Friday, March 20, 2026
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छत्तीसगढ़ ऐसे बना बीजेपी का गढ़, सत्ता से संगठन तक इन नेताओं का रहा अहम रोल

छत्तीसगढ़ ऐसे बना बीजेपी का गढ़, सत्ता से संगठन तक इन नेताओं का रहा अहम रोल  रायपुर: साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ। अलग छत्तीसगढ़ की लंबे समय तक चली मांग को बीजेपी के दिग्गज नेताओं का साथ मिला था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का छत्तीसगढ़ राज्य बनाने में अहम योगदान रहा है। यही कारण है कि बीजेपी हमेशा से कहती रही है की छत्तीसगढ़ राज्य बनाने में बीजेपी ने योगदान अमूल्य है। कहा जाता है कि अटल बिहारी ने साल 1990 में ही यह तय कर लिया था कि छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य बनना चाहिए। आज भाजपा अपना स्थापना दिवस मना रही है तो चलिए जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में बीजेपी का गढ़ कैसे बन गया।

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अविभाजित मध्य प्रदेश का हिस्सा छत्तीसगढ़ हमेशा से सुर्खियों में रहा है। साल 1998-99 में लोकसभा चुनाव के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने रायपुर के सभा में वादा किया था कि अगर केंद्र में उनकी सरकार बनी तो वह छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा दे देंगे। इसी चुनाव में बीजेपी की जीत हुई और छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य बन गया। 1 नवंबर, 2000 में छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा मिल गया। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद राज्य की बागडोर कांग्रेस नेता और पूर्व कलेक्टर अजीत जोगी को सौंपी गई। 2003 में पहली बार हुए थे चुनाव
अलग छत्तीसगढ़ में पहली बार विधानसभा के चुनाव 2003 में हुए और बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की।

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अविभाजित मध्य प्रदेश में कांग्रेस का किला रहा छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के बाद बीजेपी का गढ़ बन गया। साल 2000 से 2003 तक भाजपा विपक्ष की भूमिका में रही, 2003 में बीजेपी जीती और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में डॉ रमन सिंह पर भरोसा जताया। यह वही समय था जब पार्टी की स्थिति हासिए पर मानी जाती थी। इसी दौरान भाजपा के 13 विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के संपर्क में आकर कांग्रेस में शामिल हो गए। बीजेपी इस समय बड़े घमासान से जूझ रही थी। ऐसे में डॉक्टर रमन सिंह ने चुनौती को सुनहरे अवसर में बदल दिया। 15 साल तक छत्तीसगढ़ राज्य में राज कर चुके रमन सिंह की भूमिका भी बीजेपी की प्रदेश में मौजूदा स्थिति में काफी योगदान रहा है।

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नरेन्द्र मोदी का भी रहा योगदान
छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के बाद साल 2003 में पहली बार प्रदेश में राष्ट्रीय कार्यसमिति हुई थी। इस कार्यसमिति की घोषणा के लिए अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी समेत तमाम भाजपा के दिग्गज नेता पहुंचे थे। राज्य के निर्माण से पहले मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां के संगठन प्रभारी भी रहे थे। छत्तीसगढ़ राज्य के संगठन के कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी सजग भी रहे हैं। साल 2003 में जब पहली बार विधानसभा चुनाव हुए तब बीजेपी के दिग्गज नेता अरुण जेटली का भी किरदार देखने को मिला। अजीत जोगी के कार्यकाल में अरुण जेटली ने छत्तीसगढ़ में नई हलचल ला दी थी। गढ़ बनाने के लिए की कड़ी मेहनत
बीजेपी के तमाम प्रदेश अध्यक्ष ने भी छत्तीसगढ़ को गढ़ बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बीजेपी ने प्रदेश को पहला अध्यक्ष साल 2001 में ताराचंद साहू जैसे दिग्गज को बनाया।

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इन्होंने प्रदेश में बीजेपी की नींव को मजबूत करने का काम किया है। इसके बाद लखीराम अग्रवाल ने 2002 में प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाली। 2002 में ही पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने प्रदेश की बागडोर संभाली और पार्टी को सत्ता के शिखर पर बैठाया। इसके बाद संगठन को मजबूती देने और आदिवासियों के बीच अपनी पाठ जमाने के लिए साल 2003 से 2004 तक नंदकुमार साय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। नंद कुमार साय प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से आदिवासियों के बीच बीजेपी की अच्छी छवि बन गई। इनके बाद शिव प्रताप सिंह 2004 से लेकर 2006 तक प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।

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अब तक 14 प्रदेश अध्यक्ष बनाए
बीजेपी ने अब तक 14 प्रदेश अध्यक्षों को छत्तीसगढ़ की बागडोर सौंपी है। साल 2006 से 2010 तक मौजूदा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश संगठन को मजबूत करने का काम किया है। इसके बाद रामसेवक पैकरा ने 2010 से 2014 तक प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान संभाली है। इसके बाद फिर एक बार विष्णु देव साय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। साल 2014 से 2016 तक और साल 2016 से 2019 तक प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक रहे। विक्रम उसेंडी को भी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तीन बार छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं। साल 2020 से लेकर 22 तक विष्णु देव ही प्रदेश अध्यक्ष बने रहे। साल 2022 से विधानसभा चुनाव होने तक अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। मौजूदा समय में किरण सिंहदेव पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

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