पूर्व राजवंशों के समय फुलझर राज्य का 18 गढ आज सरायपाली बसना के ये गांव है

बिलासपुर और बिलाईगढ़ का नाम कैसे पड़ा राजवंशों के समय इनका नाम क्या था / पूर्व राजवंशों के समय फुलझर राज्य का 18 गढ आज सरायपाली बसना के ये गांव है

महासमुंद बसना हेमन्त वैष्णव 9131614309

छत्तीसगढ़ के फुलझर राज्य तो सभी जानते है की फुलझर राज्य में कभी राजा महाराजाओं का गढ़ रहा है और अभी वर्तमान में ये 18 गांव कौन कौन से गांव है बतादे की फुलझर का भैना राजवंश गोंड़ राजवंश के पहले धमतरी बिलासपुर , पेंड्रा बिलाईगढ़ रायगढ़ सारँगढ़ फुलझर भटगांव आदि राज्यो में शाशन करता था इनका शासन काल फुलझर राज्य में लगातार 18 पीढ़ियों तक रहा

बिलाईगढ़ का नाम कैसे पड़ा

बिलाईगढ़ भी सन 1951 ,52 के पहले एक बड़ी जमीदारी का केंद्र था यह एक विस्मय की बात है की इस ग्राम को बिल्ली का किला बिलाईगढ़ कहा जाता है इसका सम्बंध भैना से जोड़ा जाता है जो एक समय फुलझर के राजा थे कथा में कहा जाता है की भैना ने पहले धमतरी पर कब्जा किया उस स्थान के रक्षिका देवी को बिलाईमाता का नाम दिया जो उनकी कुल देवी थी कहा जाता है की उस काल मे सारँगढ़ राज्य में भैना जाती के राजा राज्य करते थे , सारँगढ़ रियासत लेखक ऋषि राज पांडे के अनुसार सारँगढ़ के समीप भैनार नामक गाँव है जिसे भैना राजाओं ने बसाया होगा गोंड़ राजाओं के उत्कर्ष काल तक इनका शासन सारँगढ़ में था भैना जाती के राजा रतनपुर नरेश पृथ्वी देव के समय तक मांडलिक के रूप में शासन करते थे ।

इस बात की गुंजाइश है कि शिशुपाल पर्वत के नीचे ग्राम पुजारीपाली के शिलालेख में वर्णित गोपाल देव इसी वंस का रहा होगा यह दुर्भाग्य पूर्ण है की इस इस वंश का वंशावली अब तक अप्राप्त है इसका दूसरा प्रमाण यह है की बिलासपुर का पुराना किला भैना जाती का ही देन है इस जाति का बिलाईगढ़ में भी राज करने का प्रमाण है पेंड्रा में भी निवासरत होने का प्रमाण है भैनो के विस्त्रीत क्षेत्रो में से पेंड्रा को कवरो ने पुनः अपने अधीन कर लिया था

बिलासपुर का नाम कैसे पड़ा

आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान बिलासपुर छग भैना जनजाति का मानव शास्त्रीय अध्ययन से पता चलता है की प्राचीन काल मे यह क्षेत्र रतनपुर राज्य के अंतर्गत आता था रतनपुर में रत्न देव द्वितीय के समय वर्तमान बिलासपुर के स्थान पर घना जंगल था जहां केंवट जाती के कुछ परिवार थे किवदंती के अनुसार एक बार महाराज रत्न देव आखेट हेतु इस वन क्षेत्र में आये शिकार का पीछा करते हुए राजा के सैनिक कुछ दूर आगे निकल गए तथा केंवट की बस्ती में पहुंचकर चना बेचने वाली बिलासा बिलसिया नाम की कन्या से सैनिकों ने दुर्व्यवहार किया जिस पर आत्म ग्लानि से भरी बिलासा ने आत्मदाह कर लिया इस घटना की जानकारी होने पर राजा ने दोषी सैनिकों को कठोर दंड दिया तथा प्रायश्चित स्वरूप उस सती के नाम पर उस स्थान पर बिलासा ग्राम बसाया
वही बिलासा ग्राम कालांतर में बिलासपुर के नाम से एक नगर के रूप में स्थापित हुवा ।

वर्तमान में फुलझर राज्य में कभी राजा महाराजाओं का गढ़ रहा है और अभी वर्तमान में ये 18 गांव इस प्रकार है

सिंघोडा

भंवरपुर

 

गढफुलझर

 

बसना – अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में एक ही दिन प्रदेश के प्रख्यात युरोसर्जन,किडनी,मूत्ररोग,एवं चर्म रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे आप परामर्श के लिए सम्पर्क कर सकते हैं…

अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में एक ही दिन प्रदेश के प्रख्यात युरोसर्जन,किडनी,मूत्ररोग,एवं चर्म रोग विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे आप परामर्श के लिए सम्पर्क कर सकते हैं.

डॉक्टर तुषार दानी -युरोसर्जन 

डॉक्टर रवि धर – किडनी एवं मूत्र रोग विशेषज्ञ 

डॉक्टर गरिमा शर्मा झा – चर्म रोग विशेषज्ञ 

निःशुल्क किडनी,पथरी,मूत्र मार्ग एवं प्रोस्टेट का ऑपरेशन शिविर 19 मई 2023 को अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में……

बेटी बचाव बेटी पढ़ाव के प्रदेश सदस्य व अग्रवाल नर्सिंग होम बसना के संचालक डॉक्टर एन के अग्रवाल के मार्गदर्शन में 19 मई 2023 को निःशुल्क ऑपरेशन शिविर का आयोजन रखा गया है जिसमे किडनी, मूत्र रोग,प्रोस्टेट एवं पथरी का निःशुल्क जाँच व ऑपरेशन दूरबीन एवं लेजर पद्धति से रायपुर के प्रशिद्ध युरोसर्जन डॉक्टर योगेश बारापात्रे आयुष्मान कार्ड व राशन कार्ड से निःशुल्क करेंगे |अग्रवाल नर्सिंग होम बसना के संचालक सदस्य एवः जाने माने शिशु रोग विशेषज्ञ डा. अमित अग्रवाल ने बताया कि,
मूत्र रोग एवं पथरी के लक्षण – मूत्राशय के उपर क्षेत्र में दर्द होना,अंडकोष में दर्द होना ,बार -बार पेशाब का आना ,पेशाब करते समय दर्द होना ,पेशाब रुक रुक कर आना , पेशाब करने की इच्छा होने के बावजूद पेशाब न आना पेशाब में झाग या खून दिखाई देना ,प्रोस्टेट का बढ़ जाना इत्यादि समस्त बिमारियों का आयुष्मान कार्ड व राशन कार्ड से निःशुल्क ऑपरेशन किया जायेगा। साथ ही रहने, खाने  की सुविधा निःशुल्क रहेगी |
ऑपरेशन के इच्छुक मरीज दिनांक 18/05/23 को अपनी पुरानी रिपोर्ट के साथ अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में भर्ती हो जाएं।

नोट – अग्रिम पंजीयन अनिवार्य है |
एक्स – रे जांच में 50% की छूट
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खून की जांच पूर्णतः निःशुल्क रहेगा
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यह सुविधा केवल आपरेशन के लिए चिन्हित मरीजों के लिए रहेगा

बसना के ग्राम भालूपतेरा में 3 दिवसीय रामचरित मानस कथा का भव्य आयोजन डॉक्टर एन के अग्रवाल ने श्री राम भजन गाकर किया लोगों को मंत्र मुग्ध।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रदेश सदस्य डॉ एन.के. अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

विधानसभा बसना के ग्राम भालूपतेरा मे तीन दिवसीय राम चरित मानस कथा का भव्य आयोजन किया गया है। जहाँ दूर दूर से राम भक्त एवं मानस प्रेमी इस कार्यक्रम में कथा श्रवण करने पहुंचे ।

इस भव्य आयोजन मे बतौर मुख्यि अतिथि अग्रवाल नर्सिंग होम बसना के संचालक डा.एन.के. अग्रवाल शामिल हुए।

डॉक्टर.एन.के. अग्रवाल के कार्यक्रम में पहुचने पर ग्राम वासियों ने साल श्री फल व गाजे-बाजे के साथ स्वागत सम्मान किया । डा.अग्रवाल ने भगवान राम लक्ष्मण जानकी व हनुमान जी की पूजा अर्चना कर गाँव की सुख समृद्धि के लिए कामना की।

प्रभु राम की भक्ति मय संगीत मे भावुक होकर भजन गायन कर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि, भगवान राम हमारे छत्तीसगढ़ कौशल प्रदेश के भान्चा थे …छत्तीसगढ़ का कौशल प्रदेश माता कौशल्या का मायकाव रामजी का ननिहाल है। इसलिए हम सब अपने भान्चा को राम की संग्या देकर प्रणाम करते है। भगवान श्री राम जन जन के दुलारे और प्रिय हैं । संपूर्ण छत्तीसगढ़ के वासियों की श्रद्धा और आस्था का केन्द्र है । भगवान राम अपने जीवन मे त्याग,बलिदान, सम्मान, समरसता, का जो पाठ पढाया है ,मर्यादा की सीख दी है,,उसको अंगीकार कर हम अपने जीवन को धन्य बनाते हुए ग्राम के वातावरण मे सुगंध घोल सकते है । इस राममय आयोजन में मुरारी अग्रवाल, दिलीप नायक, हेमलाल नायक,मन्नूलाल नायक,संतराम नायक, परदेशी पटेल,राकेश प्रधान उपस्थित थे ।

डॉक्टर एन के अग्रवाल जी का भजन –

बसना – वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे के उपलक्ष्य में निःशुल्क ओ.पी.डी. एवं परामर्श शिविर 17 मई को अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में।

बढ़े हुए ब्लड प्रेशर के कारण शरीर के सभी भाग मे नुकसान हो सकता है जैसे – किडनी फेल,अंधापन,हृदयाघात,स्ट्रोक,ब्रेन हेमरेज,

डॉक्टर अमित अग्रवाल –

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आवश्यकतानुसार खून जांचें व दवाइयां निःशुल्क

बसना – परसकोल हरी संकीर्तन अष्टप्रहरी नामयज्ञ में शामिल हुए डॉक्टर एन के अग्रवाल….

ग्राम परसकोल में अष्टप्रहरी नामयज्ञ कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रदेश सदस्य डॉ एन.के. अग्रवाल शामिल हुए ।

ग्राम वासियों ने डॉक्टर एन के अग्रवाल का हर्ष उल्लास के साथ तिलक,फूलमाला पहनाकर स्वागत किया उन्होंने श्री राधाकृष्ण की पूजा अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर बेटी बचाओ बेटी पढाओ के प्रदेश सदस्य डॉक्टर एन. के. अग्रवाल ने कहा की इस क्षेत्र में सुख शांति हमेशा बनी रहे भगवान सबको हनुमान जी जैसा शक्ति प्रदान करें,इस अवसर पर समस्त ग्रामवासी  उपस्थित थे

बसना – आदर्श नगर बसना श्री हरी संकीर्तन अष्ट प्रहरी नाम यज्ञ में शामिल हुए बेटी बचाओ बेटी पढाओ के प्रदेश सदस्य डॉ एन.के. अग्रवाल ……

नगरवासियों ने डॉक्टर एन के अग्रवाल का हर्ष उल्लास के साथ स्वागत किया उन्होंने श्री राधाकृष्ण की पूजा अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर बेटी बचाओ बेटी पढाओ के प्रदेश सदस्य डॉक्टर एन. के. अग्रवाल ने कहा की इस क्षेत्र में सुख शांति हमेशा बनी रहे भगवान सबको हनुमान जी जैसा शक्ति प्रदान करें,इस अवसर पर समस्त नगरवासी उपस्थित थे|

बसना/धामनघुटकुरी- भगवान के भजन,कीर्तन के लिए दिया हुआ एक -एक मिनट भी कल्याणकारी होता है,डॉक्टर एन के अग्रवाल …

धामनघुटकुरी ग्रामवासियों में शुख शांति कामना को लेकर अष्टप्रहरी हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया प्रथम दिवस पर कलश यात्रा निकालकर सरोवर से पवित्र जल लाकर वैदिक मंत्रोच्चारण कर हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र का जाप शुरू किया गया |

बेटी बचाओ बेटी पढाओ के प्रदेश सदस्य डॉक्टर एन के अग्रवाल ने इस महान अष्टप्रहरी हरिनाम संकीर्तन यज्ञ में शामिल होकर श्री राधाकृष्ण जी की पूजा अर्चना कर समस्त ग्रामवासियों की सुख शांति की कामना की डॉक्टर एन के अग्रवाल जी ने अपने संबोधन में कहा की भगवान के भजन,कीर्तन के लिए एक एक मिनट भी कल्याणकारी होता है भगवान की भक्ति सच्चे मन से करने पर जीवन मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है |इस अवसर पर परदेशी प्रधान,राकेश प्रधान,नरेश,चौधरी सहित समस्त ग्रामवासी उपस्थित थे|

बसना – जाड़ामुड़ा श्री हरी संकीर्तन अष्ट प्रहरी नाम यज्ञ में शामिल हुए बेटी बचाओ बेटी पढाओ के प्रदेश सदस्य डॉ एन.के. अग्रवाल ……

ग्राम जाड़ामुड़ा में अष्टप्रहरी नामयज्ञ कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रदेश सदस्य डॉ एन.के. अग्रवाल शामिल हुए ।

ग्राम वासियों ने डॉक्टर एन के अग्रवाल का हर्ष उल्लास के साथ तिलक,लगाकर स्वागत किया उन्होंने श्री राधाकृष्ण की पूजा अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर बेटी बचाओ बेटी पढाओ के प्रदेश सदस्य डॉक्टर एन. के. अग्रवाल ने कहा की इस क्षेत्र में सुख शांति हमेशा बनी रहे भगवान सबको शक्ति प्रदान करें,इस अवसर पर परदेशी पटेल,राकेश प्रधान,अशोक प्रधान,आनंद प्रधान,पवित्र प्रधान,सुनील प्रधान,निराकार प्रधान,वीरेश प्रधान,वरुण प्रधान,मनोज प्रधान,सहित समस्त क्षेत्रवासी  उपस्थित थे|

CG-/शिशुपाल पर्वत पर जौहर का इतिहास जान खड़े हो जाएंगे आपके रोंगटे, राजा और अंग्रेजो में भयंकर युद्ध राजा के प्राणांत के बाद 7 रानियों ने मर्यादा की रक्षा के लिए घोड़ा धार में कूद गए

महासमुंद -/ राजा और अंग्रेजो में भयंकर युद्ध अंतिम राजा के प्राणांत के बाद 7 रानियों ने मर्यादा की रक्षा के लिए घोड़ा धार में कूद गए पढ़िए शिशुपाल पर्वत पर जौहर का इतिहास जान खड़े हो जाएंगे आपके रोंगटे,

महासमुंद हेमन्त वैष्णव
mahasamund hemant vaishnav , 9131614309

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जीले के सरायपाली विधानसभा अंतर्गत आने वाले ( बूढ़ा डोंगर ) सिसुपाल पर्वत को आज पिकनिक स्पॉट और ट्रैकिंग पॉइंट के बारे में तो सब जानते है लेकिन बहुत ही कम ही लोग है जो उस सिसुपाल की गौरवशैलीइतिहास को जानते है , कुछ दिनों पहले महाजनपद न्यूज़ में

https://www.mahajanpadnews.com/?p=1820

गढफुलझर के श्रापित महल और राजा रानियों को जलमग्न होने की किवदंती का प्रकाशन किया गया था जिसमे आखिर राजमहल और राजारानी कैसे श्रापित हो गए थे क्या है वह कारण अगला भाग में विस्तृत जानकारी के साथ

वर्तमान में सिसुपाल पर्वत एक पिकनिक स्पॉट और ट्रैकिंग पॉइंट बनते जा रहा है लेकिन कभी यहाँ एक गौरवशाली इतिहास घटित हुवा है जो बहुत कम लोग इन घटनाओं के बारे में जानते है अभी यही बात सामने आता है कि राजा रानियों ने अंग्रेजो द्वारा आक्रमण के बाद घेरे जाने के बाद सिसुपाल पर्वत के ऊपर से घोड़ो में सवार होकर घोड़ो के आंख में पट्टी बांधकर सिसुपाल पर्वत से छलांग लगा दिए थे और इसी का नाम घोड़ा धार पड़ा लेकिन ऐसा नही है ,

भैना राजाओं का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है अक्सर सोसल मीडिया प्रिंट और वेबसाइटों में पढ़ने मिल रहा है कि राजा सिसुपाल और रानी को द्वारा अंग्रेजो द्वारा घेर लिए जाने पर पर्वत से घोड़ो के आंख में पट्टी बांधकर कूद गए थे लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही बता दें कि सिसुपाल पर्वत पर अंग्रेजो द्वारा विजय पाना इतना भी आसान नही था ।

सिसुपाल पर्वत की ऊंचाई तल से हजारो फिट ऊपर है जहां तक आज पिकनिक स्पॉट है लेकिन उसके ऊपर और कई किलोमीटर क्षेत्र में सिसुपाल पर्वत फैला जो राजाओं और सैनिकों के लिए एक अभेद किला था और किले में सस्त्र और सैनिक और इस पर्वत में भी गुप्त सुरंगे और रास्ते थे राजा और रानियां भाग भी सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नही किया अंग्रेजी सल्तनत द्वारा आक्रमण के बाद जब अंतिम राजा और सैनिकों द्वारा अंग्रेजो के मध्य भयंकर लड़ाई लड़ा गया था युद्ध मे अंतिम राजा के मारे जाने के बाद ही 7 रानियों ने मर्यादा की रक्षा के लिए 1 हजार फीट की चोटी से घोड़ो पर पट्टी बांधकर छलांग लगा दिए और इसी का नाम घोड़ा धार पड़ा ।

सिसुपाल पर्वत की 7 रानियों द्वारा जौहर किया गया या सतीप्रथा

 

महाजनपद न्यूज़ ने कुछ और जानकारी इक्कट्ठा किया तो छग शासन द्वारा भैना जनजातीय का मानवशास्त्रीय अध्ययन आदिमजाति अनुसंधान क्षेत्रीय इकाई बिलासपुर में उल्लेख किया गया है की

भानुवंश प्रकाश सहिता के अनुसार मितध्वज मिथिला का राजा
के राजा कृतध्वज के माहामंत्री थे मितध्वज के पुत्र खण्डिक माहामंत्री बने जब इसी क्रम में मिथिला के राजा कृति देव हुए
उसने इस परम्परा को बदल दिया जिसके बाद माहामंत्री पद के उत्तराधिकारी देवमणि ने मिथिला राज दरबार का ग्याग कर दिया वे अपनी पत्नी भानु मति के साथ अमर कंटक के पुण्य क्षेत्र सोड़कुण्ड आ गए

भैना जाती फुलझर राज के प्राचीनराजवंश रहा है ,

महादेव के पुत्र जोहान साय के पुत्र मंडल नाग वंश के पुत्र का नाम जगतसाय था जो मानिकपुर में रहते थे यही जगतसाय रतनपुर के राजा जाजल्लदेव के सेनापति थे जिसने जाजल्लदेव
के राज्य की सीमा का विस्तार किया था एवं भैना राज की नींव डाली थी भानुवंश प्रकाश संहिता के अनुसार भैना जाति में बहुत से राजा प्रमुख हुए थे जो शुद्ध वैदिक आचरण करते थे दान पुण्य करते थे कुछने वैदिक आचरण के विपरीत कार्य किया था सोनसाय राजा धार्मिक विचार के थे

भैना जाति का इतिहास पूर्व से ही गौरवपूर्ण रहा है
भैनो के पूर्वजों में भानुमान के कार्य कार्य में कुछ विकृति का उल्लेख मिलता है किंतु उनकी पत्नी चंद्रकुवरी के कारण उनमें सद विचारों का समावेश हुआ भानुमान अपने कृत्यों से पश्चाताप करने लगे उन्हें अपने पुत्रों की दशा देखकर बहुत चिंता हुई उनके पुत्रों में मात्र सोनसाय योग्य निकले शेष तीनों पुत्र मदिरा मास में लिप्त थे कालांतर में भैना जाती भानुमान के नाम से भानुवंशी कहने कहलाने लगे

भैना जाती का प्राचीन इतिहास विशेषकर फुलझर में गौरावपूर्व रहा है यह जाती गोंड़ राज के पूर्व धमतरी बिलासपुर पेंड्रा बिलाईगढ़ रायगढ़ सारँगढ़ फुलझर भटगांव आदि राज्यो में राज किया इनका शासन काल फुलझर राज्य में लगातार 18 पीढ़ियों तक था

 

भैना इतिहास जौहर या सतीप्रथा

किवदंतियों के अनुसार बूढा डोंगर सिसुपाल पर्वत पर फुलझर के अंतिम प्रमुख राजा की सात रानियां थी राजा के युद्ध मे प्राणांत होने पर उनकी रॉनियो ने भयंकर घोड़ा धार झरने से कूदकर सती धर्म का पालन किया था वर्तमान में प्राचीन गढ केना में उक्त ग्राम के मध्य सती दाई नामक एक देवी की सामान्य प्रस्तर खण्ड के रूप में पूजा की जाती है उक्त सती दाई भी पूर्व कालीन किसी सामन्त राजा की रानी रही होगी जिसने अपनी पति के मृत्यु के पश्चात सती धर्म का पालन किया होगा ।

पिरदा गढ में हीराचंद भैना की कथा विस्वाश घात के कारण हत्या

आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के जानकारी के अनुसार पिरदा गढ में हीराचंद भैना राजा सुनने को मिलती है जिनकी रानी परम सुंदरी थी गोंड़ आक्रमण के फलस्वरूप विश्वासघात के कारण उनकी हत्या हो गई किंतु रानी का कोई उल्लेख सुनने को नही मिलता सम्भवत रानी ने भी वंश परम्परा के अनुसार सती धर्म का पालन किया होगा ग्राम भोथल डीह में दहना पाट नामक एक देवी की सामान्य स्थापना है जिनकी पूजा ग्राम वासियों के द्वारा की जाती है इसी प्रकार ग्राम तोरेसिंहा में जगदलेनपाट देवी की प्रमुखता से पूजा की जाती है सम्भवतः ये महान महिलाएं भैना कालीन शाशन में वैभवर्ण गरिमामयि स्थान रखती थी जिससे लोग उन्हें देवी के रूप में मानते आ रहे है पूर्व काल मे राजा रानी को भगवान के रूप में मानने की परंपरा थी लोग उन्हें पाट प्रमुख के रूप में मानते थे पूर्व में बलिदान के रूप में बकरों की बलि दी जाती थी क्योंकि उक्त कालखण्डों में बलिदान को सम्मान के रूप में माना जाता है ।

चुकी उस समय कोई राजा हार जाता था तो रानियों को दुर्व्यवहार एवं कब्जे में लेकर मुगल शासक करते थे अपमान बताया जाता है कि जब राजा खास तौर पर मुगल शासक युद्ध में विजय प्राप्त करने के पश्चात किले में प्रवेश करते थे तो वह महारानी के साथ ही सुंदर सुंदर औरतों पर अपना कब्जा चाहते थे। इसके लिए वह महिलाओं का अपमान भी किया करते थे। लेकिन इसके पूर्व वह सभी स्त्रियां या तो जहर खाकर प्राण दे देती थी या फिर जौहर कर लेती थी।

करते थे क्रूरता

इतिहास में ऐसे भी हमलावर मुगल शासक हुए हैं जिन्होंने विजय के पश्चात जब किले में कब्जा किया तो और रानी को मरा हुआ पानी पर गुस्से से पागल हो जाते थे। कई बार तो यह भी बताया गया है कि उस मृत शरीर के साथ क्रूरता की जाती थी।

कई बार मृत शरीर के शरीर के अंगों को काट डाला जाता था। यह तब होता था जब महिलाएं तथा महारानियां जहर खाकर अपना प्राण देती थी। ऐसे में महिलाओं ने अपने शरीर को समूल पंचतत्व में विलीन कर देने जौहर करने लगी।

लेकिन ये भी मानना जरूरी है कि राजघराने की रानियों का जौहर भारतवर्ष में सैकड़ों साल पहले की सती प्रथा की याद दिलाता है। हालांकि जौहर और सती प्रथा एक-दूसरे से जरा भी मेल नहीं खाते। लोग सती प्रथा को सिर्फ सतही तौर पर जानते हैं लेकिन वो इस प्रथा के पीछे छिपे पूरे तथ्य से अनभिज्ञ हैं। पति की मृत्यु के बाद उसकी चिता के साथ जलना सती प्रथा है और दुश्मनों के चंगुल में फंसे अपने वीर पतियों के स्वाभिमान की रक्षा के लिए आत्मदाह करना जौहर है। दोनों को समझने के लिए इतिहास के कुछ पन्ने पलटने की जरूरत है।

 

आज आम लोग घोड़ा धार तक ही पहुंच पाते है बताया जाता है कि सिसुपाल पर्वत के ऊपर में आज भी राजाओं का किला और सस्त्रागार है साथ ही साथ दंड देने का जगह भी जीर्ण शीर्ण अवस्था मे देखा जा सकता है इसके साथ ही कई गुप्त सुरंगे होने की बात बताया जाता है

शिव मंदिर

यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर हैं। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर के बाहर आज भी मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल मेला लगता है। हज़ारों की संख्या में श्रृद्धालु यहां आते हैं। कहते हैं इस सूर्यमुखी मंदिर में पहले हनुमान सिक्का जड़ा हुआ था। जिसे बहुत शक्तिशाली और प्रभावशाली माना जाता था। लेकिन अब यह सिक्का यहां से गायब है।

रानी तालाब और राजा कचहरी

बताते हैं कि राजा शिशुपाल की दो रानियां थीं। दोनों के अलग-अलग सरोवर यानि तालाब थे जो अब भी हैं। वहीं राजा की कचहरी के भग्नावशेष भी हैं, जहां राजा प्रजा से मिला करते थे।

सुरंग में था शस्त्रागार

यहाँ एक बहुत लंबी सुरंग है। नदी की रेत ने अब इस सुरंग का मार्ग अवरुद्ध कर दिया है लेकिन स्थानीय निवासी बताते हैं कि सुरंग के भीतर अब भी राजा के अस्त्र-शस्त्र पड़े हुए हैं।

विशाल गुफा

यहाँ पर्वत पर एक बहुत गहरी गुफा है। गुफा इतनी विशाल है कि सैकड़ों लोग एक साथ विश्राम करने के लिए भीतर बैठ सकते हैं।

पंचमुखी हनुमान मंदिर

कुछ सौ मीटर की चढ़ाई करने के बाद आपको एक छोटा सा हनुमान मंदिर मिलेगा। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस पंचमुखी हनुमान मंदिर तक पहुंचकर लोग थोड़ा सुस्ता सकें इसके लिए ग्रामीणों ने बड़ी मेहनत की है। वे जब मंदिर के मेले में जाते हैं तो एक थैले में रेत और एकाध ईंट ले आते हैं। और यहां उसको बिछा देते हैं। इससे पर्वत पर चढ़ने वालों के लिए थकने पर थोड़ा बैठने की जगह बन गई है।

जड़ी-बूटियाँ

 

इस पर्वत के इर्द-गिर्द बहुत सी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ देखी जा सकती हैं। शतावर और अश्वगंधा खासकर यहां बहुत अच्छी मात्रा में हैंं। शिशुपाल पर्वत को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किए जाने की तैयारियां शुरू हो ही चुकी हैं हालांकि पहले से भी यहां पर्यटक आते रहे हैं। लेकिन आगे सुविधाएं और बेहतर होंगी। यदि आप भी शिशुपाल पर्वत की ट्रिप प्लान करते हैं तो आप छत्तीसगढ़ के महासमुंद रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं। या फिर विवेकानंद हवाई अड्डे, रायपुर तक आने के बाद कैब से आगे का सफ़र कर सकते हैं।