सरायपाली/ भ्रष्टाचार में अब अपने बेटों को भी शामिल करने लगे पंचायत कर्मचारी! पढ़िए महाजनपद न्यूज की विशेष खबर
महाजनपद न्यूज हेमन्त वैष्णव सरायपाली/महासमुंद। पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में अब परिजनों की भूमिका भी सामने आने लगी है। इसका ताजा मामला महासमुंद जिले के सरायपाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रिमजी से सामने आया है, जहां पंचायत सचिव पर अपने ही पुत्र के नाम पर बिल लगाकर शासकीय राशि आहरित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत जनपद पंचायत सरायपाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से की गई है, जिसके बाद जांच टीम गठित कर दी गई है जनपद सीईओ ने मामले में क्या कहा पढ़े पूरी खबर होगी कार्यवाही
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत रिमजी में पदस्थ सचिव श्रीराम साहू पर आरोप है कि उन्होंने अपने पुत्र अनिल साहू को पंचायत का वेंडर बनाकर नाली सफाई सहित विभिन्न कार्यों के नाम पर बिल लगवाए और शासकीय राशि का आहरण कराया। शिकायतकर्ता आयुष साहू ने इस संबंध में जनपद पंचायत सरायपाली के सीईओ को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सचिव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने पुत्र को आर्थिक लाभ पहुंचाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अनिल साहू ग्राम रिमजी का निवासी भी नहीं है, बल्कि वह रिमजी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम डोंगीझरन का रहने वाला है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि हजारों की आबादी वाले ग्राम रिमजी में नाली सफाई जैसे कार्यों के लिए क्या स्थानीय मजदूर उपलब्ध नहीं थे, जो सचिव को अपने ही पुत्र के नाम पर बिल लगाकर भुगतान करना पड़ा? ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पर्याप्त संख्या में मजदूर उपलब्ध हैं, इसके बावजूद बाहरी व्यक्ति के नाम पर बिल लगाकर राशि आहरित की गई।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि सचिव के पदस्थापना काल से लेकर अब तक अनिल साहू के नाम पर किए गए सभी भुगतानों की विस्तृत जांच कर राशि की वसूली की जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित सचिव के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में जनपद पंचायत सरायपाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश साहू ने बताया कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है और जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी
सीईओ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति अधिकृत वेंडर है और सामग्री आपूर्ति करता है, तो उसके नाम से भुगतान किया जा सकता है, लेकिन नाली सफाई जैसे कार्यों के लिए नियमों के विपरीत भुगतान किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पंचायतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
(महाजनपद न्यूज इस मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर लगातार नजर बनाए हुए है।)



