Saturday, March 21, 2026
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सरायपाली: केना धान खरीदी केंद्र में 50 लाख कमी का खुलासा, बाद में जांच रिपोर्ट बदली, अब अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह में

सरायपाली: केना धान खरीदी केंद्र में 50 लाख कमी का खुलासा, बाद में जांच रिपोर्ट बदली, अब अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह में

महासमुंद जिले के
सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत केना धान खरीदी केंद्र में लगभग 50 लाख रुपये के कथित शॉर्टेज (कमी) और गबन का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। प्रारंभिक जांच में भारी अनियमितता सामने आने के बाद खरीदी प्रभारी गोपाल नायक के खिलाफ सरायपाली थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होने के बाद गोपाल नायक के फरार होने की बात भी सामने आई थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

जानकारी के अनुसार, जांच अधिकारियों ने शुरुआती जांच में केना धान खरीदी केंद्र में लगभग 50 लाख रुपये के धान शॉर्टेज की पुष्टि करते हुए गबन की आशंका जताई थी। इसी आधार पर पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। क्षेत्र में पहले भी सरायपाली और बसना में धान खरीदी केंद्रों में गड़बड़ी के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। ऐसे में इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

मामले में अब नया मोड़ तब आया है, जब संबंधित अधिकारी और कर्मचारी यह कहने लगे हैं कि जांच और गिनती में त्रुटि हो गई थी और पूर्व में प्रस्तुत रिपोर्ट गलत थी। यदि यह दावा सही है, तो सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी राशि के शॉर्टेज की गलत रिपोर्ट आखिर कैसे तैयार हो गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सरायपाली थाना प्रभारी लेतेश सिंह ने बताया कि प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अभी तक गिरफ्तारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, केना धान खरीदी केंद्र क अध्यक्ष  ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों से गिनती में गलती हुई थी तथा किसी भी प्रकार का धान का शॉर्टेज नहीं है। उनके अनुसार पूरा मामला गलतफहमी का परिणाम है।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले जहां 50 लाख रुपये के गबन की बात सामने आई थी, वहीं अब उसे जांच की त्रुटि बताकर खारिज किया जा रहा है। ऐसे में यह मामला अब केवल शॉर्टेज तक सीमित न रहकर जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
अब देखना होगा कि इस मामले में उच्च स्तर पर जांच होती है या नहीं, और यदि जांच में लापरवाही या गलत रिपोर्टिंग की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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