 दिनों में दस्तावेज पूरे नहीं किए गए हैं, जिससे योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। योजनाओं के अंतर्गत अब तक जिन आवेदनों को दस्तावेज के अभाव में वापस किया गया है, इनमें मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना के 5,326 आवेदन, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के 293 आवेदन, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के 11,142 आवेदन एवं मुख्यमंत्री सुरक्षा उपकरण योजना के 3,250 आवेदन शामिल हैं।

श्रम विभाग ने हितग्राहियों से अपील की है कि वे विभागीय पोर्टल https://shramevjayate.cg.gov.in पर लॉगिन कर अथवा अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र, जिला श्रम कार्यालय एवं जनपद पंचायत अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री श्रम संसाधन केंद्र में जाकर शीघ्र आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें। विभाग द्वारा सभी पात्र श्रमिकों से आग्रह किया है कि 15 दिनों के भीतर दस्तावेज अपलोड या जमा कर योजनाओं का लाभ समय पर प्राप्त करें।

छत्तीसगढ़ में पिछले तीन महीने से नहीं मिली 50 हजार महिलाओं को जननी सुरक्षा की राशि, स्वास्थ्य मंत्री बोले- मैं इसे दिखवाता हूं…

छत्तीसगढ़ में पिछले तीन महीने से नहीं मिली 50 हजार महिलाओं को जननी सुरक्षा की राशि, स्वास्थ्य मंत्री बोले- मैं इसे दिखवाता हूं…

 

छत्तीसगढ़: गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरेखा कही जाने वाली जननी सुरक्षा योजना इन दिनों खुद वेंटिलेटर पर पहुंच गई है। नियमों के अनुसार प्रसव के सात दिन के भीतर महिलाओं को सहायता राशि उनके खाते में मिल जानी चाहिए, लेकिन प्रदेश में पिछले तीन महीनों से भुगतान नहीं हो सका है। प्रदेश की लगभग 50 हजार महिलाएं आज भी योजना की राशि का इंतजार कर रही हैं। रायपुर जिले में तीन माह में 6200 प्रसव हुए हैं। इनमें से 2200 महिलाएं बैंकों और अस्पतालों के चक्कर लगा रही हैं।

केंद्र से आया फंड, राज्य में अटका

जननी सुरक्षा योजना के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 55 करोड़ 85 लाख रुपये का बजट मंजूर किया है। योजना का लक्ष्य 6.81 लाख महिलाओं को लाभ देना है। अब तक प्रदेश में लगभग 1.47 लाख प्रसव हो चुके हैं, लेकिन इनमें से 50 हजार से अधिक महिलाओं को राशि नहीं मिली। जिला अधिकारियों का कहना है कि वे डिमांड राज्य स्तर पर भेज चुके हैं, मगर भुगतान की फाइलें मंत्रालय में अटकी पड़ी हैं। नतीजा यह है कि फंड केंद्र से आने के बावजूद महिलाओं तक नहीं पहुंच पा रहा।

लक्ष्य 2025-26 :

6 लाख 81 हजार महिलाओं को देना है लाभ

1.47 लाख अप्रैल से अगस्त तक प्रसव:

50 हजार महिलाएं भुगतान से वंचित

6200 प्रसव रायपुर जिले में

55.85 करोड़ केंद्र से स्वीकृत राशि

07 दिन के भीतर राशि खातों में आनी चाहिए

1400 रुपये मिलता है ग्रामीण महिलाओं को

1000 रुपये शहरी महिला को लाभ

योजना का उद्देश्य और हकीकत

योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये दिए जाते हैं। यह राशि प्रसव के बाद पोषण, दवाइयों और नवजात की देखभाल के लिए उपयोगी होती है।

महिलाओं की पीड़ा, खाते अब भी खाली

गुढ़ियारी की सीमा साहू ने दिसंबर 2024 में बेटी को जन्म दिया था। नर्स ने आश्वासन दिया था कि सात दिन में राशि खाते में आ जाएगी। मगर खाते में अब तक पैसा नहीं आया।

धरसींवा की ममता निषाद का प्रसव तीन महीने पहले हुआ। वह अब तक दवाइयों और बच्चे के दूध के लिए रिश्तेदारों से उधार ले रही हैं। उनका कहना है कि मितानिन ने कहा था सरकार मदद करेगी, पर अब तक एक रुपया भी नहीं मिला।

स्वास्थ्य विभाग की एक ड्राइवर की पत्नी को भी राशि नहीं मिली। कर्मचारी रोजाना अफसरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है।

विशेषज्ञों का यह है कहना

जननी सुरक्षा जैसी योजना केवल पैसे बांटने की योजना नहीं है। यह मातृत्व शक्ति को सशक्त बनाने और नवजात शिशु को कुपोषण से बचाने का बड़ा कदम है। सरकार को इसे टॉप प्रायोरिटी में लेकर तुरंत भुगतान करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो योजना अपने असली मकसद से भटक जाएगी।”

रिटायर्ड आइएएस बीकेएस, स्वास्थ्य विशेषज्ञ

फंड की कमी के कारण भुगतान अटका है। राज्य स्तर पर डिमांड भेज दी गई है। फंड मिलते ही राशि तुरंत जारी कर दी जाएगी।

– डॉ. मिथिलेश चौधरी, सीएमएचओ, रायपुर

मैं इसे दिखवाता हूं क्यों देरी हुई है, जल्द ही राशि जारी करने का निर्देश देता हूं।

– श्यामबिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री, छग शासन

कार बाइक-स्कूटर के दाम में भारी गिरावट, नवरात्रि में खरीदने का अच्छा मौका GST की नई दरें लागू

कार बाइक-स्कूटर के दाम में भारी गिरावट, नवरात्रि में खरीदने का अच्छा मौका GST की नई दरें लागू

जीएसटी की नई दरें सितंबर को नवरात्रि 2025 के शुभ मौके पर लागू हो रही हैं और इसी के साथ देशभर में काफी सारी चीजें सस्ती हो गई हैं और बाइक-स्कूटर और कार खरीदने वालों को बंपर लाभ होने जा रहा हैं। गाड़ियों पर नई जीएसटी दरें लागू होने के बाद लोगों के काफी सारे पैसे बचेंगे।

नवरात्रि के पहले दिन से कार और दोपहिया वाहन सस्ते हो गए हैं। जी हां, आज 22 सितंबर से जीएसटी में कटौती के बाद मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई, टोयोटा और किआ-एमजी समेत और भी कार कंपनियों के साथ ही हीरो, होंडा, टीवीएस, बजाज, सुजुकी, रॉयल एनफील्ड और यामाहा समेत बड़ी टू-व्हीलर कंपनियां अपने बाइक और स्कूटर की कीमतों में कमी करने जा रही हैं। ऐसे में आज से जो लोग अपने लिए नई गाड़ियां खरीदने जाएंगे, उन्हें बंपर फायदा होने जा रहा है। आप भी जान लें कि कौन की कंपनियों ने अपने मॉडल के दाम में कितनी कटौती की है।

मारुति से लेकर टाटा तक की गाड़ियां सस्ती
आज 22 सितंबर से मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने अपनी कारों की कीमतों में 1.29 लाख रुपये तक की कटौती की है। टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने यात्री गाड़ियों की कीमतें 1.45 लाख रुपये तक कम करने का फैसला किया है। महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra) ने पहले ही अपनी गाड़ियों की कीमतों में 1.56 लाख रुपये तक की कटौती कर दी है। हुंडई (Hyundai Motor) ने कारों की कीमतों में 2.4 लाख रुपये तक की कटौती की है।

दाम में भारी कटौती
होंडा (Honda) और किआ इंडिया (Kia India) भी अपनी गाड़ियों की कीमतों में कटौती करेंगे। टोयोटा (Toyota) किर्लोस्कर मोटर की गाड़ियां भी सस्ती हो जाएंगी। मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz), बीएमडब्ल्यू (BMW) और ऑडी (Audi) जैसी लग्जरी कार कंपनियों ने भी कीमतों में कटौती की घोषणा की है। हीरो मोटोकॉर्प (Hero Motocorp) और होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (HMSI) के साथ ही सुजुकी (Suzuki), टीवीएस (TVS), यामाहा (Yamaha), रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) समेत अन्य कंपनियों के दोपहिया वाहन भी सस्ते हो जाएंगे। इससे ग्राहकों को नवरात्रि के त्योहार में नई गाड़ी खरीदने का अच्छा मौका मिलेगा।

जीएसटी घटने से ग्राहकों को बंपर लाभ
इन सबके बीच आपको बता दें कि 22 सितंबर से पहले कार समेत अन्य सेगमेंट की गाड़ियों पर कम से कम 28 फीसदी जीएसटी के साथ ही अलग-अलग सेस भी लगता था। ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा जीएसटी दर को कम से कम 18 पर्सेंट किए जाने के बाद जहां 1200 सीसी इंजन और 4 मीटर तक की कारों पर करीब 2 लाख रुपये तक की बचत ग्राहकों को हो जाएगी, वहीं 350 सीसी तक के मोटरसाइकल और स्कूटर की कीमतों में भी हजारों रुपये की गिरावट हो गई है। फेस्टिवल सीजन से पहले वाहनों के दाम में यह गिरावट जनता के लिए गिफ्ट की तरह है, क्योंकि त्योहार के मौसम में गाड़ियों की बिक्री काफी बढ़ जाती है।

सरायपाली चीवराकुटा : नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में  3D/4D सोनोग्राफी सुविधा गर्भवती महिलाओं को मिल रही आधुनिक जांच और देखभाल

सरायपाली चीवराकुटा : नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में  3D/4D सोनोग्राफी सुविधा गर्भवती महिलाओं को मिल रही आधुनिक जांच और देखभाल

सिंघोड़ा (छत्तीसगढ़)।
गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में सरायपाली क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया गया है। अब चीवराकुटा, सिंघोड़ा स्थित नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में 3D/4D सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध हो चुकी है और मरीज इसका लाभ लेने लगे हैं। यह सुविधा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अब उन्हें जांच के लिए रायपुर या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

 

शिशु की पहली झलक से उत्साहित परिजन सोनोग्राफी जांच के दौरान गर्भवती महिला और उसके परिजनों को होने वाले शिशु की तस्वीर और गतिविधियाँ देखने को मिलती हैं। 2D सोनोग्राफी जहाँ केवल सामान्य ब्लैक एंड व्हाइट छवि दिखाती है, वहीं 3D तकनीक में शिशु की स्थिर तस्वीर और 4D तकनीक में उसकी गतिविधियाँ तक दिखाई देती हैं। कई गर्भवती महिलाएँ और उनके परिवारजन इस अनुभव को भावनात्मक बताते हुए कहते हैं कि यह उनके लिए शिशु से पहला परिचय होता है।

तकनीक से मिल रही है अहम जानकारी डॉक्टरों का कहना है कि 3D/4D सोनोग्राफी केवल तस्वीर दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस तकनीक से-

शिशु के सिर की सही स्थिति,

गर्भाशय में एम्नियोटिक द्रव की मात्रा,

शिशु की गतिवधियों की जानकारी,
नाल के माध्यम से रक्त प्रवाह की स्थिति
का सटीक पता लगाया जा सकता है। समय रहते किसी भी असामान्यता का पता लग जाने से उचित उपचार भी आसान हो जाता है।

ग्रामीण अंचल को बड़ी राहत
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इस सुविधा से सरायपाली, सिंघोड़ा और आसपास के गाँवों की गर्भवती महिलाओं को उच्च स्तरीय जांच अपने ही इलाके में मिल रही है। पहले महिलाओं को रायपुर जैसे बड़े शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी, जिसमें समय और पैसे दोनों का खर्च होता था। अब यह सुविधा नजदीक में ही उपलब्ध हो गई है।

संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ
नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल न केवल आधुनिक सोनोग्राफी सुविधा दे रहा है, बल्कि गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व की दिशा में संपूर्ण देखभाल भी प्रदान कर रहा है। यहाँ पर गर्भावस्था संबंधी परामर्श, पोषण मार्गदर्शन और सुरक्षित डिलीवरी की सुविधा भी मौजूद है। अस्पताल से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि उनका लक्ष्य मां और शिशु दोनों की सेहत को प्राथमिकता देना है।

नवजीवन मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में शुरू हुई 3D/4D सोनोग्राफी सुविधा से क्षेत्र की महिलाओं को आधुनिक स्वास्थ्य तकनीक का लाभ मिलने लगा है। यह न केवल मां और शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी बल्कि ग्रामीण अंचल की स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई दिशा प्रदान करेगी। पता: चीवराकुटा, सिंघोड़ा, सरायपाली (छ.ग.)
📞 संपर्क: 87709 03234, 94241 84383

छत्तीसगढ़ : कम अवधि और कम पानी उत्पादन क्षमता 60-70 क्विंटल, 125-130 दिनों में तैयार हो जाती है फसल

छत्तीसगढ़ : कम अवधि और कम पानी उत्पादन क्षमता 60-70 क्विंटल, 125-130 दिनों में तैयार हो जाती है फसल

धान की फसल के लिए पानी ज्यादा लगता है। फसल तैयार होने के बाद आंधी-तूफान या बारिश आने पर लंबी बालियों के चलते नुकसान का भी जोखिम रहता है। कृषि विभाग ने धान की खेती में इन समस्याओं से निपटने के लिए विशेष किस्म का बीज तैयार किया है। ‘विक्रम टीसीआर’ नाम की धान की यह नई किस्म कम समय में अच्छा पैदावार देती है। इसकी प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता 60 क्विंटल से 70 क्विंटल तक है। इसकी एक और खासियत यह है कि यह मात्र 125 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे पानी की खपत कम होती है।

बेमेतरा में कृषि विभाग के उप संचालक श्री मोरध्वज डड़सेना ने बताया कि ‘विक्रम टीसीआर’ की लंबाई कम और उपज अधिक है। कम लंबाई के कारण यह तेज हवा और आंधी-तूफान में भी गिरती नहीं है। यह धान के अन्य बीजों की तुलना में अधिक हवादार परिस्थितियों को सहन कर सकती है। उन्होंने बताया कि जिले में 67 हेक्टेयर में धान की इस नवीन किस्म का बीज कृषकों द्वारा तैयार किया जा रहा है। आदिवासी ग्राम झालम में भी पहली बार कृषकों ने इस किस्म के बीजोत्पादन का कार्यक्रम लिया है। यह उत्पादित बीज किसानों द्वारा उच्च कीमत पर बीज निगम में विक्रय कर अगले वर्ष जिले के अन्य किसानों को खेती के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

श्री डड़सेना ने बताया कि पिछले वर्ष 16 हेक्टेयर में सुगंधित धान की किस्म ‘सीजी देवभोग’ का बीज तैयार किया गया था। इस वर्ष ‘सीजी देवभोग’ के साथ ‘विक्रम टीसीआर’ का बीज अधिक मात्रा में उत्पादित होगा। इससे बेमेतरा जिला नवीन किस्मों के बीज के उत्पादन में आत्मनिर्भर होगा और किसानों को अधिक सुरक्षित, लाभकारी और कम पानी की खपत वाली फसल के विकल्प मिलेंगे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ‘विक्रम टीसीआर’ न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। कृषि विभाग के इस कदम को बेमेतरा में आधुनिक और सतत कृषि की दिशा में एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि बेमेतरा जिले के सभी विकासखंडों को केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संकट के दृष्टिकोण से रेड जोन घोषित किया गया है। साजा विकासखंड को सेमी-क्रिटिकल जोन में तथा बेमेतरा, बेरला और नवागढ़ विकासखंडों को क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है। जिले की स्थिति को देखते हुए किसानों के लिए केवल खेती करना ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक हो गया है। धान की ये नई किस्में जल संरक्षण और फसल सुरक्षा में बहुत उपयोगी साबित होंगी।

CG Maoist Surrender: 64 लाख के इनामी 30 माओवादियों सहित 71 ने किया आत्मसमर्पण, 20 महिलाएं शामिल

CG Maoist Surrender: 64 लाख के इनामी 30 माओवादियों सहित 71 ने किया आत्मसमर्पण, 20 महिलाएं शामिल

 

छत्तीसगढ़ दंतेवाड़ा में बुधवार को 30 इनामी माओवादियों सहित 71 माओवादियों ने हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। यह माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।71 माओवादियों में 51 पुरुष हैं और 20 महिलाएं हैं।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिनमें कुछ प्रमुख कमांडर भी शामिल थे। इनमें बामन मड़काम (8 लाख का इनामी), शमिला कवासी (5 लाख का इनामी) और गंगी बारसे (5 लाख का इनामी) जैसे नाम प्रमुख हैं। ये सभी माओवादी बंद सप्ताह के दौरान सड़क काटने, पेड़ गिराने और पुलिस मुठभेड़ों में शामिल रहे थे।

इस अभियान का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., डीआईजी कमलोचन कश्यप, एसपी गौरव राय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में किया गया। इस सफलता में डीआरजी/बस्तर फाइटर्स, विशेष आसूचना शाखा और सीआरपीएफ की विभिन्न बटालियनों का योगदान महत्वपूर्ण रहा।

आत्मसमर्पण के बाद इन माओवादियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे। इनमें 50,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता राशि, कौशल विकास प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर शामिल हैं, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि पुलिस की आक्रामक रणनीति और लगातार अभियानों के कारण माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है, जिसका नतीजा यह है कि बड़ी संख्या में नक्सली अब आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

लोन वर्राटू’ अभियान प्रभावी

यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि ‘लोन वर्राटू’ अभियान प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। इस अभियान के तहत अब तक 1113 से अधिक माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। दंतेवाड़ा पुलिस ने माओवादियों से एक बार फिर हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और सद्भाव की राह अपनाने की अपील की है।

दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय ने कहा कि लोग माओवादियों की खोखली विचारधारा से तंग आ चुके हैं। पुलिस की आक्रामक रणनीति और लगातार ऑपरेशन के चलते निचले कैडर के माओवादी सरेंडर कर रहे हैं। इससे बड़े कैडर के माओवादियों का नेटवर्क कमजोर पड़ता जा रहा है। इसी का नतीजा है कि दंतेवाड़ा में अब तक का सबसे बड़ा सरेंडर हुआ है।

सरायपाली : शासकीय प्राथमिक शाला गंधेलडीपा में नेवता भोज का आयोजन

सरायपाली : शासकीय प्राथमिक शाला गंधेलडीपा में नेवता भोज का आयोजन

विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रकाश चंद्र मांझी, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी डी एन दीवान एवं विकासखंड स्त्रोत समन्वयक (समग्र शिक्षा) सरायपाली सतीश स्वरूप पटेल के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति योजना अंतर्गत स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन देने के लिए नेवता भोज का आयोजन किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला गंधेलडीपा, विकासखंड- सरायपाली, जिला- महासमुन्द में सहायक शिक्षक उषा चौहान के सुपुत्र के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर नेवता भोज कार्यक्रम रखा गया। नेवता भोज में बच्चों को खीर, पुड़ी,सब्जी, मीठा और फल दिया गया। इस अवसर पर शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष, पालक गण एवं बच्चे उपस्थित थे।

CG News:100 दिन में पैसा डबल… रकम दोगुनी करने का लालच देकर 5 करोड़ की ठगी, कंपनी के संचालक के खिलाफ FIR

CG News:100 दिन में पैसा डबल… रकम दोगुनी करने का लालच देकर 5 करोड़ की ठगी, कंपनी के संचालक के खिलाफ FIR

 

छत्तीसगढ़ राजधानी रायपुर में एक बड़े निवेश घोटाले का राजफाश हुआ है। टिकरापारा थाना पुलिस ने ए स्क्वायर ग्लोबल कंसल्टेंसी कंपनी के संचालक अनिरुद्ध दलवी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने लोगों को 100 दिन में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर करोड़ों रुपये हड़प लिए और बाद में संचालक फरार हो गया।

शिकायतकर्ता अनवर मोहम्मद निवासी रायपुर ने थाना पहुंचकर लिखित आवेदन में बताया कि अनिरुद्ध दलवी ने सोशल मीडिया और सेमिनारों के जरिए निवेशकों को अपनी कंपनी में रकम लगाने के लिए प्रेरित किया। उसने दावा किया था कि कंपनी में जमा रकम पर प्रतिदिन 2 प्रतिशत मुनाफा मिलेगा और सौ दिन बाद रकम दोगुनी लौटा दी जाएगी।

विश्वास जीतने के लिए पहले किया भुगतान

विश्वास जमाने के लिए अनिरुद्ध दलवी ने निवेशकों को बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कर शुरुआती दिनों में कुछ भुगतान भी किया। लेकिन अप्रैल 2025 के बाद पैसे लौटाने के नाम पर बहाने बनाने लगा। कभी कंपनी की वेबसाइट हैकिंग, तो कभी ट्रेडिंग अकाउंट में तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देकर निवेशकों को टालता रहा। अंततः लाखों-करोड़ों रुपये लेने के बाद मोबाइल नंबर बंद कर फरार हो गया।

पीड़ित अनवर मोहम्मद ने बताया कि उसने स्वयं 5.40 लाख रुपये कंपनी के खाते में जमा किए, जबकि उसके परिचितों और मित्रों ने मिलकर करीब 5 करोड़ रुपये निवेश किया। शिकायत में जांजगीर, दुर्ग, रायपुर, कोरबा, झारखंड और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिन्होंने दलवी के झांसे में आकर रकम लगाई थी।

पुलिस ने प्रकरण में छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 10 और धोखाधड़ी की धारा के तहत अपराध दर्ज किया है। फिलहाल आरोपी अनिरुद्ध दलवी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।

बसना : मानसिक रोगों के प्रति बढ़ती जागरूकता: 25 सितम्बर को अग्रवाल नर्सिंग होम में विशेषज्ञ डॉ. बी. त्रिवेदी देंगे उपचार और परामर्श

बसना : मानसिक रोगों के प्रति बढ़ती जागरूकता: 25 सितम्बर को अग्रवाल नर्सिंग होम में विशेषज्ञ डॉ. बी. त्रिवेदी देंगे उपचार और परामर्श

महासमुंद। आधुनिक जीवनशैली, भागदौड़ और तनावपूर्ण वातावरण के कारण मानसिक रोगों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहाँ लोग मानसिक बीमारियों को लेकर खुलकर बात करने से कतराते थे, वहीं अब समाज में इस विषय पर जागरूकता बढ़ रही है। चिंता, तनाव, अवसाद, अनिद्रा, नशे की लत, चिड़चिड़ापन और अनावश्यक डर जैसी समस्याएं अब आम हो चुकी हैं। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अग्रवाल नर्सिंग होम मल्टीस्पेशियलिटी सेंटर ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष परामर्श शिविर का आयोजन किया है।

यह शिविर गुरुवार, 25 सितम्बर 2025 को शाम 6 बजे से रात 7 बजे तक आयोजित होगा। इसमें प्रसिद्ध मानसिक एवं यौन रोग विशेषज्ञ डॉ. बी. त्रिवेदी (एम.बी.बी.एस., डी.एन.बी.) मरीजों को उपचार और मार्गदर्शन देंगे।

मानसिक रोगों के प्रमुख लक्षणवि शेषज्ञों के अनुसार मानसिक बीमारियों की पहचान कई बार मुश्किल हो जाती है क्योंकि इनके लक्षण शारीरिक नहीं, बल्कि व्यवहार और सोच में दिखाई देते हैं।घबराहट, बेचैनी और एक ही विचार बार-बार मन में आना।तनाव, फोबिया, चिड़चिड़ापन और अत्यधिक क्रोध।किसी कार्य में मन न लगना, अनिद्रा, आलस्य, आत्मविश्वास की कमी।अकेले में बड़बड़ाना, अनावश्यक डर महसूस होना।याददाश्त की समस्या, बार-बार चीज़ें भूलना।नशे की लत जैसे शराब, गांजा, तंबाकू, सिगरेट, मादक पदार्थों का सेवन।यौन संबंधी विकार, थकान, शारीरिक कमजोरी, व्यवहार में बदलाव आदि।यदि समय रहते इन समस्याओं का इलाज न किया जाए तो यह गंभीर मानसिक विकारों का रूप ले सकती हैं।

समाज में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतीतेजी से बदलती जीवनशैली ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है। आजकल बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इस समस्या से जूझ रहे हैं। पढ़ाई का दबाव, बेरोजगारी, कार्यस्थल का तनाव, पारिवारिक कलह और नशे की प्रवृत्ति मानसिक रोगों को जन्म दे रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

कई बार लोग शर्म या सामाजिक दबाव के कारण अपनी समस्या छिपाते हैं और इलाज नहीं करवाते। यही वजह है कि अवसाद या अन्य विकार गंभीर स्तर तक पहुँच जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह सामान्य हैं और इनका इलाज पूरी तरह संभव है।

शिविर की विशेषता

अग्रवाल नर्सिंग होम द्वारा आयोजित इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीजों को विशेषज्ञ से व्यक्तिगत रूप से मिलने और परामर्श लेने का अवसर मिलेगा।

डॉ. बी. त्रिवेदी मरीजों की जांच कर सही उपचार और दवाइयों की जानकारी देंगे।

मानसिक व यौन रोगों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास करेंगे।

मरीजों को स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए मार्गदर्शन देंगे।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस शिविर के लिए अग्रिम पंजीयन अनिवार्य है। इससे मरीजों को समय पर सुविधा मिल सकेगी और उन्हें अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।

अस्पताल प्रबंधन का संदेश

अग्रवाल नर्सिंग होम के प्रबंधन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता फैलाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। शारीरिक बीमारियों की तरह ही मानसिक रोगों का भी समय पर इलाज बेहद ज़रूरी है।

प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति में उपरोक्त लक्षण दिखाई दें तो उसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें। समय रहते उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है।

पंजीयन और संपर्क विवरण

इस विशेष शिविर में परामर्श के लिए मरीजों को पूर्व पंजीयन कराना होगा।
📞 संपर्क नंबर: 77708-68473, 84618-11000

मध्य प्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के बदलेंगे चेहरे, चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त

मध्य प्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस में जिला अध्यक्षों के बदलेंगे चेहरे, चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त

 

रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) का गुजरात से शुरू हुआ ‘संगठन सृजन अभियान’ अब हरियाणा और मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में भी लागू होगा। प्रदेश में कई जिलों के अध्यक्षों को बदला जाएगा। इसके लिए एआईसीसी ने 17 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी है।

ये पर्यवेक्षक जिलों का दौरा कर स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे और जिला अध्यक्ष पद के दावेदारों की सूची तैयार कर साक्षात्कार लेंगे। इसके बाद गोपनीय रिपोर्ट एआईसीसी को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर नए जिलाध्यक्ष नियुक्त होंगे। अक्टूबर में पर्यवेक्षकों के आने की संभावना है।

महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता

जिलाध्यक्ष के लिए तीन से पांच नाम प्रस्तावित किए जाएंगे। इनमें 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे, जबकि शेष पदों में 50 वर्ष से कम आयु के युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। एआईसीसी चाहती है कि नए जिलाध्यक्ष केवल संगठनात्मक जिम्मेदारी ही न संभालें बल्कि चुनाव लड़ने योग्य भी हों।

संगठन को मजबूत करने की कोशिश

गुजरात और अन्य राज्यों की तरह यहां भी पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की योजना बना रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मार्च में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 14 जिलाध्यक्षों की सूची जारी की थी, लेकिन 27 जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां लंबित रहीं। पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि आगे और भी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह कदम आगामी विधानसभा, लोकसभा और नगरीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।

जिलाध्यक्षों को मिलेंगी अधिक शक्तियां

इस बार जिलाध्यक्षों को संगठन में पूरी शक्तियां दी जाएंगी। टिकट वितरण में भी उनकी रिपोर्ट को अहम माना जाएगा। अब तक जिलाध्यक्षों पर किसी विशेष नेता या गुट का दबाव रहता था और स्थानीय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती थी। नए बदलाव से पार्टी को जमीनी कार्यकर्ताओं को जोड़ने में मदद मिलेगी।

नियुक्त पर्यवेक्षकों की सूची

सप्तगिरि उलाका, अजय कुमार लल्लू, सुबोध कांत सहाय, उमंग सिंगर, आरसी खुंटिया, राजेश ठाकुर, विवेक बंसल, डॉ. नितिन राउत, श्याम कुमार बरवे, प्रफुल्ल गुदाढे, चरण सिंह सापरा, विकास ठाकरे, हीना कांवरे, रीता चौधरी, रेहाना रेयाज चिश्ती, अजमतुल्लाह हुसैनी और सीताराम लांबा।

मंडल और ब्लॉक कमेटियां

प्रदेश कांग्रेस में मंडल और ब्लॉक कमेटियों का गठन भी पूरा हो गया है। सूची जल्द जारी होगी। बताया जा रहा है कि प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज ने सूची एआईसीसी को भेज दी है। 7 जुलाई को राजधानी के राजीव भवन में हुई राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने निर्देश दिए थे कि बूथ से लेकर जिलाध्यक्षों की नियुक्ति 30 सितंबर तक पूरी कर ली जाए।

पहली बार प्रदेश में ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के नीचे मंडल कमेटियों का गठन किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में करीब 1,300 मंडल कमेटियां बनाई जाएंगी, जिनमें प्रत्येक में 21 सदस्य होंगे। इनमें अध्यक्ष, तीन उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, तीन सचिव, तीन सहसचिव, एक इंटरनेट मीडिया समन्वयक और नौ कार्यकारिणी सदस्य शामिल होंगे।