Saturday, July 4, 2026
महासमुंदबसना/ कोई सीसी रोड तोड़ कर अवैध निर्माण तो कोई 'मोर बसना'...

बसना/ कोई सीसी रोड तोड़ कर अवैध निर्माण तो कोई ‘मोर बसना’ स्वागत गेट विस्फोटक से उड़ा देता है , फिर भी FIR क्यों नहीं शासकीय संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कौन मेहरबान?

शासकीय गली पर अवैध कब्जे का आरोप: अलग खसरे के दस्तावेज देकर दूसरी जगह ली भवन निर्माण अनुमति! अब कलेक्टर से FIR दर्ज कराने की मांग

बसना। नगर पंचायत बसना के पदमपुर रोड स्थित शिवाय पेट्रोल पंप के पास शासकीय गली, नाली और सीसी रोड पर कथित अतिक्रमण कर भवन निर्माण किए जाने का मामला अब और गंभीर हो गया है। आरोप बसना के ललित अग्रवाल पर है जहां शिकायत कर्ताओं ने पहले बसना मुख्य नगर पंचायत अधिकारी से शिकायत कर निर्माण कार्य पर रोक लगाने और जांच की मांग की थी। अब उन्होंने जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि भवन निर्माण की अनुमति लेने के लिए नगर पंचायत में एक स्थान के खसरा नंबर के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जबकि निर्माण कार्य दूसरे स्थान पर किया जा रहा है, जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है।

अलग खसरे के दस्तावेज लगाने का आरोप

शिकायत के अनुसार, भवन निर्माण अनुज्ञा प्राप्त करने के दौरान खसरा नंबर 326/6/38, जो सिटी ग्राउंड के पास स्थित भूमि का बताया गया है, उससे संबंधित बी-1, नक्शा एवं ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किए गए। जबकि वर्तमान में निर्माण कार्य खसरा नंबर 326/1क पर किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है।

शासकीय गली और नाली पर निर्माण का आरोप

शिकायतकर्ता ने बताया कि संबंधित शासकीय गली महेंद्र साव के घर से होकर पुरानी बस्ती को जोड़ती है। गली के दोनों ओर अनिल अग्रवाल और संजय गुप्ता के मकान स्थित हैं। इसी गली के बीच से पूरी बस्ती के गंदे पानी की निकासी के लिए शासकीय नाली गुजरती है। आरोप है कि निर्माण के कारण आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और नाली भी बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती है।

सीसी रोड तोड़ने का भी आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस गली पर निर्माण किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है, वहां पूर्व में शासकीय राशि से सीसी रोड का निर्माण कराया गया था। यह मार्ग वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्माण के दौरान इस सीसी रोड को भी तोड़ दिया गया, जिससे शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

कलेक्टर से FIR दर्ज कराने की मांग

शिकायत कर्ता ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर मांग की है कि शासकीय सीसी रोड तोड़े जाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। उनका कहना है कि यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं बल्कि शासकीय संपत्ति को क्षति पहुंचाने का भी मामला है।

एक सप्ताह बाद भी नहीं हटाया गया मलबा, कार्रवाई का इंतजार

शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिकायत किए एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नगर पंचायत बसना के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा न तो टूटी हुई सीसी रोड का मलबा हटाया गया है और न ही अपराध दर्ज कराने की दिशा में कोई कार्रवाई की गई है। इससे नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

पहले भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला आया था

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ माह पहले भी “मोर बसना” स्वागत बोर्ड को विस्फोटक लगाकर उड़ाने की शिकायत सामने आई थी। उनका आरोप है कि उस मामले में भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब शासकीय सीसी रोड तोड़कर कथित अवैध निर्माण किए जाने के आरोप के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सोशल मीडिया में चर्चाओं का बाजार गर्म

इस पूरे मामले को लेकर बसना क्षेत्र के सोशल मीडिया में  संबंधित पक्षों के बीच कथित लेन-देन की चर्चाएं भी चल रही हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और महाजनपद न्यूज इन दावों की पुष्टि नहीं करता।

शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें

शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—

– राजस्व विभाग की टीम के साथ तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए।
– प्रस्तुत दस्तावेजों एवं वास्तविक खसरा नंबर की जांच कराई जाए।
– जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।
– शासकीय गली, नाली एवं सीसी रोड से अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक मार्ग को बहाल किया जाए।
– शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

मामले को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो इससे न केवल सार्वजनिक मार्ग और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि शासकीय संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और नगर पंचायत की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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