महासमुंद। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर महासमुंद जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल नैमिषारण्य (नेमीशरण) पहुंचे हैं। वहां श्री राम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आरंग के सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित धुरु नारायण शुक्ला द्वारा व्यास पीठ से संगीतमय प्रवचन दिया जा रहा है। महासमुंद के अधिवक्ता सुनील शर्मा और उनकी पत्नी मीना शर्मा सहित क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन में शामिल हो रहे हैं।
कथा के दौरान पंडित धुरु नारायण शुक्ला ने भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप का मनोरम वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि किस तरह लोक-कल्याण और इंद्र का अहंकार नष्ट करने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठा लिया था।
कथावाचक ने व्यास पीठ की मर्यादा, धर्मग्रंथों के महत्व, महर्षि वेदव्यास, सम्राट पृथु और शौनक ऋषि के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि महाभारत की जो कथा आज हम पढ़ते हैं, वह सूत जी के पुत्र उग्रश्रवा सौति द्वारा नैमिषारण्य में ही महर्षि शौनक की उपस्थिति में 88,000 ऋषियों को विस्तारपूर्वक सुनाई गई थी। उग्रश्रवा सौति ने यह कथा तब सुनी थी जब महर्षि वैशम्पायन ने इसे राजा जनमेजय को सुनाया था।
पंडित जी ने कथा के दौरान इस पवित्र भूमि की महिमा बताते हुए कहा कि जब कलियुग का प्रारंभ होने वाला था, तब ऋषि-मुनि भयभीत हो गए। उन्होंने ब्रह्मा जी से किसी ऐसे स्थान के बारे में पूछा जो कलियुग के प्रभाव से मुक्त हो। तब ब्रह्मा जी ने अपना दिव्य मनोमय चक्र पृथ्वी की तरफ फेंका और कहा कि जहां यह चक्र रुकेगा, वही पृथ्वी का केंद्र होगा और वह स्थान कलियुग के दोषों से मुक्त रहेगा।
वह चक्र नैमिष वन में आकर रुका और भूमि में समा गया, जिसे आज चक्रतीर्थ के नाम से जाना जाता है। इसी पावन घटना के कारण नैमिषारण्य को पृथ्वी की नाभि भी कहा जाता है।



