बसना -: अनाथ आश्रम मे कलेक्टर के निर्देशन मे हुवा जांच सालो से चल रहा आश्रम-छात्रावास, राशि और जमीन ले रहे दान,जांच में आश्रम-छात्रावास से संबंधित क्या कागजात पाया गया, क्या कहते है जाँच अधिकारी?
बसना / महासमुंद
बसना के विद्यानसभा जगदीशपुर-नरसिंगपुर में पिछले 7 साल से एक ऐसा अनाथ आश्रम कहे या छात्रावास चल रहा है जिसका कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। पहले यह अनाथ आश्रम के नाम से था। उसका भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। बाद में जब संचालक जगदीश कन्हेर को पता चला की अनाथ आश्रम चलाने की अनुमति नहीं है तो अनाथ आश्रम का नाम छात्रावास कर दिया । अब संस्था के नाम से लोगों से लगातार सहयोग लिया जा रहा है। जमीन तक दान में ली जा रही है। आए दिन यहां कोई न कोई जन प्रतिनिधि या सामाजिक संगठन के लोग आते हैं, बच्चों और संस्था को भेंट देकर जाते हैं, जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। इसी सप्ताह अनाथ आश्रम संबंधित महाजनपद न्यूज़ मे खबर प्रकाशन के बाद महासमुंद कलेक्टर ने जब इस पर संस्था पर जांच करने के निर्देश दिए जांच हुई तो बाल सरंक्षण अधिकारी के अनुसार यहां न तो आश्रम और न ही छात्रावास से संबंधित कोई कागजात पाए गए। कथित छात्रावास में 22 के करीब छात्र-छात्राएं हैं। लेकिन करीब 3 साल पहले यहां 50 से ज्यादा विद्यार्थी थे, बाकी बच्चे कहां गए इस सवाल का जवाब संस्था संचालक के पास नहीं है। न ही जांच के दौरान उनका कोई रिकॉर्ड मिला।
संस्था के संचालक के बेटे मंजीत कन्हेर का निजी स्कूल है, जहां इस छात्रावास का एक भी बच्चा नहीं पढ़ता। जबकि दावा यह है कि अनाथ बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए उसने और उसकी पत्नी ने अपनी जिंदगी खपा दी। यहां तक की अपनी जमीन तक गिरवी रख दी। लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
हर महीने रकम और दान सामग्री
जगदीशपुर अनाथ आश्रम मे हर महीने लगभग 4 से 5 लोग और महीने में कोई ना कोई संगठन किसी पर्व या अपने जन्म दिन पर अनाथ आश्रम पहुंचकर राशन और अन्य सामान और पैसे देकर अनाथ आश्रम के बच्चों के नाम से सहयोग करते हैं। इस तरह महीने में हजारों मे लगभग राशि दान या सामग्री के रूप में मिल जाती है और लोगो के सहयोग से ही आश्रम चलता है इसे संचालक भी स्वीकार करता है।
ये है हकीकत: जमीनों का नामांतरण हुआ, संचालक के पत्नी विलासनी के नाम नरसिंगपुर में 13 अक्टूबर 2023 में 0.0400 हेक्टेयर जमीन का नामांतरण हुआ। इसके पहले इसके पहले 7 फरवरी 2018 में जगदीशपुर त में जमीन के दो भूखंडों 0.8200 हेक्टेयर और 0.5000 हेक्टेयर का नामांतरण हुआ। 10 साल से अनाथ आश्रम चला रहे लोगों के नाम ये जमीनें कैसे नामांतरित कैसे हो गई, दान में मिली या खरीदी गई, यह जांच का विषय है।
दान में मिली थी एक एकड़ जमीन
तीन साल पहले नरसिंगपुर में लक्ष्मण साहू नामक किसान ने छात्रावास के िलए अपनी एक एकड़ जमीन दान कर दी थी। इसी में छात्रावास बनाकर चलाया जा रहा है। वहीं नरसिंहपुर में ही एक और भवन लोगों ने सहयोग करते हुए दिया है, इसमें छात्राओं को रखा गया है।
छात्रावास में कोई सुरक्षा भी नहीं
छात्रावास में सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहीं है। जबकि नियम के अनुसार सुरक्षा गार्ड होना चाहिए। छात्राओं के लिए कोई महिला सुरक्षा कर्मी भी नहीं है। चौकीदार भी नहीं है। बड़े विद्यार्थी ही चौकीदारी का काम करते हैं।
अधिकारिक पोर्टल में भी संस्था का नाम नहीं जिले के अधिकारिक पोर्टल में 12 ऐसी संस्थाओं का नाम है जो समाज में भलाई का काम करते हैं, लेकिन उनमें इस जगदीशपुर-नरसिंहपुर आश्रम या छात्रावास का नाम नहीं है। इससे भी संस्था के रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल खड़ा हो गया है।
सीधी बात
जगदीश कन्हेर आश्रम-छात्रावास संचालक
जमीनें आश्रम की नहीं हैं, हम लोग खरीदे हैं: संचालक
1. आपके अनाथ आश्रम-छात्रावास का रजिस्ट्रेशन है ?
अनाथ आश्रम चलाने का अनुमति नहीं है पूर्व में महासमुंद जिले में उमेश अग्रवाल कलेक्टर आए थे तो उन्होंने मौखिक रूप से अनाथ आश्रम के जगह छात्रावास के नाम से संचालन करने कहा था तब से छात्रावास के नाम से संचालन किया जा रहा है। रजिस्ट्रेशन नहीं है।
2. तो अनाथ बच्चों के नाम से दान और सहयोग क्यों लिया जा रहा है?
– लोग यहां जन्म दिन मनाने आते हैं और सहयोग करते हैं। विशेष अवसरों पर भी आकर सहयोग करते हैं।
3. तो क्या अब छात्रावास में अनाथ बच्चे नहीं रहते?
– अब यहां कोई भी बच्चा अनाथ नहीं है। छात्रावास में 22 बच्चे हैं। सभी के माता-पिता हैं।
4. अनाथ आश्रम संचालन के बाद आपने काफ़ी जमीनें खरीदीं हैं, दान में भी जमीन मिली है, बेटे का स्कूल है। जबकि आपने पहले कहा था कि आश्रम संचालन के लिए अपनी जमीन तक िगरवी रखनी पड़ी थी?
– जमीनें अनाथ आश्रम की नहीं है। हम लोग खरीदे हैं।
कागजात नहीं मिले, आगे कार्रवाई होगी: बाल संरक्षण अधिकारी इस मामले में जिला बाल संरक्षण अधिकारी क्षेमराज चौधरी ने कहा की कुछ दिन पहले कलेक्टर प्रभात मालिक ने निर्देशन में आश्रम-छात्रावास की जांच हुई थी। संचालक के पास अनाथ आश्रम और छात्रावास से संबंधित कोई भी कागज़ात नहीं मिले। रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर और उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। आगे कलेक्टर के आदेश के अनुसार कार्रवाई होगी।



