रायपुर : छत्तीसगढ़ की शिक्षा में एक साहसिक छलांग

रायपुर : छत्तीसगढ़ की शिक्षा में एक साहसिक छलांग

कोई भी स्कूल अब शिक्षक विहीन  एकल शिक्षकीय स्कूलों में 80 फीसद की गिरावट

10,372 स्कूलों का एकीकरण, शिक्षकों का व्यापक युक्तियुक्तकरण छात्रों को मिलेगी बेहतर शैक्षणिक सुविधा

राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और सार्थक पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में यह दूरगामी सुधार, वास्तव में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और लंबे समय से चली आ रही शैक्षिक विसंगतियों के समाधान का कारगर प्रयास है।

युक्तियुक्तकरण से पहले, छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण अंचल की शालाओं में शिक्षकों की कमी, नगरीय इलाकों और उसके समीप की शालाओं में जरूरत से ज्यादा शिक्षकों की पदस्थपना के कारण शिक्षा प्रभावित हो रही थी और इसका असर बच्चों के परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा था।

राज्य के लगभग 212 प्राथमिक शालाएं और 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं पूरी तरह से शिक्षक विहीन थीं, जबकि 6,872 प्राथमिक शालाएं और 255 पूर्व माध्यमिक शालाएं केवल एक शिक्षक के साथ संचालित हो रही थीं। इसके अतिरिक्त 211 शालाएं ऐसी थीं जहाँ छात्र संख्या शून्य थी, लेकिन शिक्षक पदस्थ थे। इसके अलावा, 166 शालाओं को समायोजित किया गया, इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की 133 शालाएं शामिल थीं, जिनकी दर्ज संख्या 10 से कम थी और दूरी 1 किमी से कम थी, तथा शहरी क्षेत्रों की 33 शालाएं थीं, जिनकी दर्ज संख्या 30 से कम थी और दूरी 500 मीटर से कम थी।

इन चुनौतियों के बावजूद, छत्तीसगढ़ का छात्र-अध्यापक अनुपात (पीटीआर) राष्ट्रीय औसत से उल्लेखनीय रूप से बेहतर था, प्राथमिक शालाओं के लिए पीटीआर-20 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 29 है और पूर्व माध्यमिक शालाओं के लिए पीटीआर-18 था, जबकि राष्ट्रीय औसत 38 है। हालांकि, वितरण असमान था। राज्य में लगभग 17,000 प्राथमिक शालाएं और लगभग 4,479 पूर्व माध्यमिक शालाएं थीं, जिनका पीटीआर-20 से कम था। अकेले शहरी क्षेत्रों में 527 ऐसे विद्यालय थे, जिनका पीटीआर-10 से कम था, जिनमें 15 या उससे अधिक शिक्षकों वाली 08 प्राथमिक शालाएं, 10-15 शिक्षकों वाली 61 शालाएं और 6-9 शिक्षकों वाली 749 प्राथमिक शालाएं थीं, ये आंकड़े बेहतर संसाधन आवंटन की जरूरत को दर्शाते हैं।

इस पहल का मुख्य बिंदु एक ही परिसर में संचालित लगभग 10 हजार 372 शालाओं का एकीकरण था, जिनमें प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल थे। इस विलय से कई लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें शाला त्यागी छात्रों की संख्या में कमी और छात्रों को बार-बार स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता का समाप्त होना शामिल है। यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, छोटी कक्षाओं के छात्रों को बड़ी कक्षाओं के छात्रों का सहयोग प्राप्त होने, और कंप्यूटर, विज्ञान प्रयोगशाला, खेल-कूद तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से शैक्षणिक समझ और अभिरुचि में वृद्धि के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास में भी सहायक होगा। इस दृष्टिकोण से प्रशासनिक व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।

विद्यालयों के समायोजन के साथ-साथ, जिला, संभाग और राज्य स्तर पर काउंसलिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण शिक्षक युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया भी की गई। इस प्रक्रिया के तहत जिला स्तर पर लगभग 13 हजार 793 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया। संभाग स्तर पर 863 का और राज्य स्तर पर 105 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया।

युक्तियुक्तकरण अभियान के प्रारंभिक परिणाम अत्यधिक आशाजनक हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिक्षा विभाग का कहना है कि कोई भी विद्यालय बंद नहीं किया जा रहा है और कोई भी शिक्षक पद समाप्त नहीं हो रहा है। इसके बजाय ध्यान बेहतर अधोसंरचना वाले विद्यालयों का संचालन सुनिश्चित करने पर है।

युक्तियुक्तकरण के पश्चात राज्य में शिक्षक विहीन विद्यालयों की संख्या शून्य हो गई है। एकल शिक्षकीय शालाओं की संख्या में प्रभावशाली 80 प्रतिशत की कमी आई है अब लगभग 1,200 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। एक ही परिसर में स्थित 10,372 विद्यलायों का एकीकरण और 166 ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों का समायोजन पूरा हो चुका है। इससे लगभग 89 प्रतिशत विद्यार्थियों को बार-बार प्रवेश प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। छात्रों को अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध होंगे और विद्यालय की समय सारिणी एवं अन्य गतिविधियों में अधिक एकरूपता रहेगी। इस पहल का उद्देश्य उपचारात्मक शिक्षण द्वारा छात्रों की समझ को बेहतर बनाना भी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करके, छत्तीसगढ़ न केवल वर्तमान कमियों को दूर कर रहा है, बल्कि एक ऐसे भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रख रहा है। जहाँ प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे समग्र विकास और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। युक्तियुक्तकरण का यह कदम एक अधिक कुशल, न्यायसंगत और प्रभावी शैक्षिक वातावरण बनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

 

रायपुर : मोर गांव मोर पानी महाअभियान ‘जल संरक्षण को नई दिशा’ इंजेक्शन वेल तकनीक से भूजल स्तर बढ़ाने की पहल

रायपुर : मोर गांव मोर पानी महाअभियान ‘जल संरक्षण को नई दिशा’ इंजेक्शन वेल तकनीक से भूजल स्तर बढ़ाने की पहल

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार राज्य के सभी जिलों में जल संरक्षण एवं संचयन के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं इसी तारतम्य में बिलासपुर जिले में जल संरक्षण एव जल संचय के वृहद प्रयास किये जा रहे है। जिला प्रशासन द्वारा मोर गांव मोर पानी महाअभियान के तहत इस दिशा में कार्ययोजना बनाकर व्यापक कार्य किये जा रहे है। सुशाासन तिहार में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आगमन कोटा ब्लॉक के ग्राम आमागोहन में हुआ था। ग्राम आमागोहन से ही भूजल स्तर बढ़ाने का प्रयास कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में शुरू किया गया।

मोर गांव मोर पानी महाअभियान के तहत जिले में भूजल रिचार्ज की आधुनिक तकनीक इंजेक्शन वेल को तेजी से अपनाया जा रहा है। यह तकनीक गांव को जल संकट से निजात दिलाने और भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

क्या है इंजेक्शन वेल तकनीक -इंजेक्शन वेल एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें वर्षा जल को सीधे जमीन के भीतर स्थित जल स्तर तक पहुंचाया जाता है। यह प्रक्रिया पानी के भंडारण से अधिक प्रभावी होती है। क्योंकि यह भूजल को सीधे रिचार्ज करती है। जिससे हैंडपंप, कुएं और तालाब पुनः जलयुक्त हो जाते है। ग्राम अमागोहन, सोनपुरी में इंजेक्शन वेल तकनीक का उपयोग कर वर्तमान में सूखे तालाबों, पार्काेलेशन टैंक, डबरियों में इंजेक्शन वेल का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य से सतही जल एवं वर्षा जल को तालाब में जमा कर उसे फिल्टर करते हुए साफ पानी से भूजल स्तर को रिचार्ज किया जा रहा है।

जनभागीदारी से मिल रही सफलता -जिला प्रशासन द्वारा मोर गांव मोर पानी अभियान को जन आंदोलन के रूप में अपनाया जा रहा है। जिले में इसके लिए जनजागरुकता का कार्य मनरेगा और एनआरएलएम के दल द्वारा किया जा रहा है। जिससे भू जल के कम से कम उपयोग और भूजल स्तर को बढ़ाने के प्रयास में जनभागीदारी पर जोर दिया जा रहा है फलस्वरूप अब तक विगत 1 माह में ही 54 बोरी बंधान के कार्य नालों में कर लिए गए है। तेज बहाव को कम करते हुए आसपास के भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के दिनों में अधिक जल की आवश्यकता वाली फसलों जैसे धान की बुवाई के स्थान पर कम भूजल उपयोग वाले फसलों के विषय में जानकारी दी रही है।

जल संरक्षण हेतु जिले में निष्क्रिय बोरवेल को फिर से चालू करने के लिए 159 स्थानों का चिन्हांकन कर सैंड फिल्टर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस अभियान को मोर गांव मोर पानी महाअभियान से जोड़कर क्रियान्वित किया जा रहा है इसके लिए जून माह के पहले सप्ताह में भी अलग अलग क्लस्टर में लगभग 6000 प्रतिभागियों की एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया जिसमें गांव के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और स्व सहायता समूह की दीदियों ने भाग लिया। प्रशासन के इस अनूठे प्रयास से पानीं बचाने लिए लोगों में जागरूकता आ रही है जिससे भविष्य सुरक्षित हो रहा है

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महासमुंद -/ छात्रावास अधीक्षकों की काउंसलिंग जिला स्तर पर सफलतापूर्वक संपन्न

महासमुंद -/ छात्रावास अधीक्षकों की काउंसलिंग जिला स्तर पर सफलतापूर्वक संपन्न

महासमुंद, 14 जून 2025/ कलेक्टर श्री विनय लंगेह के मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में महासमुंद जिले में आदिम जाति विकास विभाग अंतर्गत छात्रावास अधीक्षक श्रेणी ‘द’ से श्रेणी ‘स’ में पदोन्नत हुए अधीक्षकों की काउंसलिंग 14 जून ,शनिवार को सफलतापूर्वक संपन्न की गई। यह काउंसलिंग राज्य शासन के निर्देशों के तहत जिला स्तरीय समिति द्वारा पारदर्शी एवं नियमानुसार संपादित की गई।

काउंसलिंग कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ श्री एस. आलोक एवं सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्रीमती शिल्पा साय,महिला बाल विकास विभाग,समिति सदस्य के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर सभी श्रेणी द से श्रेणी स में पदोन्नत हुए छात्रावास अधीक्षकगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

जिले में कुल 46 पदों में से 34 पदों की काउंसलिंग सफलता पूर्वक की गई, जबकि अतिशेष 12 अधीक्षकों की सूची संभाग स्तरीय समिति को अग्रेषित की जाएगी।काउंसलिंग प्रक्रिया में शासन द्वारा निर्धारित सभी मापदंडों का पालन किया गया, जिसमें अधीक्षक पति-पत्नी की पदस्थापना, चिकित्सा कारणों से स्थानांतरण की आवश्यकता, दिव्यांग, विधवा, परित्यक्ता एवं एकल महिलाओं को प्राथमिकता दी गई। जिला स्तरीय समिति ने यह भी सुनिश्चित किया कि न्यायालयीन प्रकरणों, शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पदों के संतुलन तथा अनुसूचित एवं गैर-अनुसूचित क्षेत्रों के बीच समुचित समायोजन को ध्यान में रखकर प्रस्ताव तैयार किया जाए।

जिन अधीक्षकों ने स्वेच्छा से अन्य जिलों में पदस्थापना हेतु आवेदन दिया है, उनसे तीन वैकल्पिक जिलों का चयन प्राप्त कर प्रस्ताव संभाग स्तरीय समिति को भेजा गया है। वहीं, जो अधीक्षक संभाग के बाहर पदस्थापना के इच्छुक हैं, उनके प्रस्ताव राज्य स्तरीय समिति को प्रेषित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने इस अवसर पर कहा कि शासन की मंशा अनुरूप पारदर्शिता, प्राथमिकता और पात्रता के आधार पर पदस्थापना सुनिश्चित की जा रही है, जिससे विभागीय कार्यों में सुगमता एवं सेवा गुणवत्ता में वृद्धि होगी।

 

सरायपाली / ग्राम दुर्गापाली तालाब के पास एक व्यक्ति अवैध रूप से देशी महुआ शराब बेचते पकड़े जाने पर एफआईआर दर्ज.                   

सरायपाली / ग्राम दुर्गापाली तालाब के पास एक व्यक्ति अवैध रूप से देशी महुआ शराब बेचते पकड़े जाने पर एफआईआर दर्ज.                                                                                                             थाना सरायपाली में प्रधान आरक्षक के  अनुसार  दिनांक 14.06.2025 को 13X21 बजे तक टाऊन पेट्रोलिंग डियुटी पर हमराह स्टाफ आरक्षक 53, 867 के शासकीय वाहन क्रमांक CG 03 0179 के टाऊन पेट्रोलिंग पर रवाना हुआ था पतेरापाली नगर पालिका गार्डन के पास पहुंचा था कि जरिये मुखबीर सूचना मिला कि ग्राम दुर्गापाली तालाब के पास एक व्यक्ति अवैध रूप से देशी हाथ भट्टी महुआ शराब रख कर बिक्री वास्ते ग्राहकों का तलाश करते खड़ा है कि सूचना पर मुखबीर सूचना पंचनामा तैयार कर गवाह रामेश्वर सिन्हा व शेख इकबाल को धारा 179 BNSS का नोटिस देकर साथ

लेकर मुखबीर सूचना से अवगत कराकर मुखबिर द्वारा बताये गये स्थान ग्राम दुर्गापाली तालाब के पास जाकर हमराह स्टाफ एवं गवाहन के घेराबंदी कर एक व्यक्ति जो अपने हाथ में एक पीला रंग का कैरी बैग को लेकर खड़ा था को पकड़े । जिसका नाम पता पूछने पर अपना नाम डिगलाल पटेल पिता छबिलाल पटेल उम्र 39 साल साकिन दुर्गापाली थाना सरायपाली जिला महासमुंद छ.ग. का निवासी होना बताया कैरी बैग में क्या है पूछने पर देशी हाथ भट्ठी महुआ शराब होना एवं बिक्री हेतु ग्राहक का इंतजार करना बताया । जिसे गवाहों के समक्ष बरामद कर बरामदगी पंचनामा तैयार किया

। बाद संदेही को उक्त शराब रखने एवं बिक्री करने के संबंध में धारा 94 BNSS का नोटिस दिया जो नोटिस में ही किसी प्रकार का वैध दस्तावेज नही होना लिखित में दिया । कि संदेही के कब्जे से गवाहों के समक्ष एक पीला रंग के कैरी बैग में प्लास्टिक पालिथीन में भरा करीबन 03 लीटर देशी हाथ भट्ठी महुआ शराब कीमती 600/ रूपये को गवाहों के समक्ष मुताबिक जप्ती पत्रक के जप्त कर कब्जा पुलिस लिया गया । आरोपी डिगलाल पटेल का कृत्य अपराध धारा 34 (1) आबकारी एक्ट का घटित करना पाये जाने से विधिवत दिनांक 14/06/2025 के 18:05 बजे गिरफ्तार किया गया तथा मामला जमानतीय होने से आरोपी द्वारा सक्षम जमानतदार पेश करने पर आरोपी डिगलाल पटेल को जमानत मुचलका पर रिहा किया गया । बाद मय जप्त माल हमराह स्टाफ एवं गवाहन के वापस स्टेशन आया । आरोपी के विरूद्ध धारा 34(1) आबकारी एक्ट का अपराध कायम कर विवेचना

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महासमुन्द : वर्षा ऋतु में मछलियों के संरक्षण हेतु 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट रहेगा प्रतिबंधित उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान

महासमुन्द : वर्षा ऋतु में मछलियों के संरक्षण हेतु 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट रहेगा प्रतिबंधित उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान

राज्य शासन द्वारा मछलियों की वंश वृद्धि एवं प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025-26 में भी विगत वर्षों की भांति मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। यह प्रतिबंध आगामी 16 जून 2025 से 15 अगस्त 2025 तक लागू रहेगा।

इस अवधि में जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों (जो नदी-नालों से जुड़े हुए हैं) में मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) की गतिविधियाँ पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगी। केवल ऐसे छोटे तालाब अथवा जल स्त्रोत, जिनका संबंध किसी भी नदी या नाले से नहीं है, एवं जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के नियम-3 (5) के अंतर्गत उस पर एक वर्ष तक का कारावास, 10,000 रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों एक साथ दंड के रूप में दिए जा सकते हैं।

मत्स्य विभाग द्वारा सभी मत्स्य पालकों, ठेकेदारों एवं मछुआ समुदाय को निर्देशित किया गया है कि वे उक्त अवधि में मछली पकड़ने से परहेज करें, जिससे प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या में वृद्धि हो सके एवं जल स्रोतों में जैव विविधता बनी रहे।

रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर – मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर – मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय दैनिक नवप्रदेश के 14वें स्थापना दिवस समारोह में हुए शामिल राष्ट्रीय परिदृश्य में उभरता छत्तीसगढ़’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज दैनिक नवप्रदेश के 14वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘राष्ट्रीय परिदृश्य में उभरता छत्तीसगढ़’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2014 में भारत जहाँ आर्थिक दृष्टि से विश्व में 10वें स्थान पर था, वहीं आज चौथे स्थान पर पहुँच चुका है, और शीघ्र ही हम तीसरे स्थान पर पहुँचने की ओर अग्रसर हैं। प्रधानमंत्री के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विकसित छत्तीसगढ़ हेतु विजन डॉक्यूमेंट और नई औद्योगिक नीति तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने दैनिक नवप्रदेश की 14वीं वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि हम छत्तीसगढ़ की रजत जयंती मना रहे हैं। मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मैंने संसद में एक सांसद के रूप में छत्तीसगढ़ निर्माण संबंधी विधेयक पर हुई ऐतिहासिक चर्चा को प्रत्यक्ष रूप से देखा और अनुभव किया। एक आदिवासी परिवार से आने के नाते मैंने प्रदेश में भुखमरी की समस्याएँ देखी हैं। डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में 2003 में लागू की गई पीडीएस व्यवस्था ने छत्तीसगढ़ को इस गंभीर समस्या से मुक्ति दिलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। आईआईटी, आईआईएम तथा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ में स्थापित हो चुके हैं। प्रदेश में समृद्धि बढ़ी है और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं आमजन तक पहुँची हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति को उद्यमियों का सकारात्मक प्रतिसाद मिला है। राज्य को लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सेमीकंडक्टर चिप्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ हो चुका है। एनर्जी सेक्टर में भी राज्य को भारी निवेश प्रस्ताव मिले हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर युवाओं को सरकारी नौकरियाँ प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्किलिंग के माध्यम से निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने पर भी बल दिया जा रहा है। नई औद्योगिक नीति में बिस्पोक पॉलिसी का प्रावधान रोजगार सृजन में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सिंचाई रकबा में निरंतर वृद्धि हुई है। हाल ही में दिल्ली प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से बोधघाट परियोजना पर चर्चा की गई। इस परियोजना से बस्तर अंचल के किसानों को भरपूर सिंचाई जल मिलेगा। साथ ही इंद्रावती और महानदी की इंटरलिंकिंग परियोजना पर भी कार्य प्रारंभ किया गया है, जिससे सिंचाई रकबा बढ़कर 7 लाख हेक्टेयर तक पहुँच जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास की मुख्यधारा में है। जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ सुनाई देती थी, वहाँ अब स्कूलों की घंटियाँ गूंज रही हैं। धूड़मारास को संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यटन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बीते 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकास केवल क्षेत्रफल या जनसंख्या से नहीं, बल्कि संसाधनों के सदुपयोग और इच्छाशक्ति से होता है। आज राज्य की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हुई है। प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में उद्घाटित चिनाब पुल में छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र का लोहा प्रयोग किया गया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आज स्टील, सीमेंट, ऊर्जा जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बन चुका है। प्रदेश के पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों को सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने वालों में पद्मश्री श्रीमती शमशाद बेगम, कार्टून वॉच के सम्पादक श्री त्रयंबक शर्मा, खेल पत्रकार श्री नितेश छाबड़ा, वरिष्ठ पत्रकार श्री जीवन एस साहू (गरियाबंद) एवं श्री यशवंत राजवाड़े (नवप्रदेश ब्यूरो चीफ, कोरिया) शामिल हैं।

उन्होंने नवप्रदेश छात्रवृत्ति योजना 2025-26 के अंतर्गत हॉकर परिवार के बच्चों को छात्रवृत्ति भी प्रदान की। वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री श्री आलोक मेहता ने वीडियो संदेश के माध्यम से नवप्रदेश को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित कीं। नवप्रदेश के सम्पादक श्री यशवंत धोटे ने कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, हरिभूमि के प्रधान सम्पादक श्री हिमांशु द्विवेदी, रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

 

रायपुर : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने सोलर बैटरी वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

रायपुर : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने सोलर बैटरी वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

अचानकमार के 13 गांव होंगे रोशन उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज लोरमी स्थित अपने विधायक कार्यालय से सोलर बैटरी से भरे वाहन को हरी झंडी दिखाकर अचानकमार के लिए रवाना किया।     इन बैटरियों से अचानकमार के 13 गांव रोशन होंगे। वहां सौर ऊर्ज बिजली उपलब्ध कराने ये बैटरियां भेजी जा रही हैं। अचानकमार वनांचल के बिजराकछार क्षेत्र के 13 गांवों में रात में प्रकाश की व्यवस्था के लिए 522 बैटरियां लगाई जाएंगी।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैटरी ले जा रहे वाहन को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि अब अचानकमार वनांचल में बरसात के दिनों में अंधियारा नहीं होगा। रात में रोशनी की व्यवस्था हो जाने से वहां के रहवासी जंगली जीव-जंतुओं के खतरे से सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के विकास के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है। दूरस्थ गांवों में भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण काम है।