बसना/ 138 महिलाओं से झांसा करोड़ों की ठगी सरकारी योजना के नाम पर आधार, फिंगरप्रिंट और OTP से खेल दो मुख्य बैंक BC पुलिस के हत्थे चढ़े
पिरदा की महिलाओं से सिस्टम एरर का बहाना बनाकर कई बार लिए गए फिंगरप्रिंट, बिना सहमति फर्जी लोन कराया पास; मुख्य आरोपी लक्ष्मीचंद देवांगन और मनोहर जटवार गिरफ्तार, बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में ,महासमुंद जिले की बसना पुलिस ने शासकीय योजना और मुफ्त कुकर का लालच देकर ग्राम पिरदा की 138 महिलाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी लोन निकालने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लक्ष्मीचंद देवांगन (40 वर्ष), निवासी ग्राम पिरदा, थाना बसना तथा मनोहर जटवार (33 वर्ष), निवासी ग्राम तरेकेला, थाना बसना के रूप में हुई है। दोनों इंडसलैंड बैंक के बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) के रूप में कार्यरत थे और उन पर अपनी बैंक बीसी आईडी का दुरुपयोग कर महिलाओं के नाम पर फर्जी लोन स्वीकृत कर करोड़ों रुपये का गबन करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, इससे पहले इस गिरोह के मुख्य एजेंट सुदर्शन साहू को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। सुदर्शन साहू ही गांव की महिलाओं से संपर्क कर उन्हें सरकारी योजना का लाभ और मुफ्त कुकर दिलाने का झांसा देता था तथा आधार कार्ड और बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट एकत्र करता था।
पुलिस जांच में सामने आया कि महिलाओं को बायोमेट्रिक मशीन में “सिस्टम एरर” बताकर गुमराह किया जाता था। एक ही महिला के 3 से 4 बार फिंगरप्रिंट लिए जाते थे और मोबाइल पर आए ओटीपी का उपयोग कर उनकी जानकारी एवं सहमति के बिना 50,450 रुपये तथा 58,000 रुपये तक के लोन स्वीकृत करा दिए जाते थे। महिलाओं को इस धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत फाइनेंस के कर्मचारी गांव पहुंचकर लोन की किश्त मांगने लगे। इसके बाद महिलाओं को पता चला कि उनके नाम पर पहले ही ऋण स्वीकृत कर राशि निकाल ली गई है। मामले में ग्राम पिरदा निवासी रजनी देवांगन ने 1 अप्रैल 2025 को बसना थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
बसना थाना में अपराध क्रमांक 137/2025 के तहत धारा 318(4), 238, 61(2) एवं 317(4) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। बैंक दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच में यह तथ्य सामने आया कि इंडसलैंड बैंक के बीसी लक्ष्मीचंद देवांगन और मनोहर जटवार ने सुदर्शन साहू के साथ मिलकर सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों आरोपियों ने महिलाओं से सीधे संपर्क किए बिना पर्दे के पीछे रहकर अपनी बैंक बीसी आईडी का दुरुपयोग किया और फर्जी लोन स्वीकृत कराकर करोड़ों रुपये का गबन किया।
विवेचना में यह भी प्रमाणित हुआ कि केवल शिकायतकर्ता ही नहीं बल्कि ग्राम पिरदा की 138 अन्य महिलाओं के साथ भी इसी प्रकार की धोखाधड़ी की गई। महिलाओं के आधार कार्ड, फिंगरप्रिंट और ओटीपी का दुरुपयोग कर उनके नाम पर ऋण स्वीकृत किए गए।
बसना पुलिस लंबे समय से दोनों मुख्य आरोपियों की तलाश कर रही थी। आखिरकार 1 जुलाई 2026 को दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। मामले में बैंक कर्मचारियों और अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच जारी है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से धोखाधड़ी में प्रयुक्त बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) मशीन और मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
गिरफ्तार आरोपी
– लक्ष्मीचंद देवांगन, पिता माधव राम देवांगन, उम्र 40 वर्ष, निवासी ग्राम पिरदा, थाना बसना (मुख्य साजिशकर्ता एवं बैंक बीसी)
– मनोहर जटवार, पिता रेशम लाल जटवार, उम्र 33 वर्ष, निवासी ग्राम तरेकेला, थाना बसना (मुख्य साजिशकर्ता एवं बैंक बीसी)
पूर्व में गिरफ्तार आरोपी
– सुदर्शन साहू – महिलाओं से आधार कार्ड, फिंगरप्रिंट और अन्य दस्तावेज जुटाने वाला मुख्य एजेंट।
महासमुंद पुलिस का कहना है कि आम जनता को आर्थिक अपराधों और साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस बहुचर्चित मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन जांच जारी है और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।



