वन्यजीव अपराधियों पर सख्ती की तैयारी महासमुंद में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का शुभारंभ
महासमुंद/ वनमंडल महासमुंद द्वारा वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं सुदृढ़ न्यायालयीन कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए वनमंडल स्तरीय वन विद्यालय, महासमुंद में वन्यजीव अपराध, पहचान एवं अभियोजन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य वन्यजीवों से संबंधित अपराधों की समयबद्ध पहचान, वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन, प्रकरणों का विधिसम्मत पंजीयन एवं प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना है, ताकि दोषियों को कठोर दंड दिलाया जा सके और अवैध शिकार व तस्करी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
कार्यक्रम में डिप्टी डायरेक्टर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व श्री वरुण जैन, वनमंडलाधिकारी श्री मयंक पांडेय, अधिवक्ता श्री निमिश किरण शर्मा, सदस्य छत्तीसगढ़ वन्यजीव बोर्ड श्री गौरव निहलानी, तथा सदस्य, नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी रायपुर श्री रितेश श्रीवास विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में बताया कि कई बार वन्यजीव अपराधों के प्रकरण तकनीकी त्रुटियों, साक्ष्य की कमी या उचित धाराओं के अभाव में न्यायालय में कमजोर पड़ जाते हैं। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 सहित प्रासंगिक अधिनियमों एवं नियमों के प्रभावी प्रयोग, जब्ती कार्यवाही की शुद्ध प्रक्रिया, केस डायरी संधारण, फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन एवं समयबद्ध चालान प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि मजबूत विवेचना एवं ठोस साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को जमानत से रोका जा सकता है तथा कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जा सकता है।
कार्यशाला में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध की पहचान, घटनास्थल प्रबंधन, पंचनामा तैयार करने की विधि, जब्त सामग्री के संरक्षण, वन्यजीव अंगों की पहचान, न्यायालयीन प्रक्रिया एवं अभियोजन की कार्यप्रणाली के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। विभिन्न वास्तविक प्रकरणों के उदाहरणों के माध्यम से व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। वक्ताओं ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल विभागीय दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी एवं अवैध व्यापार के विरुद्ध सतत निगरानी, जन जागरूकता एवं सख्त कार्रवाई ही प्रभावी समाधान है। कार्यक्रम में समस्त एसडीओ, रेंज अधिकारी, डिप्टी रेंजर एवं परिसर रक्षक उपस्थित रहे।



