महासमुंद/कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने ली छात्रावास-आश्रम अधीक्षकों की बैठक, दिए कड़े निर्देश
महासमुंद/ आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित सभी छात्रावासों और आश्रमों के अधीक्षकों की बैठक जिला पंचायत सभाकक्ष में संपन्न हुई। यह बैठक कलेक्टर श्री विनय लंगेह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने संस्थाओं के सुचारू संचालन और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। बैठक में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास शिल्पा साय और सभी विकासखंडों के खंड प्रभारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कलेक्टर श्री लंगेह ने निर्देशित किया कि सभी अधीक्षक छात्रावास में अनुशासन, स्वच्छता एवं सुरक्षा का ध्यान रखें। निवासरत विद्यार्थियों के लिए नियमित दिनचर्या सुनिश्चित की जाए। कलेक्टर ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर कहा कि छात्रावासों में निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए तथा भोजन की नियमित जांच की जाए।
छात्रावास और आश्रम बेहद संवेदनशील स्थल हैं, इसलिए सभी अधीक्षक बच्चों की देखभाल अपने बच्चों की तरह करें। कलेक्टर ने दोटूक शब्दों में कहा कि बच्चों की देखभाल या व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधीक्षक के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
महासमुंद जिला सूखा प्रभावित क्षेत्र होने के कारण गर्मी के मौसम में भूजल स्तर काफी नीचे चला जाता है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जल संचयन और संरक्षण के लिए विशेष निर्देश दिए। सभी छात्रावासों और आश्रमों में भूजल को रिचार्ज करने के लिए तत्काल अपने स्तर पर सोखता गड्ढों का निर्माण समय पर पूरा किए जाने कहा गया। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों और स्टाफ को पानी के सदुपयोग के प्रति जागरूक किया जाए ताकि जल संकट से बचा जा सके। संस्थाओं के माहौल को जीवंत और हरा-भरा बनाने के लिए कलेक्टर ने किचन गार्डन और वृक्षारोपण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी छात्रावासों और आश्रमों में अनिवार्य रूप से किचन गार्डन विकसित किए जाएं।
नियमित रूप से वृक्षारोपण का कार्य किया जाए। इससे न सिर्फ बच्चों और स्टाफ में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा, बल्कि बच्चों को ताजी और पौष्टिक सब्जियां भी उपलब्ध हो सकेंगी। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश देते हुए सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास) और सभी विकासखंड प्रभारियों को भी सक्रिय रहने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी जिम्मेदार अधिकारी मैदानी स्तर पर जाकर छात्रावासों और आश्रमों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करें ताकि व्यवस्थाएं दुरुस्त बनी रहें।



