महासमुंद, 5 मई। इस साल भीषण गर्मी में कोडार बांध ने 32 गांवों के तालाबों और 4942 एकड़ फ सल को पानी दिया है और नहरों के जरिए निस्तारी का संकट दूर किया है। इससे इलाके के भू जल स्तर में भी सुधार हुई है। शहीद वीर नारायण सिंह कोडार जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद 32 गांवों के लोगों की 2 से 4 किमी किमी दूर नदी तक जाने की दौड़ खत्म हो गई है।
जल संसाधन विभाग अब तक 56.87 एमसीएम मिलियन क्यूबिक मीटर पानी छोड़ चुका है। गांवों के सूखे तालाब भर गए हैं और 4942 एकड़ क्षेत्र में लगी रबी फसलों को पानी मिल गया है। इस जलापूर्ति से न केवल निस्तारी का संकट दूर हुआ है, बल्कि इलाके के भू-जल स्तर में भी बढ़ा सुधार देखने को मिल रहा है।
जानकारी अनुसार इस साल भीषण गर्मी के कारण भोरिंग, जोबा, तेन्दूवाही और अछोली जैसे गांवों के तालाब मार्च में ही सूख गए थे। स्थिति यह थी कि ग्रामीणों को नहाने और कपड़े धोने के लिए तपती धूप में 2 किमी दूर नदी तक जाना पड़ रहा था। विभाग द्वारा राइट बैंक कैनाल और लेफ्ट बैंक कैनाल खोलने के बाद अब इन 32 गांवों के तालाम लबालब हो गए हैं। परियोजना के कमांड क्षेत्र में आने वाले 4942 एकड़ रकबे में सिंचाई की सुविधा मिलने से खेतों की पैदावार सुरक्षित हो गई है।
पानी की निरंतर उपलब्धता को देखते हुए इस साल किसान बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती में जुट गए हैं। पहले पानी की कमी के डर से किसान सब्जी लगाने से कतराते थे। लेकिन अब तालाबों और नहरों में पर्याप्त जल संग्रहण से सब्जी उत्पादक किसानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। नहरों के बहने और तालाबों के भरने का सीधा असर जमीन के भीतर के जल स्तर पर पढ़ा है।
आसपास के कुओं और बोरवेल का वाटर लेवल ऊपर आया है। जिससे पेयजल की समस्या भी हल हुई है। जिले के 32 गांवों में आरबीसी के 17 गांवकौंआझर, पिरदा, मालीडीह, गुढ़रुडीह, परसाडीह, तुमगांव, भोरिंग, खैरझिटी, खट्टी, डूमरडीह, कुकराडीह, तेंदुवाही, गढ़सिवनी, अछोला, गोपालपुर, बेलटुकरी, अछोली और अकोला तथा एलबीसी के 15 गांवों में बंजारी, संोरिद, घोंघीबाहरा, बनसवनी, कौंदकेरा, चोरभट्ठी, नवापारा, परसदा, बेमचा, मुस्की, खरोरा, सल्डीह, बरोण्डाबाजार और परसट्ठी शामिल हैं। एम एल ध्रुव, जल संसाधन विभाग का कहना है कि कोडार बांध के मैदानी कर्मचारी लगातार नहरों की निगरानी कर रहे हैं। कोशिश है कि 56.87 एमसीएम पानी का प्रबंधन इस तरह हो कि यह अंतिम छोर पर स्थित खेतों तक भी बिना रुकावट पहुंचे-एम एल ध्रुव, जल संसाधन विभाग)
अजय खरे, ईई जल संसाधन विभाग का कहना है कि 7 जनवरी से शुरू हुई इस जलापूर्ति का मुख्य उद्देश्य फसलों को बचाना और निस्तारी की समस्या को खत्म करना था। इसके तहत बड़े इलाके को बहुत बड़ी राहत हासिल हुई है।



