बसना/चारों दिशाओं से निकली रथयात्राओं का गढ़फुलझर में स्वागत रणेश्वर मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
बसना गढ़फुलझर में नवनिर्मित रणेश्वर मंदिर की बहुप्रतीक्षित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और सामाजिक एकता का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया है। 23 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक चलने वाले इस महोत्सव के शुभारंभ से पूर्व चारों दिशाओं से निकली चार भव्य रथ यात्राओं ने जनमानस को भाव-विभोर कर दिया। बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज के अध्यक्ष गिरधारी साहू के मार्गदर्शन में आयोजित इन रथ यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। गांव-गांव से उमड़ी आस्था की यह धारा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बन गई। मीडिया प्रभारी, प्रवक्ता कमलेश साहू ने बताया कि पूर्व दिशा से निकली पूजा रथ यात्रा सरायपाली के नई मंडी प्रांगण से आंचलिक अध्यक्ष प्रदीप साहू के नेतृत्व में प्रारंभ हुई। यह रथ यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों—जय स्तंभ चौक, बस स्टैंड, घटेश्वरी मंदिर होते हुए तोरेसिंहा, गोहेरापाली और तोषगांव से गुजरती हुई गढ़फुलझर पहुंची। पश्चिम दिशा से निकली ध्वजा रथ यात्रा ने विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया।
पिथौरा के थानेश्वर मंदिर से प्रारंभ हुई यात्रा का नेतृत्व पिथौरा आंचलिक अध्यक्ष षड़ानन भोई और रायपुर आंचलिक अध्यक्ष राधेश्याम प्रधान ने किया। बल्दीडीह, सांकरा, साल्हेतराई और बसना होते हुए गढ़फुलझर पहुंची इस यात्रा में उज्जैन से लाया गया पवित्र ध्वज तथा कपासीरा से लाया गया शिखर कलश शामिल रहा। 12 ज्योतिर्लिंगों की आकर्षक झांकी से सुसज्जित रथ ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। उत्तर दिशा से तीसरी रथ यात्रा बसना क्षेत्र के ग्राम बम्हनी से आंचलिक अध्यक्ष भोजराज प्रधान के नेतृत्व में निकली, जिसमें रणेश्वर भगवान की मूर्ति श्रद्धापूर्वक लाई गई। यह यात्रा पथरला, झगरेनडीह, जीराडबरी होते हुए गढ़फुलझर पहुंची। यहां विशेष बात यह रही कि भगवान की यह दिव्य मूर्ति नर्मदेश्वर, जबलपुर से लाई गई है, जिससे आयोजन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। दक्षिण दिशा से निकली कलश रथ यात्रा ने इस आयोजन को पवित्रता की नई ऊंचाई प्रदान की। कुल कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण भोई के नेतृत्व में यह यात्रा पवित्र तीर्थ स्थल नरसिंहनाथ, गंधमार्दन पर्वत से निकली, जहां से झरने का निर्मल जल कलश में भरकर लाया गया। बैदपाली, झारबंद और लउड़ीदरहा से होते हुए यह यात्रा गढ़फुलझर पहुंची। चारों दिशाओं से पहुंची रथ यात्राओं का प्राण प्रतिष्ठा स्थल पर भव्य स्वागत किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार से होगा अनुष्ठान
पूरे वातावरण में भक्ति संगीत, जयघोष और उत्सव का संगम देखने को मिला। कल 23 मार्च से प्रारंभ होने वाले प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव विधिवत पूजा-अर्चना एवं कलश स्थापना के साथ आरंभ हुआ। जो 27 मार्च तक चलेगा जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान एवं विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक एकता, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।



