Monday, June 15, 2026
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सरायपाली: समाचार प्रकाशित होते ही हरकत में आया विभाग, SDO बोले – “लापरवाह- ठेकेदार शिवम कंस्ट्रक्शन” मेसर्स भरत राठी का कल तक निरस्त होगा एग्रीमेंट” विभाग ने दिया था दोबारा मौका, 75% भुगतान के बाद अब कर रहा वसूली की बात; क्या दोबारा बनेगा टंकी और अधूरा कार्य

सरायपाली: समाचार प्रकाशित होते ही हरकत में आया विभाग, SDO बोले – “ठेकेदार पूरी तरह निष्क्रिय, कल तक निरस्त होगा एग्रीमेंट”
47 लाख की जल जीवन मिशन टंकी में पहली बार पानी भरते ही झरने की तरह बहने लगा पानी
महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जलगढ़ में जल जीवन मिशन योजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव में लगभग 47.65 लाख रुपये की लागत से निर्मित पानी टंकी में पहली बार पानी भरते ही कई स्थानों से भारी रिसाव शुरू हो गया। टंकी से चारों तरफ झरने की तरह पानी बहता देख ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। देखें वीडियो 

मामले को लेकर सरपंच संघ अध्यक्ष एवं ग्राम जलगढ़ के सरपंच लिंगराज साहू ने निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से गांव में पाइपलाइन, पानी टंकी और घर-घर नल कनेक्शन का कार्य शुरू किया गया था, लेकिन आज तक कई घरों में नल कनेक्शन नहीं पहुंच पाया है और ठेकेदार द्वारा कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है।

सरायपाली: पानी भरते ही टंकी से बहने लगा झरने की तरह पानी, सरपंच संघ अध्यक्ष बोले – “मोदी जी की योजना को ठेकेदारों ने किया बदनाम” 47 लाख लागत

ग्रामीणों के अनुसार गांव में पानी की समस्या को देखते हुए लगभग 500 मीटर दूर स्थित बोरवेल से पहली बार पानी लाकर टंकी में भरा गया, लेकिन पानी भरते ही टंकी के चारों तरफ से रिसाव शुरू हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा लग रहा था मानो टंकी नहीं बल्कि कोई झरना बह रहा हो।
कार्य स्थल पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार यह कार्य “जल जीवन मिशन” के अंतर्गत ग्राम जलगढ़ में जल प्रदाय योजना के रेट्रोफिटिंग कार्य के रूप में कराया गया। योजना की कुल लागत लगभग 47.65 लाख रुपये बताई गई है। बोर्ड में ठेकेदार एजेंसी के रूप में “शिवम कंस्ट्रक्शन” मेसर्स भरत राठी का नाम दर्ज है, जबकि एजेंसी जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन महासमुंद को बताया गया है।

समाचार प्रकाशित होने के बाद सामने आया SDO का बयान
समाचार प्रकाशित होने के बाद पीएचई विभाग के एसडीओ खिलेश साहू का बयान सामने आया है। बातचीत के दौरान विभागीय कार्यप्रणाली, ठेकेदार की निष्क्रियता और भुगतान को लेकर कई बड़े सवाल उठे।

सवाल: संबंधित ठेकेदार पर विभाग क्या कार्रवाई कर रहा है?
इस पर पीएचई एसडीओ खिलेश साहू ने कहा कि निर्माण एजेंसी “शिवम कंस्ट्रक्शन” लंबे समय से पूरी तरह निष्क्रिय और लापरवाह है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार की कार्यप्रणाली को देखते हुए पहले ही एग्रीमेंट निरस्त करने का आदेश जारी किया गया था।
हालांकि बाद में ठेकेदार द्वारा आवेदन देकर गुहार लगाते हुए कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया, जिसके बाद विभाग ने उसे दोबारा मौका दिया था।
लेकिन अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि संबंधित ठेकेदार का एग्रीमेंट कल तक निरस्त करा दिया जाएगा।
सवाल: 47 लाख की योजना में अब तक कितना भुगतान हुआ?
इस सवाल पर एसडीओ खिलेश साहू ने बताया कि योजना में लगभग 75 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि “जितना काम हुआ है, उतना ही भुगतान किया गया है।”
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर विभाग ने एक ऐसे ठेकेदार को लगभग 75 प्रतिशत राशि का भुगतान कैसे कर दिया, जिस पर अब खुद विभाग लापरवाही और निष्क्रियता के आरोप लगा रहा है। जब निर्माण कार्य में पहली ही टेस्टिंग में भारी रिसाव सामने आ गया, सीढ़ियां टूटने लगीं और कई जगह पाइपलाइन अधूरी है, तो क्या विभागीय इंजीनियर और अधिकारी नियमित निरीक्षण के लिए मौके पर नहीं गए थे?

ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि इंजीनियरिंग निगरानी होने के बावजूद यदि गुणवत्ता की कमी नहीं पकड़ी गई, तो आखिर निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
सवाल: यदि निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और गुणवत्ता की कमी सामने आ रही है तो अधूरा कार्य कौन पूरा कराएगा?
इस पर एसडीओ ने कहा कि ठेकेदारी निरस्त होने के बाद नियमानुसार वसूली की प्रक्रिया की जाएगी और आगे की कार्रवाई विभागीय स्तर पर तय होगी।

 

गौरतलब है कि ग्राम जलगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत पानी टंकी, पाइपलाइन और घर-घर नल कनेक्शन का कार्य कराया गया था। लेकिन कई मोहल्लों में अब तक पाइपलाइन अधूरी है और कई घरों में नल-जल टोटी तक नहीं लग पाई है। वहीं पहली बार पानी भरते ही टंकी से चारों तरफ रिसाव शुरू हो गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जिस टंकी में पहली ही टेस्टिंग में भारी रिसाव सामने आ गया, क्या वह भविष्य में टिक पाएगी या फिर उसे दोबारा बनाना पड़ेगा? साथ ही जिन मोहल्लों में पाइपलाइन और नल कनेक्शन अधूरे हैं, वहां कार्य पूरा कराने में कितना अतिरिक्त खर्च आएगा, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है।

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पूरा निर्माण कार्य विभागीय इंजीनियरों और उच्च अधिकारियों की निगरानी में हुआ। इसके बावजूद लाखों रुपये की योजना में गुणवत्ता विहीन निर्माण और लगभग 75 प्रतिशत भुगतान होने की बात सामने आने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। अब ग्रामीण पूरे मामले की तकनीकी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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