महासमुंद। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ग्राम बकमा निवासी युवक चितरंजन पटेल की मृत्यु हत्या की साजिश का नतीजा थी। आरोपियों ने मारपीट के बाद बेहोश चितरंजन को सडक़ किनारे फेंककर तथा उसकी बाइक को पत्थरों से कुचलकर इसे सडक़ हादसा दिखाने की कोशिश की। वारदात 15 अप्रैल की है। बेहोश चितरंजन की 2 दिन पूर्व 22 मई को इलाज के दौरान मौत हो गई। वारदात के 39 दिन बाद पुलिस ने उसी गांव के कुंजन साहू, दीपेश साहू थाना बागबाहरा क्षेत्र निवासी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है।
इस मामले में बताना जरूरी है कि मारपीट के 8 दिन बाद होश में आने पर चितरंजन ने 3 आरोपियों के नाम बता दिये थे। नाम सामने आने के बाद भी करीब माह भर आरोपी बेखौफ गांव में घूमते रहे और पीडि़त परिवार को धमकाते रहे। इस मामले का एक आरोपी अभी भी फ रार है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों में से एक की बहन से चितरंजन प्रेम करता था और परिवार की सहमति के बगैर ही उससे विवाह कर लिया था। इससे वे आक्रोशित थे।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बकमा निवासी लीला बाई पटेल ने 3 मई को थाना कोमाखान में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पुत्र चितरंजन पटेल के साथ ग्राम लामीसरार स्थित मुर्गी फ ार्म के पास दीपेश साहू, कुंजन साहू एवं एक अन्य व्यक्ति ने पुरानी रंजिश के चलते मारपीट की है।
इस घटना में गंभीर रूप से घायल चितरंजन का उपचार चल रहा था और वह बेहोशी की हालत में था। उपचार के दौरान 22 मई को उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच में मारपीट,गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज किया गया था।
मृतक के इलाजरत रहने तथा चोटों की प्रकृति स्पष्ट नहीं होने के कारण घटना की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकी थी। इस दौरान आरोपियों ने घटना को सडक़ दुर्घटना साबित करने का प्रयास भी किया। पुलिस ने मर्ग जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिस्थिति जन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में हत्या की धारा 103-1 बीएनएस जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई।
विवेचना के दौरान तथ्य सामने आया है कि मृतक चितरंजन पटेल द्वारा पूर्व में आरोपियों में से एक की बहन को (भगाकर) ले जाने की घटना को लेकर आरोपी नाराज थे और बदला लेने की योजना बना रहे थे।
पुलिस के अनुसार 15 अप्रैल को आरोपियों ने अपने एक अन्य साथी के साथ मिलकर योजना बनाई। जब चितरंजन पटेल मोटर साइकिल से लामीसरार मुर्गी फार्म मोड़ के पास पहुंचा तो उसे रास्ते में रोककर कब्रिस्तान के समीप ले जाया गया। वहां पुराने विवाद को लेकर विवाद बढ़ा और तीनों आरोपियों ने डंडों से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
पुलिस के अनुासर आरोपी और उसके साथियों ने पहले तो चितरंजन को बेहोश होते तक डंडों से पीटा। इसेक बाद वारदात को सडक़ हादसा बताने की कोशिश की गई। उसकी मोटरसाइकिल को पत्थर से क्षतिग्रस्त कर बेहोश चितरंजन और वाहन को बिजली खंभे के पास छोड़ दिया गया। ताकि मामला सडक़ दुर्घटना का प्रतीत हो।
जांच के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी कुंजन साहू और दीपेश साहू दोनों निवासी ग्राम बकमा को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। कार्रवाई पूर्ण कर दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किया गया है। पुलिस के अनुसार मामले में शामिल एक अन्य आरोपी फरार है।
कल इस मामले में यह तथ्य सामने आया है कि मारपीट की वारदात 15 अप्रैल की है। मारपीट से चितरंजन बेहोश हो गया था और उसे गंभीरावस्था में जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में दाखिल किया गया था। लेकिन मामले में एफआईआर 17 दिन बाद 3 मई को तब हुई, जब चितरंजन की मां लीलाबाई ने लिखित आवेदन में घटना का विवरण और आरोपियों के नाम का उल्लेख किया।
तदुपरांत कोमाखान पुलिस ने 296, 115-2, 126-2, 324-4, 3-5 के तहत मारपीट, गाली-गलौच, धमकी का अपराध दर्ज किया। उसके बाद भी ओरोपियों का अता-पता नहीं था। लेकिन आरोपी पीडि़त परिवार को धमकाते गांव में ही घूमते रहे। फिर से इसकी शिकायत लीलाबाई ने 8 मई को एसपी से करते हुए सुरक्षा मांगी। फि र भी पुलिस के हाथ खाली रहे।
आखिर 22 मई को चितरंजन की इलाज के दौरान मौत हो गई। फलस्वरूप पुलिस ने हत्या की धारा जोड़ी और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।



